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स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से मरीज बेहाल
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अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर देहात। संविदा डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, एएनएम आदि के लगातार दूसरे दिन हड़ताल पर रहने से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। जिला अस्पताल से सीएचसी, पीएचसी तक की ओपीडी से मरीजों को बुधवार को मायूस लौटना पड़ा। बच्चों को टीके नहीं लग पाए और मरीजों की जांचें भी नहीं हुईं। हड़ताली स्वास्थ्यकर्मियों ने बुधवार को सीएमओ कार्यालय पर धरना देकर सरकार की बुद्धि शुद्धि के लिए हवन किया। संगठन के जिलाध्यक्ष भोलेंद्र सिंह ने बताया कि बुधवार को भी हड़ताल जारी रहेगी।
जनपद में 71 चिकित्सक व फार्मासिस्ट, 39 आयुष डॉक्टर व फर्मासिस्ट, 33 स्टाफ नर्स, 112 एएनएम, 1686 आशा समेत दो हजार से अधिक संविदा स्वास्थ्यकर्मी हैं। इनकी ड्यूटी जिला अस्पताल, 11 सीएचसी, 6 पीएचसी और 25 न्यू पीएचसी समेत 43 केंद्र पर है। समान कार्य समान वेतन, विशिष्ट सेवा नीति, वेतन विसंगति, आउट सोर्सिंग खत्म करने सहित कई मांगों को लेकर संविदा स्वास्थ्य कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई हैं। हड़ताल के कारण मंगलवार को जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी के ज्यादातर कक्ष खुले ही नहीं। संविदा चिकित्सक व कर्मी न होने से मरीजों भटकते रहे, दोपहर बाद निजी अस्पतालों में इलाज कराया। टीकाकरण भी प्रभावित रहा, एसएनसीयू वार्ड में भी कम स्टाफ होने से अफरा-तफरी दिखी। ड्यूटी डॉक्टर अवधेश ने स्थिति गंभीर होती देख सीएमएस को सूचना दी, जिसके बाद अन्य स्टाफ नर्सों को वहां लगाया गया। महिला अस्पताल में ओपीडी से भी मरीज मायूस लौटे।
डेरापुर इंदरुख की ज्योति तिवारी ने बताया कि बच्चे को टीका लगवाने जिला अस्पताल आईं थीं। महिला मेटरनिटी विंग में कोई कर्मी ही नहीं था, अगले दिन आने को कहकर लौटा दिया गया। मुंगीसापुर की मैना देवी के घर का नवजात महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती है। वार्ड के कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के कारण पहले नवजात की छुट्टी कर दी गई, लेकिन कुछ देर बाद दोबारा भर्ती कर लिया गया।
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झींझक कस्बे के राजेंद्र नगर निवासी सौरभ ने बताया कि कई दिन से बुखार आ रहा है। जांच के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आए गए थे लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों के हड़ताल पर होने के कारण जांच नहीं हो सकी। बाद में आने को कहा गया है। ताली निवासी शिवनाथ सिंह ने बताया कि फार्मासिस्ट भी हड़ताल पर था, इससे दवा वितरण कक्ष में चतुर्थ श्रेणी कर्मी को लगाया गया था। शिवनाथ ने बताया कि फर्मासिस्ट के न होने के कारण दवा नहीं ली। नियमित स्टाफ नर्स सीमा भदौरिया, एजेंसी की रचना, प्रभा ने काम किया। हेल्थ वर्कर छोटे औषधि बांट रहा था। सीएचसी अधीक्षक विमलेश वर्मा ने बताया कि इस समय नहीं चल रहा है। रसूलाबाद प्रतिनिधि के अनुसार उमा देवी, शीला देवी, उमा पांडेय, नीलम, अर्चना, शशिबाला, संजू, अंकित, अमृता, राजकुमारी, मीना, प्रेमा, सुषमा, माधुरी आदि आशा ने प्रदर्शन किया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष भोलेंद्र सिंह धरना स्थल पर कहा कि अगर सरकार ने दो दिन में मांगें नहीं मानीं तो भूख हड़ताल पर चले जाएंगे। इसके साथ ही एंबुलेंस, एसएनसीयू समेत अन्य इमरजेंसी सेवाएं भी बाधित कर देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भेदभाव पूर्ण व्यवहार कर रही है। प्रदर्शन में महामंत्री आशीष अवस्थी, महेंद्र कुमार, रजनी शुक्ला, रत्नेश बाजपेयी, यतेंद्र शर्मा, जयनीत कटियार, अल्पना निरंजन, आकाश कुमार और राजेंद्र कुमार आदि शामिल रहे।
स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से मरीज बेहाल
जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी के ज्यादातर कक्षों में लटके ताले
क्रासर
ओपीडी से भी मायूस लौटे मरीज और जांचें भी नहीं हो पाईं
हड़ताली कर्मियों ने किया सरकार की बुद्धि शुद्धि के लिए हवन
फोटो संख्या 22एकेबीपी15- मेटरनिटी विंग में बंद कक्ष
फोटो संख्या 22एकेबीपी16- जिला अस्पताल के आयुष विंग में लटकते ताला
फोटो संख्या 22एकेबीपी17- झींझक सीएचसी में दवा वितरित करता हेल्थ वर्कर
