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टीम ने स्लाटर हाउस मालिकों के कसे पेंच
Updated Tue, 13 Jun 2017 12:31 AM IST
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उन्नाव। डीएम की ओर से गठित पांच सदस्यीय टीम ने मेसर्स इंडैग्रो फूड्स प्राइवेट लिमिटेड नामक स्लाटर हाउस का औचक निरीक्षण किया। मानकों की बारीकी से जांच की गई। इसमें फैक्ट्री परिसर में स्वच्छ हाऊसकीपिंग की व्यवस्था सुनिश्चित न होने, वाटर ड्रेन में बड़ी मात्रा में अपशिष्ट भरा होने और दुर्गंध होने से जल्द ही दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए।
टीम के सदस्यों को उद्योग में रेंडरिंग प्लांट में प्रयुक्त अपशिष्ट व कच्चे माल के भंडारण के लिए शीतलीकृत कक्ष का संचालन सही ढंग से नहीं मिला। वहीं उद्योग में स्थापित रेंडरिंग प्लांट का नियमित रख-रखाव व प्लांट के संचालन के बाद भी बदबू आने की समस्या वातावरण में पाई गई। उद्योग में सहमति जल की शर्त संख्या-11 में जारी आदेश के अनुपालन में भूजल दोहन के लिए केंद्रीय भूगर्भ जल विभाग से एनओसी नहीं ली गई थी। कमेटी की मांग पर मिले सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन किया गया जिसकी फुटेज में वाहन संख्या व उतारे गए जानवर स्पष्ट नहीं दिख रहे थे। फैक्ट्री प्रबंधक ने बताया कि पशु परिवहन नियमावली के अनुसार ही वाहन ढुलाई की जा रही है। पशुओं के उतरने हेतुु रैंप मानक के अनुसार बना हुआ है।
टीम के सदस्यों ने कहा कि रेंडमली जांच के लिए कुछ प्रमाण-पत्र संबंधित पशु चिकित्साधिकारी को भेजे जाएंगे। जिससे उनके सत्यापन व जमा लेवी की पुष्टि की जा सके। टीम के अनुसार, निरीक्षण में पाया गया कि सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। पशुओं का वध हलाल विधि द्वारा किया जाता है। निरीक्षण के दौरान 465 पशुओं का वध किया जा चुका था।
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इमरजेंसी पशुवध रजिस्टर नहीं बना था। जिसे टीम ने बनाने के निर्देश दिए। टीम में डिप्टी कलेक्टर उदयभान सिंह, सीवीओ डा. डीएन मिश्रा, सहायक पर्यावरण अभियंता पंकज यादव, यात्री कर अधिकारी जितेंद्र दीक्षित समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।
विशेष जांच समिति ने किया निरीक्षण, फैक्ट्री परिसर, वाटर ड्रेन में मिली गंदगी
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टीम के सदस्यों को उद्योग में रेंडरिंग प्लांट में प्रयुक्त अपशिष्ट व कच्चे माल के भंडारण के लिए शीतलीकृत कक्ष का संचालन सही ढंग से नहीं मिला। वहीं उद्योग में स्थापित रेंडरिंग प्लांट का नियमित रख-रखाव व प्लांट के संचालन के बाद भी बदबू आने की समस्या वातावरण में पाई गई। उद्योग में सहमति जल की शर्त संख्या-11 में जारी आदेश के अनुपालन में भूजल दोहन के लिए केंद्रीय भूगर्भ जल विभाग से एनओसी नहीं ली गई थी। कमेटी की मांग पर मिले सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन किया गया जिसकी फुटेज में वाहन संख्या व उतारे गए जानवर स्पष्ट नहीं दिख रहे थे। फैक्ट्री प्रबंधक ने बताया कि पशु परिवहन नियमावली के अनुसार ही वाहन ढुलाई की जा रही है। पशुओं के उतरने हेतुु रैंप मानक के अनुसार बना हुआ है।
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टीम के सदस्यों ने कहा कि रेंडमली जांच के लिए कुछ प्रमाण-पत्र संबंधित पशु चिकित्साधिकारी को भेजे जाएंगे। जिससे उनके सत्यापन व जमा लेवी की पुष्टि की जा सके। टीम के अनुसार, निरीक्षण में पाया गया कि सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। पशुओं का वध हलाल विधि द्वारा किया जाता है। निरीक्षण के दौरान 465 पशुओं का वध किया जा चुका था।
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इमरजेंसी पशुवध रजिस्टर नहीं बना था। जिसे टीम ने बनाने के निर्देश दिए। टीम में डिप्टी कलेक्टर उदयभान सिंह, सीवीओ डा. डीएन मिश्रा, सहायक पर्यावरण अभियंता पंकज यादव, यात्री कर अधिकारी जितेंद्र दीक्षित समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।
विशेष जांच समिति ने किया निरीक्षण, फैक्ट्री परिसर, वाटर ड्रेन में मिली गंदगी