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इटावा के लिए : कार्निया का आपरेशन-BANDA
Updated Fri, 06 Jul 2018 12:08 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
इटावा। शहर में पहली बार कॉर्निया प्रत्यारोपण के बाद युवक की रोशनी वापस लाई गई है। युवक दस साल से आंखों में सफेदी अर्थात माड़ा रोग से पीड़ित था। माड़ा का इलाज कॉर्निया प्रत्यारोपण से ही संभव है।
शहर के सिविल लाइंस स्थित डॉ. शिवनाथ मेमोरियल आई सेंटर में डॉ. श्रीनाथ मेहरोत्रा, डॉ. शोभित मेहरोत्रा व डॉ. सोनल शाह मेहरोत्रा ने जिले में पहली बार कॉर्निया ट्रांसप्लांट करने में सफलता पाई है। डॉ. श्रीनाथ ने बताया कि अभी तक काली पुतली के प्रत्यारोपण के लिए रोगियों को बड़े शहरों में जाना पड़ता था और एम्स जैसे अस्पतालों में कई दिन इंतजार करना पड़ता था।
मोतियाबिंद के बाद माड़ा आंखों में होने वाली सबसे अधिक बीमारी है। इस रोग से पीड़ित की रोशनी मरणोपरांत नेत्रदान से प्राप्त की गई आंख की काली पुतली अर्थात कॉर्निया के प्रत्यारोपण से ही वापस आ सकती है। गत 24 जून रविवार को हमारे यहां 24 वर्षीय युवक का कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया गया जो कि अब साफ देख सकता है।
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डॉ. शोभित ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा मानव कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए ह्यूमन आर्गन ट्रांसप्लांट एक्ट (मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम) बनाया गया है। इसके तहत अस्पतालों में राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्रदान की जाती है। लगभग दो वर्षों के प्रयास के बाद ढाई माह पहले हमें कॉर्निया ट्रांसप्लांट की मान्यता मिल गई है।
डॉक्टर्स ने बताया कि हम कॉर्निया ट्रांसप्लांट का अपने लिए कोई चार्ज नहीं ले रहे हैं। केवल नेत्र बैंक से कॉर्निया और ऑपरेशन में लगने वाली चीजों का खर्च आता है। लगभग 16-17 हजार में कॉर्निया ट्रांसप्लांट हो जाता है, जबकि कानपुर या किसी बड़े शहर में यह खर्च 80 हजार रुपये से डेढ़ लाख तक आता है। उन्होंने बताया कि हमारा सेंटर 25 अगस्त से 8 सितंबर तक नेत्रदान पखवाड़ा मना रहा है।
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इटावा। शहर में पहली बार कॉर्निया प्रत्यारोपण के बाद युवक की रोशनी वापस लाई गई है। युवक दस साल से आंखों में सफेदी अर्थात माड़ा रोग से पीड़ित था। माड़ा का इलाज कॉर्निया प्रत्यारोपण से ही संभव है।
शहर के सिविल लाइंस स्थित डॉ. शिवनाथ मेमोरियल आई सेंटर में डॉ. श्रीनाथ मेहरोत्रा, डॉ. शोभित मेहरोत्रा व डॉ. सोनल शाह मेहरोत्रा ने जिले में पहली बार कॉर्निया ट्रांसप्लांट करने में सफलता पाई है। डॉ. श्रीनाथ ने बताया कि अभी तक काली पुतली के प्रत्यारोपण के लिए रोगियों को बड़े शहरों में जाना पड़ता था और एम्स जैसे अस्पतालों में कई दिन इंतजार करना पड़ता था।
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मोतियाबिंद के बाद माड़ा आंखों में होने वाली सबसे अधिक बीमारी है। इस रोग से पीड़ित की रोशनी मरणोपरांत नेत्रदान से प्राप्त की गई आंख की काली पुतली अर्थात कॉर्निया के प्रत्यारोपण से ही वापस आ सकती है। गत 24 जून रविवार को हमारे यहां 24 वर्षीय युवक का कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया गया जो कि अब साफ देख सकता है।
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डॉ. शोभित ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा मानव कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए ह्यूमन आर्गन ट्रांसप्लांट एक्ट (मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम) बनाया गया है। इसके तहत अस्पतालों में राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्रदान की जाती है। लगभग दो वर्षों के प्रयास के बाद ढाई माह पहले हमें कॉर्निया ट्रांसप्लांट की मान्यता मिल गई है।
डॉक्टर्स ने बताया कि हम कॉर्निया ट्रांसप्लांट का अपने लिए कोई चार्ज नहीं ले रहे हैं। केवल नेत्र बैंक से कॉर्निया और ऑपरेशन में लगने वाली चीजों का खर्च आता है। लगभग 16-17 हजार में कॉर्निया ट्रांसप्लांट हो जाता है, जबकि कानपुर या किसी बड़े शहर में यह खर्च 80 हजार रुपये से डेढ़ लाख तक आता है। उन्होंने बताया कि हमारा सेंटर 25 अगस्त से 8 सितंबर तक नेत्रदान पखवाड़ा मना रहा है।