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कहां खपाए 90 लाख, नहीं बता पाया कोई
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गोशाला का निरीक्षण करते निदेशक।
- फोटो : KANNAUJ
तिर्वा(कन्नौज)। गोशालाओं की हकीकत जानने आए पशुपालन विभाग के निदेशक (प्रशासन एवं विकास) को जिले में करीब 90 लाख रुपये के उपभोग का प्रमाण पत्र नहीं मिला। बजट खपाने की बाबत कोई जानकारी नहीं दे सका। डिप्टी सीवीओ के उपभोग प्रमाण पत्र मिलना बाकी होने की जानकारी पर निदेशक नाराज हो उठे। उन्होंने अस्थायी गोशाला की हकीकत परखी। कहा कि गोबर और गोमूत्र से जीवामृत तैयार कर खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने का काम करें।
निदेशक डॉ. एसके मलिक ने अस्थायी गोशाला पहुंच कर गोवंशों की भरण पोषण की धनराशि और अन्य व्यवस्था के बारे में खंड विकास अधिकारी से जानकारी ली। लंबित यूसी( उपभोग प्रमाण पत्र) के बारे में पूछा। उपमुख्य जिला पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर संजय शाल्या ने बताया कि खंड विकास अधिकारियों को वितरित धनराशि के मुताबिक 9038783 रुपये का उपभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होना बाकी है। इस पर निदेशक ने कड़ी नाराजगी जताई।
गोवंशों के भरण पोषण के लिए दो माह तक भूसा संरक्षण करने के निर्देश दिए। गोआश्रय स्थलों को स्वावलंबी बनाने के लिए गोबर और गोमूत्र से जीवामृत बनाने पर जोर दिया। बताया कि इसके लगातार प्रयोग से ऊसर भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है। आश्रय स्थलों के गोबर से गोबर ब्लॉक, प्लास्टिक की थैलियों के स्थान पर गोबर के गमलों का उत्पादन भी हो सकता है।
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निदेशक डॉ. एसके मलिक ने अस्थायी गोशाला पहुंच कर गोवंशों की भरण पोषण की धनराशि और अन्य व्यवस्था के बारे में खंड विकास अधिकारी से जानकारी ली। लंबित यूसी( उपभोग प्रमाण पत्र) के बारे में पूछा। उपमुख्य जिला पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर संजय शाल्या ने बताया कि खंड विकास अधिकारियों को वितरित धनराशि के मुताबिक 9038783 रुपये का उपभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होना बाकी है। इस पर निदेशक ने कड़ी नाराजगी जताई।
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गोवंशों के भरण पोषण के लिए दो माह तक भूसा संरक्षण करने के निर्देश दिए। गोआश्रय स्थलों को स्वावलंबी बनाने के लिए गोबर और गोमूत्र से जीवामृत बनाने पर जोर दिया। बताया कि इसके लगातार प्रयोग से ऊसर भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है। आश्रय स्थलों के गोबर से गोबर ब्लॉक, प्लास्टिक की थैलियों के स्थान पर गोबर के गमलों का उत्पादन भी हो सकता है।
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