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इटावा के परौली रमायन गोशाला में फिर मरे 12 गोवंश, तीन दिन पहले भी 20 गोवंश की हुई थी मौत
Mon, 03 Jun 2019 08:18 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, इटावा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 03 Jun 2019 08:18 PM IST
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गोशाला में धूप में गोवंश
- फोटो : अमर उजाला
इटावा के परौली रमायन गांव की गोशाला में फिर 12 गोवंशों की मौत हो गई है। प्रशासन ने छह मृत गोवंशों को मिट्टी में दबवा दिया और कुछ पीछे की ओर फिंकवा दिए हैं। शवों को कुत्ते नोचकर खा रहे हैं। तीन दिन पहले भी इस गोशाला में करीब 20 गोवंश मर गए थे।
करीब 116 बीघे में बनी परौली रामायन गोशाला गोवंश के लिए कब्रगाह साबित हो रही है। इस गोशाला में लगभग 1200 गोवंश बंद किए गए थे। शुरू से ही इस गोशाला में गोवंशों की मौत हो रही है। बीडीओ बसरेहर खुद 129 गोवंशों की बीमारियों से मौत होने की बात स्वीकार कर चुके हैं जबकि ग्रामीण करीब 600 गायों के मरने का दावा कर रहे हैं। तीन दिन पहले यहां 20 गोवंश मरे थे, तब भी प्रशासन ने महज छह के मरने की बात कबूल की थी।
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करीब 116 बीघे में बनी परौली रामायन गोशाला गोवंश के लिए कब्रगाह साबित हो रही है। इस गोशाला में लगभग 1200 गोवंश बंद किए गए थे। शुरू से ही इस गोशाला में गोवंशों की मौत हो रही है। बीडीओ बसरेहर खुद 129 गोवंशों की बीमारियों से मौत होने की बात स्वीकार कर चुके हैं जबकि ग्रामीण करीब 600 गायों के मरने का दावा कर रहे हैं। तीन दिन पहले यहां 20 गोवंश मरे थे, तब भी प्रशासन ने महज छह के मरने की बात कबूल की थी।
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गो संरक्षण केंद्र
- फोटो : अमर उजाला
रविवार की रात 12 और गोवंश की मौत हो गई। सुबह करीब 11 बजे तीन गोवंशों के शव गोशाला में खोदे गए गड्ढे के आसपास पड़े थे। एक शव भूसा गोदाम के पास और पांच गोशाला के पीछे पड़े थे। ग्रामीणों ने बताया कि सुबह कुछ शव गोशाला में काम करने वाले मजदूरों ने खुदे पड़े गड्ढे में दब दिए थे।
पीछे पड़े शव भी मजदूरों ने पिकअप में भरवाकर फेंकवाए हैं। खुले में पड़े गोवंशों के शव कुत्ते और कौवे नोच कर खा रहे थे। चारों तरह दुर्गंध फैली थी। इस कारण अन्य मवेशियों और ग्रामीणों में बीमारियां फैलने की आशंका भी है। पशु चिकित्सक मंजू दोहरे का कहना था कि गोशाला में एक भी गोवंश नहीं मरा है। गोवंश के मरने की सूचना झूठी है।
एसडीएम सदर सिद्धार्थ ने बताया हमें दो गोवंशों के मरने की सूचना मिली है। वे पहले से बीमार चल रहे थे और बीमारी के कारण ही उनकी मौत हुई है। गोशाला में चारा, पानी और भूसा और छाया का पर्याप्त इंतजाम है। एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट की ड्यूटी भी लगा दी गई है। मवेशियों की नियमित जांच की जा रही है।
पीछे पड़े शव भी मजदूरों ने पिकअप में भरवाकर फेंकवाए हैं। खुले में पड़े गोवंशों के शव कुत्ते और कौवे नोच कर खा रहे थे। चारों तरह दुर्गंध फैली थी। इस कारण अन्य मवेशियों और ग्रामीणों में बीमारियां फैलने की आशंका भी है। पशु चिकित्सक मंजू दोहरे का कहना था कि गोशाला में एक भी गोवंश नहीं मरा है। गोवंश के मरने की सूचना झूठी है।
एसडीएम सदर सिद्धार्थ ने बताया हमें दो गोवंशों के मरने की सूचना मिली है। वे पहले से बीमार चल रहे थे और बीमारी के कारण ही उनकी मौत हुई है। गोशाला में चारा, पानी और भूसा और छाया का पर्याप्त इंतजाम है। एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट की ड्यूटी भी लगा दी गई है। मवेशियों की नियमित जांच की जा रही है।