फोटो संख्या 22एकेबीपी19- ज्योति तिवारी
फोटो संख्या 22एकेबीपी22- शिवनाथ
कानपुर देहात। संविदा डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, एएनएम आदि के लगातार दूसरे दिन हड़ताल पर रहने से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। जिला अस्पताल से सीएचसी, पीएचसी तक की ओपीडी से मरीजों को बुधवार को मायूस लौटना पड़ा। बच्चों को टीके नहीं लग पाए और मरीजों की जांचें भी नहीं हुईं। हड़ताली स्वास्थ्यकर्मियों ने बुधवार को सीएमओ कार्यालय पर धरना देकर सरकार की बुद्धि शुद्धि के लिए हवन किया। संगठन के जिलाध्यक्ष भोलेंद्र सिंह ने बताया कि बुधवार को भी हड़ताल जारी रहेगी।
जनपद में 71 चिकित्सक व फार्मासिस्ट, 39 आयुष डॉक्टर व फर्मासिस्ट, 33 स्टाफ नर्स, 112 एएनएम, 1686 आशा समेत दो हजार से अधिक संविदा स्वास्थ्यकर्मी हैं। इनकी ड्यूटी जिला अस्पताल, 11 सीएचसी, 6 पीएचसी और 25 न्यू पीएचसी समेत 43 केंद्र पर है। समान कार्य समान वेतन, विशिष्ट सेवा नीति, वेतन विसंगति, आउट सोर्सिंग खत्म करने सहित कई मांगों को लेकर संविदा स्वास्थ्य कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई हैं। हड़ताल के कारण मंगलवार को जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी के ज्यादातर कक्ष खुले ही नहीं। संविदा चिकित्सक व कर्मी न होने से मरीजों भटकते रहे, दोपहर बाद निजी अस्पतालों में इलाज कराया। टीकाकरण भी प्रभावित रहा, एसएनसीयू वार्ड में भी कम स्टाफ होने से अफरा-तफरी दिखी। ड्यूटी डॉक्टर अवधेश ने स्थिति गंभीर होती देख सीएमएस को सूचना दी, जिसके बाद अन्य स्टाफ नर्सों को वहां लगाया गया। महिला अस्पताल में ओपीडी से भी मरीज मायूस लौटे।
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डेरापुर इंदरुख की ज्योति तिवारी ने बताया कि बच्चे को टीका लगवाने जिला अस्पताल आईं थीं। महिला मेटरनिटी विंग में कोई कर्मी ही नहीं था, अगले दिन आने को कहकर लौटा दिया गया। मुंगीसापुर की मैना देवी के घर का नवजात महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती है। वार्ड के कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के कारण पहले नवजात की छुट्टी कर दी गई, लेकिन कुछ देर बाद दोबारा भर्ती कर लिया गया।
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झींझक कस्बे के राजेंद्र नगर निवासी सौरभ ने बताया कि कई दिन से बुखार आ रहा है। जांच के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आए गए थे लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों के हड़ताल पर होने के कारण जांच नहीं हो सकी। बाद में आने को कहा गया है। ताली निवासी शिवनाथ सिंह ने बताया कि फार्मासिस्ट भी हड़ताल पर था, इससे दवा वितरण कक्ष में चतुर्थ श्रेणी कर्मी को लगाया गया था। शिवनाथ ने बताया कि फर्मासिस्ट के न होने के कारण दवा नहीं ली। नियमित स्टाफ नर्स सीमा भदौरिया, एजेंसी की रचना, प्रभा ने काम किया। हेल्थ वर्कर छोटे औषधि बांट रहा था। सीएचसी अधीक्षक विमलेश वर्मा ने बताया कि इस समय नहीं चल रहा है। रसूलाबाद प्रतिनिधि के अनुसार उमा देवी, शीला देवी, उमा पांडेय, नीलम, अर्चना, शशिबाला, संजू, अंकित, अमृता, राजकुमारी, मीना, प्रेमा, सुषमा, माधुरी आदि आशा ने प्रदर्शन किया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष भोलेंद्र सिंह धरना स्थल पर कहा कि अगर सरकार ने दो दिन में मांगें नहीं मानीं तो भूख हड़ताल पर चले जाएंगे। इसके साथ ही एंबुलेंस, एसएनसीयू समेत अन्य इमरजेंसी सेवाएं भी बाधित कर देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भेदभाव पूर्ण व्यवहार कर रही है। प्रदर्शन में महामंत्री आशीष अवस्थी, महेंद्र कुमार, रजनी शुक्ला, रत्नेश बाजपेयी, यतेंद्र शर्मा, जयनीत कटियार, अल्पना निरंजन, आकाश कुमार और राजेंद्र कुमार आदि शामिल रहे।
स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से मरीज बेहाल
जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी के ज्यादातर कक्षों में लटके ताले
क्रासर
ओपीडी से भी मायूस लौटे मरीज और जांचें भी नहीं हो पाईं
हड़ताली कर्मियों ने किया सरकार की बुद्धि शुद्धि के लिए हवन
फोटो संख्या 22एकेबीपी15- मेटरनिटी विंग में बंद कक्ष
फोटो संख्या 22एकेबीपी16- जिला अस्पताल के आयुष विंग में लटकते ताला
फोटो संख्या 22एकेबीपी17- झींझक सीएचसी में दवा वितरित करता हेल्थ वर्कर
फोटो संख्या 22एकेबीपी19- ज्योति तिवारी
फोटो संख्या 22एकेबीपी22- शिवनाथ