फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   महिलाओं को रोजगार का सपना अधूरा

महिलाओं को रोजगार का सपना अधूरा

Fri, 30 Mar 2018 11:27 PM IST
Updated Fri, 30 Mar 2018 11:27 PM IST
विज्ञापन
महिलाओं को रोजगार का सपना अधूरा
फर्रुखाबाद। महिलाओं को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाने की सरकारी मंशा पर विभागीय अधिकारी ही पानी फेर रहे हैं। हाल यह है कि राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत तीन साल में अभी तक 300 के सापेक्ष मात्र 98 समूह ही गठित किए जा सके। यही नहीं रोजगार शुरू करने के लिए मात्र 29 समूहों को ही रिवाल्विंग फंड दिया गया है।
विज्ञापन



राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को स्वावलंबी बनाने और उन्हें रोजगार के साधन मुहैया कराने के लिए गारमेंट्स मेकिंग, ब्यूटीशियन, हैंडवर्क, सिलाई-कढ़ाई और जरी-जरदोजी आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिए महिलाओं का समूह गठित करके उन्हें तीन माह का प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए ऋण भी उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए सूडा की ओर से जिला नगरीय विकास अभिकरण कार्यालय में राष्ट्रीय शहरी
विज्ञापन



आजीविका मिशन कार्यालय की स्थापना की गई है, यहां की प्रभारी ज्योति सिंह हैं। सूत्रों की माने तो तीन साल में मिशन के तहत 300 समूह गठित करने का लक्ष्य दिया गया था, अभी तक मात्र 98 समूह ही गठित हो सके हैं। यही नहीं मात्र 29 समूह को ही दस-दस हजार रुपये का रिवाल्विंग फंड जारी किया गया है। ऋण की स्थिति भी
विज्ञापन
विज्ञापन


ठीक नहीं है। 15 समूह लोन का लक्ष्य था, जिसमें अभी तक सिर्फ एक की ही पूर्ति हुई है। अफसरों की लचर कार्यप्रणाली के चलते महिलाएं स्वावलंबी नहीं बन पा रही हैं। यही नहीं जिन प्रशिक्षण केंद्रों पर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, उनका समय-समय पर निरीक्षण भी नहीं किया जाता है।

अरुणा आसिफ अली शिक्षण-प्रशिक्षण एवं समाज सेवा समिति, बाबा मौजीलाल आदर्श विद्यालय समिति, लार्ड गनेशा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी और श्रीराम जन कल्याण शिक्षा समिति।

जब उन्होंने कार्यभार ग्रहण किया था, तब राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की स्थिति ज्यादा ठीक नहीं थी। मात्र नौ समूहों को ही रिवाल्विंग फंड दिया गया था। दो माह में उन्होंने 20 समूहों को रिवाल्विंग फंड जारी करवाया। राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन का लक्ष्य जल्द ही पूरा करवाया जाएगा। जय विजय सिंह (जिला परियोजना अधिकारी)


गरीब परिवार की महिलाओं को रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गारमेंट्स मेकिंग, ब्यूटीशियन, हैंडवर्क, सिलाई-कढ़ाई और जरी-जरदोजी का तीन-तीन माह का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके तहत एक से अधिक महिलाओं का एक समूह बनाया जाता है। उनको रोजगार कराने के लिए लोन दिलाने की व्यवस्था है। ताकि महिलाएं रोजगार की मुख्यधारा से जुड़कर स्वावलंबी बन सके।

महिलाओं को रोजगार, ठंडे बस्ते में
राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत तीन वर्षों में 300 समूह गठित करने का लक्ष्य, 98 समूह ही बने
अभी तक मात्र 29 समूहों को ही दिया गया रिवाल्विंग फंड, प्रशिक्षण केंद्रों में भी संसाधन अधूरे पड़े

अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed