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20 जून 1997: बम ब्लास्ट से दहल उठा था कानपुर, दोषी को 7 साल कैद

Sat, 02 Feb 2019 10:35 PM IST
प्रशांत कुमार यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 02 Feb 2019 10:35 PM IST
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20 June 1997 night bomb blast Guilty imprisoned 7 years
डेमो पिक
महानगर कानपुर के घंटाघर चौराहे पर 22 साल पहले हुए बम विस्फोट कांड में एक अभियुक्त को एडीजे-9 चंद्रप्रकाश तिवारी ने विस्फोटक अधिनियम के तहत दोषी मानते हुए सात साल कैद की सजा सुनाई है। 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। दूसरे अभियुक्त को पर्याप्त सबूत न होने पर रिहा कर दिया है। विस्फोट के पीछे आतंकी कनेक्शन सामने आया था।
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घंटाघर चौराहे पर 20 जून 1997 की रात लगभग सवा आठ बजे भीषण विस्फोट हुआ था। इसमें विस्फोटक सामग्री ले जाने वाले व्यक्ति के साथ पांच राहगीर भी घायल हुए थे। ड्यूटी पर तैनात सिपाही त्रिपुरारी पांडे ने जोखनपुर बरेली निवासी अब्दुल खालिक के खिलाफ हरबंश मोहाल थाने में रिपोर्ट लिखाई थी। कहा था कि एक व्यक्ति साइकिल लेकर स्टेशन की तरफ से आया और सेंट्रल धर्मशाला के सामने सरदार होटल के पास एक अन्य साइकिल सवार से भिड़कर गिर गया।
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आतंकी टुंडा से भी था कनेक्शन

स्टेशन की ओर से आने वाले व्यक्ति के पास विस्फोटक सामग्री थी, जिससे जोरदार धमाका हुआ। सिपाहियों ने राहगीरों की मदद से विस्फोट कर भाग रहे अब्दुल खालिक को गिरफ्तार कर लिया। वह भी जख्मी हो गया था। इसकी जांच लखनऊ क्राइम ब्रांच की बम ब्लास्ट जांच सेल को सौंपी गई थी। 

सीबीसीआईडी के विशेष लोक अभियोजक नागेश कुमार दीक्षित ने बताया कि एसआई असलम खां ने जांच की। अब्दुल खालिक की निशानदेही पर बरेली के धौरा टांडा निवासी अब्दुल रहमान उर्फ मिकाइल उर्फ बिजली वाला उर्फ जाबिर को भी गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने अब्दुल खालिक को सजा सुनाई, जबकि अब्दुल रहमान को दोषमुक्त करार दिया है।

एसपीओ नागेश कुमार दीक्षित और सीबीसीआईडी के काशी सिंह परिहार ने बताया कि अयोध्या में विवादित ढांचा ध्वंस के बाद देश में हुए लगभग 40 बम धमाकों के मास्टर माइंड आतंकी सैयद अब्दुल करीम उर्फ टुंडा से भी रहमान और खालिक का कनेक्शन सामने आया था। नेपाल सीमा से टुंडा ने गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में इन दोनों का नाम लिया था। दिल्ली पुलिस भी विस्फोट कांड की जांच करने कानपुर आई थी और यहां से साक्ष्य ले गई थी।
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