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केन-बेतवा लिंक में गुम हो जाएंगे 17 गांव, 13,125 हेक्टेयर खेती

Mon, 06 Jun 2022 11:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jun 2022 11:54 PM IST
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17 villages, 13,125 hectares of cultivation will be lost in Ken-Betwa link
17 villages, 13,125 hectares of cultivation will be lost in Ken-Betwa link - फोटो : BANDA
बांदा। बुंदेलखंड में खेत और पेट को पानी मुहैया कराने वाली केन-बेतवा लिंक परियोजना में 17 गांव गुम हो जाएंगे। साथ ही 13,125 हेक्टेयर खेती योग्य भूमि भी पानी में समा जाएगी। यह सच्चाई राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण ने लिखित तौर पर स्वीकारी है। साथ ही भरोसा दिलाया है कि यूपी व एमपी के बुंदेलखंड के 12 जिलों में इस परियोजना से करीब 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की वार्षिक सिंचाई के लिए पानी मुहैया होगा। 103 मेगावाट बिजली पैदा होगी।
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मंजूरी के करीब 17 वर्षों बाद केन-बेतवा लिंक परियोजना की तमाम अड़चनें दूर हो जाने के बाद अब इस पर काम शुरू है। हालांकि इस लेट-लतीफी के नतीजे में परियोजना की लागत करीब छह गुना महंगी हो गई। शुरुआत वर्ष 2005 में इसकी लागत मात्र 7615 करोड़ रुपये आंकी गई थी। अब यह बढ़कर 44,605 करोड़ हो गई है। देरी की वजह परियोजना के पानी बंटवारे को लेकर यूपी और एमपी के बीच असहमति और विवाद रहा। पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप कर दोनों राज्यों के बीच समझौता कराया।
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राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण (एनडब्ल्यूडीए) द्वारा इसी पखवारे बांदा के आरटीआई एक्टीविस्ट कुलदीप शुक्ल को दी गई सूचना में बताया है कि केन-बेतवा लिंक में बनाए जा रहे दोधन बांध में 10 गांव डूब जाएंगे। इसके अलावा परियोजना के दूसरे चरण में 7 गांव डूबेंगे। यानी कुल 17 गांव डूब क्षेत्र में शामिल हैं। यह भी बताया है कि इन गांवों में क्त्रस्मश: 8339 एवं 2945 हेक्टेयर (कुल 11,284) ग्रामीण बाशिंदे प्रभावित होंगे। (इस क्षेत्र में ज्यादातर आदिवासी आबाद हैं)। अभिकरण ने यह भी कहा है कि इन गांवों के लोगों को अभी कहीं विस्थापित नहीं किया गया है। व्यवस्थापकों को मुआवजा 2013 के अधिनियम के तहत दिया जाएगा।
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अभिकरण को पांच करोड़ जारी
बांदा। केन-बेतवा लिंक पर काम करने के लिए राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण को पांच करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। दूसरे फेज में लोअरउर बांध एवं कोथा बैराज का काम शुरू हो चुका है।
13,125 खेती और 6017 हेक्टेयर जंगल डूबेंगे
बांदा। केन-बेतवा लिंक में 13,125 हेक्टेयर उपजाऊ/खेती योग्य भूमि और 6017 हेक्टेयर जंगल भी डूबेंगे। कुलदीप द्वारा मांगी गई आरटीआई में राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण के अधीक्षण अभियंता एससी अवस्थी ने बताया है कि दोधन बांध में 2473 हेक्टेयर और दूसरे फेज में लोअरउर परियोजना में 857.4 हेक्टेयर, कोथा बैराज में 681 हेक्टेयर तथा बीना कांप्लेक्स में कुल 9114 हेक्टेयर खेती योग्य जमीन प्रभावित होगी।
चार पावर हाउस और दो सोलर प्लांट बनेंगे
बांदा। केन-बेतवा लिंक में प्रस्तावित दोधन बांध के नजदीक दो पावर हाउस (बिजली घर) बनेंगे। इनकी क्षमता क्त्रस्मशऱ् 60 एवं 18 मेगावाट होगी। दूसरे चरण में बीना कांप्लेक्स में भी 20 मेगावाट और 5 मेगावाट के दो पावर प्रस्तावित हैं। दोधन बांध में कोई सोलर प्लांट नहीं बनेगा। अलबत्ता दूसरे फेज में लोअरउर परियोजना में 19 मेगावाट और कोथा बैराज में 8 मेगावाट के सोलर प्लांट बनेंगे।

पर्यावरण पैरोकार विरोध कर रहे लगातार
बांदा। केन-बेतवा लिंक को केंद्र और यूपी-एमपी की सरकारें जहां बुंदेलखंड के लिए क्त्रसंतिकारी और बेहद लाभदायक बता रही हैं तो दूसरी तरफ परियोजना से प्रभावित हो रहे गांवों के ग्रामीण, कई पर्यावरण पैरोकार और स्वयंसेवी संगठन इसका लगातार विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी असहमति जताते हुए कहा कि इससे पन्ना टाइगर रिजर्व तबाह हो जाएगा। विरोध करने वालों की दलीलें हैं कि सबसे बड़ा नुकसान बुंदेलखंड के एकलौते अभ्यारण्य पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क को होगा। इसका बड़ा इलाका पानी में डूब जाएगा। बड़े पैमाने में जंगलों का सफाया होगा। केन नदी का अस्तित्व खतरे में आ जाने की दलीलें भी दी जा रही हैं।
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