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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   फोटो- 04 सीकेटीपी- 23, 24 व 25 परिचय- मंदाकिनी में डुबकी लगाते श्रद्धालु, मंदाकिनी नदी में नाव पर बैठकर भजन कीर्तन करते श्रद्धाल

फोटो- 04 सीकेटीपी- 23, 24 व 25 परिचय- मंदाकिनी में डुबकी लगाते श्रद्धालु, मंदाकिनी नदी में नाव पर बैठकर भजन कीर्तन करते श्रद्धाल

Sun, 04 Jun 2017 09:55 PM IST
Updated Sun, 04 Jun 2017 09:55 PM IST
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फोटो- 04 सीकेटीपी- 23, 24 व 25 परिचय- मंदाकिनी में डुबकी लगाते श्रद्धालु, मंदाकिनी नदी में नाव पर बैठकर भजन कीर्तन करते श्रद्धाल

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गंगा दशहरा पर लाखों ने मंदाकिनी में लगाई डुबकी

अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। गंगा दशहरा पर्व पर मंदाकिनी महोत्सव समिति ने हाथी घोड़ाें व बैंडबाजे के साथ धर्मनगरी में शोभायात्रा निकाली। जिसमें मंहतों साधु संत मंदाकिनी गंगा के किनारे पहुंचकर गंगा पूजन किया। इसके बाद कीर्तन मंडली नौका में बैठकर नौका बिहार करते हुए राम नाम संकीर्तन ढोलक मजीरे के साथ किया। इस नजारे को देखने के लिए सुदूर क्षेत्र से भक्त रामघाट देखने पहुंचे। लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में डुबकी लगाकर कामतानाथ की परिक्रमा लगाई।
रविवार को गंगा दशहरा पर्व होने पर मंदाकिनी महोत्सव समिति ने निर्मोही अखाड़ा से शोभा यात्रा गाजेबाजे के साथ निकाली। जिसमें विभिन्न अखाड़ों के निशान लेकर साधू संत करतब दिखाते हुए रामघाट पहुंचे। जहां मां मंदाकिनी गंगा की वैदिक मंत्रोउच्चारण के साथ पूजा पाठ किया गया। जिसमें कामदगिरी प्रमुख द्वार मदनदास, भरतमंदिर के महंत दिव्य जीवनदास, निमोर्ही अखाड़ा के महंत दीनदयाल दास,पंजाबी आश्रम,फलहारी आश्रम रामप्यारे, जानकीमहल के सीताशरण, रामानंद आश्रम के बलरामदास,जानकीमंदिर के सुखरामदास, परिक्रमा मार्ग के सच्चिदानंद विश्व हिंदू परिषद के कानपुर क्षेत्र के अवध किशारे आदि मौजूद रहे। वही प्रसिद्ध कथाकार देवीनंदन ठाकुर दास हजारों भक्तों के साथ रामघाट पहुंचे।गंगा दशहरा पर्व पर बांदा जिले खुटहा मोहल्ले के बाल मुकुंद, रामकिशोर शुक्ला, छेदीलाल, गिरजा विश्व कर्मा, पप्पू रज्जन अदि ने नौका मेें बैठक कर 24 घंटे की संकीर्तन शुरू किया।
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अनसुइया की तप से निकली गंगा
चित्रकूट। महंतों ने बताया कि प्राचीन काल में भंयकर सूख के कारण सभी नदी सूख गई थी। उस समय अत्री मुनी अनसुईया माता से पानी मांगा तो वह कमंडल लेकर पानी के लिए निकल पड़ी जब कहीं पानी नहीं मिला तो उन्होंने देव गंगा की आराधना की। जिससे अश्राम के सामने देव गंगा का उद्भव हुआ जो मंदगति से बहती थी। जिसके कारण उसका नाम मंदाकिनी पड़ गई।
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:- हाथी घोड़ा व बैंड बाजे के साथ निकली शोभा यात्रा
:- नाव में बैठ भजन मंडली ने किया संकीर्तन
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