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अपात्र मकान के अंदर, गरीब रह रहे पन्नी तानकर.
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फर्रुखाबाद। नगर पंचायत मोहम्मदाबाद में इंट्रीग्रेटेड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईएचएसडीपी) के तहत 132 आवास बने हैं। ये आवास गरीबों को दिए जाने हैं। डीएम के आदेश पर आवंटित किए गए 89 आवासों में सबसे ज्यादा अपात्रों को आवंटित कर दिए गए हैं। पात्र अभी भी पन्नी तानकर रहने को मजबूर हैं।
इंटी ग्रेटेड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत मोहम्मदाबाद में वर्ष 2008-09 में 132 आवास बनने शुरू हुए थे। सीएनडीएस संस्था ने लगभग साढ़े चार करोड़ से ज्यादा की लागत से निर्माण कार्य कराया था। ये आवास गरीबों को दिए जाने थे। इसके लिए अनुसूचित जाति के गरीबों को लगभग 14 हजार और सामान्य वर्ग को 17 हजार रुपये का ड्राफ्ट डूडा को बनाकर देना था।
बताते हैं कि मकान बनने के बाद लगभग डेढ़ साल पहले जिलाधिकारी ने डूडा को 132 आवासों में 89 आवास आवंटित करने के आदेश दिए थे। आवास आवंटन के दौरान डूडा के एक प्राइवेट कर्मचारी ने अपात्रों से 30 से 40 हजार रुपये लेकर आवास आवंटित कर दिए। मौजूदा समय में आवंटित 89 आवासों में से अधिकतर में अपात्र रह रहे हैं। जिन्हें आवास आवंटित किए गए हैं। उनमें किसी के पास दो-दो मंजिला मकान है तो कोई संविदा में नौकरी कर रहा है। रोडवेज निगम के परिचालक भी मकान लेने वालों में शामिल हैं।
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किदवई नगर मोहल्ला में पन्नी तानकर रह रहीं लाली पत्नी जितेंद्र कठेरिया ने बताया कि उन्होंने भी आवास के लिए फार्म भरा था लेकिन उन्हें आवास नहीं मिला। डीएम से भी शिकायत की थी। अस्पताल के जर्जर भवन में रह रहीं सुनीता देवी पत्नी स्व. रामस्वरूप कहती हैं कि मजदूरी करके पेट पाल रही हैं। इस आस में आवेदन भरा था कि सिर छिपाने को छत मिल जाएगी लेकिन पैसे वालों को ही छत दी गई। यही कहना है गायत्री देवी पत्नी दिनेश कुमार का।
आवंटन के दौरान कराएंगे जांच
जिला परियोजना अधिकारी जय विजय सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में भी है कि आईएचएसडी कालोनी में अपात्र भी रह रहे हैं। जल्द ही बचे हुए आवासों का आवंटन किया जाना है। इसी दौरान कमेटी बनाकर जांच करवाई जाएगी। अपात्रों को बाहर कर पात्रों को आवास दिए जाएंगे।
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इंटी ग्रेटेड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत मोहम्मदाबाद में वर्ष 2008-09 में 132 आवास बनने शुरू हुए थे। सीएनडीएस संस्था ने लगभग साढ़े चार करोड़ से ज्यादा की लागत से निर्माण कार्य कराया था। ये आवास गरीबों को दिए जाने थे। इसके लिए अनुसूचित जाति के गरीबों को लगभग 14 हजार और सामान्य वर्ग को 17 हजार रुपये का ड्राफ्ट डूडा को बनाकर देना था।
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बताते हैं कि मकान बनने के बाद लगभग डेढ़ साल पहले जिलाधिकारी ने डूडा को 132 आवासों में 89 आवास आवंटित करने के आदेश दिए थे। आवास आवंटन के दौरान डूडा के एक प्राइवेट कर्मचारी ने अपात्रों से 30 से 40 हजार रुपये लेकर आवास आवंटित कर दिए। मौजूदा समय में आवंटित 89 आवासों में से अधिकतर में अपात्र रह रहे हैं। जिन्हें आवास आवंटित किए गए हैं। उनमें किसी के पास दो-दो मंजिला मकान है तो कोई संविदा में नौकरी कर रहा है। रोडवेज निगम के परिचालक भी मकान लेने वालों में शामिल हैं।
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किदवई नगर मोहल्ला में पन्नी तानकर रह रहीं लाली पत्नी जितेंद्र कठेरिया ने बताया कि उन्होंने भी आवास के लिए फार्म भरा था लेकिन उन्हें आवास नहीं मिला। डीएम से भी शिकायत की थी। अस्पताल के जर्जर भवन में रह रहीं सुनीता देवी पत्नी स्व. रामस्वरूप कहती हैं कि मजदूरी करके पेट पाल रही हैं। इस आस में आवेदन भरा था कि सिर छिपाने को छत मिल जाएगी लेकिन पैसे वालों को ही छत दी गई। यही कहना है गायत्री देवी पत्नी दिनेश कुमार का।
आवंटन के दौरान कराएंगे जांच
जिला परियोजना अधिकारी जय विजय सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में भी है कि आईएचएसडी कालोनी में अपात्र भी रह रहे हैं। जल्द ही बचे हुए आवासों का आवंटन किया जाना है। इसी दौरान कमेटी बनाकर जांच करवाई जाएगी। अपात्रों को बाहर कर पात्रों को आवास दिए जाएंगे।