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अरबों की जमीन में फंसे कई अफसल

Sat, 09 Jun 2018 12:36 AM IST
Updated Sat, 09 Jun 2018 12:36 AM IST
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अरबों की जमीन में फंसे कई अफसल
फतेहपुर। चर्च की जमीन को कई तरीके से बेचकर वहां आबादी बसा देने के मामले में जनपद की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई होने की बिसात बिछ चुकी है। शासन ने प्रकरण की शुरुआत से लेकर अब तक इसमें शामिल सभी अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर करने के आदेश दिए हैं। इससे पिछले 55 साल में जितने अधिकारी सदर तहसील के पदों पर रहे हैं सभी की सत्यनिष्ठता संदिग्ध हो गई है।
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मामला देवीगंज स्थित वीमेंस यूनियन मिशनरी सोसाइटी चर्च की तकरीबन 22 बीघे जमीन में से लगभग 15 बीघे जमीन का है। जनपद के कुछ तथाकथित सफेदपोश लोगों ने अधिकारियों से सांठगांठ करके प्लाटिंग कर दी। 1963 से चर्च की जमीन पर लगा भूमाफियों का ग्रहण अब तक चलता चला आ रहा है। 55 वर्ष की अवधि में चर्च की जमीन को कई बार अलग-अलग लोगों ने बाकायदा वरासत कराकर बेचा और खरीदा। सूत्रों की मानें तो मामले में करीब 27 नायब तहसीलदार 33 तहसीलदार, सात उपजिलाधिकारी, 26 सब रजिस्ट्रार, चालीस अधिवक्ता और सोलह जमीन की खरीद फरोख्त करने वाले कारोबारियों पर एफआईआर कराने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। एडीएम जेपी गुप्ता ने सदर एसडीएम प्रेम प्रकाश तिवारी को 1963 से अब तक के अधिकारियों के नामों की सूची तैयार करने और उनके कार्यकाल का पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इस काम में तकरीबन बारह घंटे तक पड़ताल करने के बाद देर शाम परिणाम सिफर निकला। प्रभारी डीएम व सीडीओ चांदनी सिंह को जानकारी दी गई कि 55 वर्ष की अवधि में कितने अधिकारियों की तैनाती रही है और किसके कार्यकाल में चर्च की जमीन के मसले में क्या-क्या हुआ, यह बता पाना संभव नहीं हो पा रहा है।
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इनसेट-
लेखपालों ने अधिकारों से इतर की थी वरासत
चर्च की जमीन के मसले में तत्कालीन लेखपालों ने बड़े पैमाने पर अहम भूमिकाएं निभाईं। लेखपालों ने अपने अधिकार क्षेत्र की परवाह किए बिना ट्रस्ट की जमीन को दूसरे लोगों के नाम वरासत तक कर दिया। हालांकि साल 2002 में तत्कालीन मंडलायुक्त तक मामला पहुंचने के बाद कुछ लेखपालों पर कार्रवाई भी हुई थी।
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अपने ही नाम करानी पड़ सकती है एफआईआर
फतेहपुर। मामले से जुड़े जानकारो की मानें तो सदर तहसीलदार जेपी पांडेय के कार्यकाल में भी चर्च की जमीन के कुछ हिस्से के बैनामे हुए हैं। जिससे यह स्थिति बन गई है कि अब उन्हें अपने नाम की भी एफआईआर करवानी पड़ सकती है। तहसीलदार जेपी पांडेय का कहना है कि जिन्होंने जमीने बेची हैं उनके पास बेचने के अधिकार थे। जमीन सरकार की नहीं भूमिधरी की है। जिसे आपत्ति हो वह सक्षम न्यायालय जा सकता है।


2003 में एसडीएम ने घोषित की थी सरकारी जमीन
वर्ष 2003 में तत्कालीन सदर एसडीएम ने फरमान जारी किया था कि चर्च के वीमेंस यूनियन मिशनरी सोसाइटी की जमीन सही मायने में सरकारी जमीन है। आरोप के मुताबिक उन्होंने अपने अधिकारों से इतर धारा 33/39 में आदेश कर दिया था। बाद में वर्ष 2009 मंडलायुक्त ने एसडीएम के आदेश को खारिज करते हुए जमीन पुन: वीमेंस यूनियन मिशनरी सोसाइटी के नाम दर्ज कर दी थी।


जमीन की सौदेबाजी में फंस रहे सौ से अधिक अधिकारी
चर्च की बेशकीमती जमीन पर प्लाटिंग कराने का मामला
पचास से अधिक राजपत्रित अधिकारियों पर गाज गिरनी तय
बारह घंटे तक चली पड़ताल, नहीं उजागर हो सके पूरे नाम
अमर उजाला ब्यूरो
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