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पेयजल कंपनी पर 14 लाख का जुर्माना
Updated Thu, 20 Jul 2017 12:14 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नवाबगंज। लखनऊ कानपुर राजमार्ग पर एक शीतल पेयजल कंपनी प्रबंधन ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है। शिकायत पर एसडीएम ने मामले की जांच कराई। जिसमें कब्जेदारी का सच निकलकर सामने आया। अवैध कब्जेदारी पर एसडीएम ने प्लांट प्रबंधन पर 14 लाख का जुर्माना लगाया है।
नवाबगंज विकास खंड के जैतीपुर संपर्क मार्ग पर वृंदावन बाटलिंग प्राइवेट लि. वाटर प्लांट लगभग चार सालों से संचालित है। बताते चलें कि वाटर प्लांट के निर्माण के बाद से ही क्षेत्रीय लोगों ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ खूब प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन की गूंज गांव से लखनऊ तक गूंजी थी। इस दौरान एक सपा नेता ने मामले को निपटाने में प्रबंधन की खासा मदद की थी। प्लांट में उत्पादन का काम शुरू होने के साथ ही साल दर साल भूगर्भ का जलस्तर गिरता चला गया। इस दौरान प्लांट प्रबंधन ने सरकारी जमीन पर निर्माण भी करा लिया। अवैध निर्माण की
शिकायत ग्रामीणों ने कई बार जिला प्रशासन से की मगर कार्रवाई सिफर रही। कुछ दिनों पहले एसडीएम मनीष बंसल से प्लांट प्रबंधन द्वारा सरकारी जमीन को कब्जाने की शिकायत की गई। एसडीएम ने तहसीलदार व लेखपाल की संयुक्त जांच टीम गठित कर जांच कराई। जांच में अवैध निर्माण की पुष्टि होने पर एसडीएम ने प्रबंधन को नोटिस जारी कर अवैध निर्माण ढहाने के निर्देश दिए। नोटिस के बाद भी कब्जा न हटाने पर एसडीएम ने प्लांट मालिक पर 14 लाख का जुर्माना लगाया है। एसडीएम मनीष बंसल ने बताया कि जांच में अवैध कब्जा पाया गया है। जिसके तहत जुर्माने की कार्यवाई के साथ ही अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्लांट मैनेजर आर के त्रिपाठी ने बताया कि जुर्माने की कार्यवाही की जानकारी नहीं है। जो भी कार्रवाई होगी उसकी जवाबदेही प्रबंधन की होगी। इस दौरान गोलमोल जवाब देकर कन्नी काट गए।
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पेयजल कंपनी पर लाखों का जुर्माना
एसडीएम हसनगंज की जांच में जमीन पर कब्जे का हुआ खुलासा
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नवाबगंज। लखनऊ कानपुर राजमार्ग पर एक शीतल पेयजल कंपनी प्रबंधन ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है। शिकायत पर एसडीएम ने मामले की जांच कराई। जिसमें कब्जेदारी का सच निकलकर सामने आया। अवैध कब्जेदारी पर एसडीएम ने प्लांट प्रबंधन पर 14 लाख का जुर्माना लगाया है।
नवाबगंज विकास खंड के जैतीपुर संपर्क मार्ग पर वृंदावन बाटलिंग प्राइवेट लि. वाटर प्लांट लगभग चार सालों से संचालित है। बताते चलें कि वाटर प्लांट के निर्माण के बाद से ही क्षेत्रीय लोगों ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ खूब प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन की गूंज गांव से लखनऊ तक गूंजी थी। इस दौरान एक सपा नेता ने मामले को निपटाने में प्रबंधन की खासा मदद की थी। प्लांट में उत्पादन का काम शुरू होने के साथ ही साल दर साल भूगर्भ का जलस्तर गिरता चला गया। इस दौरान प्लांट प्रबंधन ने सरकारी जमीन पर निर्माण भी करा लिया। अवैध निर्माण की
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शिकायत ग्रामीणों ने कई बार जिला प्रशासन से की मगर कार्रवाई सिफर रही। कुछ दिनों पहले एसडीएम मनीष बंसल से प्लांट प्रबंधन द्वारा सरकारी जमीन को कब्जाने की शिकायत की गई। एसडीएम ने तहसीलदार व लेखपाल की संयुक्त जांच टीम गठित कर जांच कराई। जांच में अवैध निर्माण की पुष्टि होने पर एसडीएम ने प्रबंधन को नोटिस जारी कर अवैध निर्माण ढहाने के निर्देश दिए। नोटिस के बाद भी कब्जा न हटाने पर एसडीएम ने प्लांट मालिक पर 14 लाख का जुर्माना लगाया है। एसडीएम मनीष बंसल ने बताया कि जांच में अवैध कब्जा पाया गया है। जिसके तहत जुर्माने की कार्यवाई के साथ ही अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्लांट मैनेजर आर के त्रिपाठी ने बताया कि जुर्माने की कार्यवाही की जानकारी नहीं है। जो भी कार्रवाई होगी उसकी जवाबदेही प्रबंधन की होगी। इस दौरान गोलमोल जवाब देकर कन्नी काट गए।
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पेयजल कंपनी पर लाखों का जुर्माना
एसडीएम हसनगंज की जांच में जमीन पर कब्जे का हुआ खुलासा