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घंटे भर की बारिश में मकानों और दुकानों में घुसा पानी
Updated Fri, 07 Sep 2018 01:49 AM IST
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घाटमपुर (कानपुर)। गुरुवार को दोपहर बाद मात्र एक घंटे हुई झमाझम बरिश में घाटमपुर पानी-पानी हो गया। कसबे के मुख्य मार्गों के साथ ही गलियों में नाले की शक्ल में पानी बहता दिखाई दिया। पानी लोगों के घरों और दुकानों तक घुस जाने से दिक्कत हुई। कसबे के निवासियों ने बताया कि जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से थोड़ी सी बारिश में ही समस्या पैदा हो जाती है। कई जगहों पर दुकानदारों को पानी निकालने के लिए पंपसेट लगवाने पड़े।
दोपहर बाद करीब 3 बजे आसमान पर काले घने बादल छाने के बाद तेज बारिश हो गई। देखते ही देखते कसबे की गालियां और सड़कें पानी से लबालब नजर आने लगीं। नगर पालिका रोड, चौरसिया गली, पुराना अस्पताल रोड, डाकखाना रोड, टाकीज रोड, रेलवे स्टेशन रोड के साथ ही कानपुर-सागर राजमार्ग पर पानी उफान मारकर लोगों के घरों और दुकानों के भीतर तक घुस गया। तहसील, कोतवाली, सीएचसी परिसर और जूनियर हाईस्कूल के मैदान में भी घुटनों तक पानी भरा दिखाई दिया।
दुकानदारों ने बताया कि कसबे में बने नाले-नालियां संकरे और पुराने हैं। जबकि, मुख्य मार्गों के चौड़ीकरण और उनके ऊंचे बन जाने के चलते कसबे की बस्ती का पानी बाहर निकल ही नहीं पाता है। इधर, बस्ती के भीतर स्थित अस्सी फीसदी तालाबों का कहीं नामोनिशान नहीं है। वहीं, पालिका प्रशासन की ओर हर वर्ष जून-जुलाई के महीनों में नाला सफाई के नाम पर लाखों रुपये व्यय तो किए जाते हैं। लेकिन, सफाई के नाम पर सिर्फ जहां-तहां कूड़ा-कचरा निकालकर इतिश्री कर दी जाती है। जिससे पहली बारिश में ही नाले-नाले फिर चोक हो जाते हैं।
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दोपहर बाद करीब 3 बजे आसमान पर काले घने बादल छाने के बाद तेज बारिश हो गई। देखते ही देखते कसबे की गालियां और सड़कें पानी से लबालब नजर आने लगीं। नगर पालिका रोड, चौरसिया गली, पुराना अस्पताल रोड, डाकखाना रोड, टाकीज रोड, रेलवे स्टेशन रोड के साथ ही कानपुर-सागर राजमार्ग पर पानी उफान मारकर लोगों के घरों और दुकानों के भीतर तक घुस गया। तहसील, कोतवाली, सीएचसी परिसर और जूनियर हाईस्कूल के मैदान में भी घुटनों तक पानी भरा दिखाई दिया।
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दुकानदारों ने बताया कि कसबे में बने नाले-नालियां संकरे और पुराने हैं। जबकि, मुख्य मार्गों के चौड़ीकरण और उनके ऊंचे बन जाने के चलते कसबे की बस्ती का पानी बाहर निकल ही नहीं पाता है। इधर, बस्ती के भीतर स्थित अस्सी फीसदी तालाबों का कहीं नामोनिशान नहीं है। वहीं, पालिका प्रशासन की ओर हर वर्ष जून-जुलाई के महीनों में नाला सफाई के नाम पर लाखों रुपये व्यय तो किए जाते हैं। लेकिन, सफाई के नाम पर सिर्फ जहां-तहां कूड़ा-कचरा निकालकर इतिश्री कर दी जाती है। जिससे पहली बारिश में ही नाले-नाले फिर चोक हो जाते हैं।
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