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अन्ना मवेशियों से स्वास्थ्य सेवाएं ठप
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कंचौसी (औरैया)। कस्बे के एकमात्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार को दूसरे दिन भी आवारा पशुओं की मौजूदगी के कारण सभी स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बाधित रहीं। अन्ना पशुओं को लेकर पुलिस से किसानों की बहस भी हुई लेकिन किसान नहीं माने।
समाचार लिखे जाने तक मौके पर किसान-पुलिस मौजूद रहे। दूसरी ओर एसडीएम का कहना है कि समस्या का जल्द समाधान कराया जाएगा।
आवारा पशुओं से परेशान कई गांवों के किसानों ने गुरुवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में क्षेत्र के अन्ना मवेशी जबरदस्ती बंद कर दिए थे। उनका कहना है कि ऐसा उन्होंने अपनी फसल को बचाने के लिए किया है।
स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात चिकित्सक व अन्य कर्मचारियों को प्रशासन की अनदेखी के कारण किसानों की यह नाराजगी झेलनी पड़ रही है। इसका असर आम जनता के साथ-साथ मरीजों पर दिखाई पड़ रहा है।
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किसानों के मुताबिक, उन्होंने उच्चाधिकारियों से अपनी इस समस्या से अवगत कराया था, लेकिन जब किसी ने कुछ नहीं किया तो मजबूरी में उन्होंने यह कदम उठाया।
दूसरे दिन शुक्रवार को भी नाराज किसानों ने आवारा पशुओं को स्वास्थ्य केंद्र परिसर से बाहर नहीं निकलने दिया। इस कारण कंचौसी पुलिस से उनकी झड़प भी हुई। बहस के दौरान पुलिस अफसरों ने उन्हें मनाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए।
किसानों का कहना है कि इसी प्रकार अगर अनदेखी की गई तो उन्हेें भुखमरी का सामना करना पड़ सकता है। किसानों में आवारा पशुओं के कारण शासन और प्रशासन के प्रति खासा आक्रोश है।
इस संबंध में उपजिलाधिकारी डेरापुर दीपाली कौशिक का कहना है कि यह प्रदेश स्तर की समस्या है। शीघ्र ही चरागाहों को चिह्नित कर आवारा पशुओं को व्यवस्थित कर किसानों को इस समस्या से मुक्त कराने का कार्य किया जाएगा।
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समाचार लिखे जाने तक मौके पर किसान-पुलिस मौजूद रहे। दूसरी ओर एसडीएम का कहना है कि समस्या का जल्द समाधान कराया जाएगा।
आवारा पशुओं से परेशान कई गांवों के किसानों ने गुरुवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में क्षेत्र के अन्ना मवेशी जबरदस्ती बंद कर दिए थे। उनका कहना है कि ऐसा उन्होंने अपनी फसल को बचाने के लिए किया है।
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स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात चिकित्सक व अन्य कर्मचारियों को प्रशासन की अनदेखी के कारण किसानों की यह नाराजगी झेलनी पड़ रही है। इसका असर आम जनता के साथ-साथ मरीजों पर दिखाई पड़ रहा है।
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किसानों के मुताबिक, उन्होंने उच्चाधिकारियों से अपनी इस समस्या से अवगत कराया था, लेकिन जब किसी ने कुछ नहीं किया तो मजबूरी में उन्होंने यह कदम उठाया।
दूसरे दिन शुक्रवार को भी नाराज किसानों ने आवारा पशुओं को स्वास्थ्य केंद्र परिसर से बाहर नहीं निकलने दिया। इस कारण कंचौसी पुलिस से उनकी झड़प भी हुई। बहस के दौरान पुलिस अफसरों ने उन्हें मनाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए।
किसानों का कहना है कि इसी प्रकार अगर अनदेखी की गई तो उन्हेें भुखमरी का सामना करना पड़ सकता है। किसानों में आवारा पशुओं के कारण शासन और प्रशासन के प्रति खासा आक्रोश है।
इस संबंध में उपजिलाधिकारी डेरापुर दीपाली कौशिक का कहना है कि यह प्रदेश स्तर की समस्या है। शीघ्र ही चरागाहों को चिह्नित कर आवारा पशुओं को व्यवस्थित कर किसानों को इस समस्या से मुक्त कराने का कार्य किया जाएगा।