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बिछुड़े जोड़े मिलाए
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औरैया। महिला समाख्या के तत्वावधान में ब्लॉक सभागार में नारी अदालत बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें छोड-छुड़ौती, मारपीट के आठ केस दर्ज हुए। जिसमे दो केस सुलह-समझौते से सुलटाए गए। दोनों पक्षों से एक-एक गवाह के स्टाम्प पेपर पर हस्ताक्षर भी करवाये गये। नारी अदालत की टीम सारे केसो का लगातार फालोअप लगातार किया जाता है। सफलता मिलने पर उनकी केस स्टडी भी तैयार की जाती है।
गौरतलब है कि प्रत्येक माह की 29 तारीख को महिला समाख्या द्वारा ब्लाक स्तर पर नारी अदालत का आयोजन किया जाता है। जिसमें पति-पत्नी के बीचआपसी झगड़ा, मापीट, घरेलू हिंसा, बाल अपराध, छोड़-छुड़ौती के मामले आम सहमति से सुलझाये जाते हैं। नारी अदालत टीम के सदस्य शकुं तला, राजेश्वरी, मालती, सुधा, उर्मिला, बुद्वश्री व महिला समाख्या के कायज्कर्ता शशि, रागिनी व पक्ष-विपक्ष वाले लोग मौजूद रहे।
सहारनपुर की ट्रेनर मधु तथा उनकी सहयोगी बाबूश्री, रागिनी, शीतला, संध्या महिला द्वारा नारी अदालत की टीम को कानून सम्बंधी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 30 दिसंबर को यह प्रशिक्षण समाप्त होगा। गौरतलब है कि नारी अदालत महिलाओं का एक ऐसा मंच है। जहॉ पर महिलाएं समाज में नहीं बोल सकती और घर की चाहर दीवारी के अंदर रहना ही इनकी नियति है। उस वंचित समूह की महिलाएं सामाजिक नजरिये से संतुलन बनाते हुए न्यायिक प्रक्रिया चलाती हैं।
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गौरतलब है कि प्रत्येक माह की 29 तारीख को महिला समाख्या द्वारा ब्लाक स्तर पर नारी अदालत का आयोजन किया जाता है। जिसमें पति-पत्नी के बीचआपसी झगड़ा, मापीट, घरेलू हिंसा, बाल अपराध, छोड़-छुड़ौती के मामले आम सहमति से सुलझाये जाते हैं। नारी अदालत टीम के सदस्य शकुं तला, राजेश्वरी, मालती, सुधा, उर्मिला, बुद्वश्री व महिला समाख्या के कायज्कर्ता शशि, रागिनी व पक्ष-विपक्ष वाले लोग मौजूद रहे।
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सहारनपुर की ट्रेनर मधु तथा उनकी सहयोगी बाबूश्री, रागिनी, शीतला, संध्या महिला द्वारा नारी अदालत की टीम को कानून सम्बंधी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 30 दिसंबर को यह प्रशिक्षण समाप्त होगा। गौरतलब है कि नारी अदालत महिलाओं का एक ऐसा मंच है। जहॉ पर महिलाएं समाज में नहीं बोल सकती और घर की चाहर दीवारी के अंदर रहना ही इनकी नियति है। उस वंचित समूह की महिलाएं सामाजिक नजरिये से संतुलन बनाते हुए न्यायिक प्रक्रिया चलाती हैं।
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