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बर्बाद किसान दो जून की रोटी को परेशान
अमर उजाला कन्नाैैज
Updated Tue, 07 Apr 2015 12:14 AM IST
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वीवीआईपी जिले पर भले ही सीएम से लेकर नौकरशाहों की सीधी नजरें हों, इसके बावजूद जिले में किसानों की सुनने वाला कोई नहीं है। फसल बीमा के नाम पर प्रीमियम हजम करने वाली बीमा कंपनी इसी का फायदा उठा रही हैं। छह महीने पहले सूखे से नष्ट हुई खरीफ की फसलों का बीमा अभी तक नहीं मिला है।
बारिश और ओलावृष्टि से तबाह रबी फसलों का तो कंपनी व प्रशासन ने सर्वे तक नहीं किया है। किसान को बीमा राशि कब तक मिलेगी, कितनी मिलेगी, यह किसी को भी नहीं पता। ऐसे में फसल बर्बाद होने से तबाह किसान परिवार के भरण पोषण के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ भी नहीं कर पा रहा है।
जिले में खरीफ की फसल भी सूखे की चपेट में आकर खराब हो गई थी। खरीफ के सीजन में जिले के 8977 किसान फसल दुर्घटना बीमा योजना से आच्छादित थे। इनमें से 3557 किसानों को बीमा कंपनी की तरफ से क्षतिपूर्ति के लिए पात्र मानकर चयनित किया गया है। कई महीने बीत जाने के बाद भी बीमा कंपनी की तरफ से किसानों को क्षतिपूर्ति की रकम उपलब्ध नहीं कराई गई है। डीएम, उप निदेशक कृषि समेत अन्य उच्चाधिकारियों को भेजी रिपोर्ट में भी माना गया है कि किसानों को 1 करोड़ 59 लाख रुपये की धनराशि क्षतिपूर्ति के तौर पर दी जानी है।
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इस संबंध मे बीमा योजना के तहत जिले के उप निदेशक कृषि डा. राजेश से जानकारी करने के लिए उनके दफ्तर जाकर मिलने का प्रयास किया गया तो वे नहीं मिले। बताया गया कि वह कलेक्ट्रेट में आयोजित समीक्षा बैठक में गए हैं। रबी की फसल में हुए नुकसान का कितना सर्वे हो चुका है,
किन-किन गांवों की क्राप कटिंग या सर्वे बाकी है, इसका जवाब कोई देने वाला नहीं है। इस संबंध में विकास भवन स्थित जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में संपर्क किया गया तो वे भी नहीं मिले। बाबू ने बताया कि फसल दुर्घटना बीमा योजना की जानकारी या तो उप निदेशक कृषि के दफ्तर में है या फिर कलेक्ट्रेट के राजस्व विभाग के कार्यालयों में।
डीएम बोले, 10 से बंटेगी क्षतिपूर्ति
जिलाधिकारी अनुज कुमार झा का कहना है कि खरीफ के सीजन में किसानों को हुए नुकसान के रूप में चयनित किसानों को क्षतिपूर्ति जल्द दिलाने के निर्देश मातहत अफसरों को दिए हैं। 10 अप्रैल से खरीफ सीजन में चयनित किसानों को क्षतिपूर्ति की धनराशि का वितरण शुुरू करा दिया जाएगा। केसीसी कार्डधारक किसानों के बैंक खाते में सीधे रुपया पहुंचेगा।
पब्लिक कॉल में बताईं समस्याएं
अमर उजाला के पब्लिक काल में सोमवार को 20 से ज्यादा किसानों ने तरह-तरह की समस्या बताई। दरअसल यह समस्या सिर्फ जिले के 20 लोगों की ही नहीं है। फसल का बीमा कराने के बाद कैसे मुआवजा मिलेगा, सर्वे कब होगा। इन सवालों का जवाब देने के लिए बीमा कंपनी की ओर से कोई व्यवस्था ही नहीं की गई है।
अफसर भी उदासीन रवैया अपनाए हैं। किसान कभी एसडीएम के पास जाकर दुखड़ा सुनाते हैं तो कभी बैंक शाखाओं में जाकर अफसरों के आगे गिड़गिड़ाते हैं। ज्यादातर बार टका सा जवाब मिलता है कि ...बीमा कंपनी वालों से जाकर पूछो।
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जिले में बीमा कंपनी का नहीं है कोई कार्यालय
जिले में फसल बीमा के रूप में लाखों रुपये प्रीमियम वसूलने वाली एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी का कोई दफ्तर तक नहीं है। न ही कंपनी का कोई अधिकारी यहां किसानों को नजर आता है। उनकी मर्जी हुई तो आला अफसरों की मीटिंग में कभी-कभार दर्शन दे दिए, वरना कोई पूछने वाला भी नहीं है।
किसानों की समस्या पर जब एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर रूरल एंड एग्रीकल्चर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कन्नौज में कोई कार्यालय नहीं है लेकिन वह अफसरों की बैठकों में आते हैं। किसानों की समस्याएं सुनी जाती हैं। सर्वे के दौरान भी उनके प्रतिनिधि तैनात रहते हैं। फसल बीमा योजना के बारे में किसानों को जानकारी दी जाती है।
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बारिश और ओलावृष्टि से तबाह रबी फसलों का तो कंपनी व प्रशासन ने सर्वे तक नहीं किया है। किसान को बीमा राशि कब तक मिलेगी, कितनी मिलेगी, यह किसी को भी नहीं पता। ऐसे में फसल बर्बाद होने से तबाह किसान परिवार के भरण पोषण के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ भी नहीं कर पा रहा है।
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जिले में खरीफ की फसल भी सूखे की चपेट में आकर खराब हो गई थी। खरीफ के सीजन में जिले के 8977 किसान फसल दुर्घटना बीमा योजना से आच्छादित थे। इनमें से 3557 किसानों को बीमा कंपनी की तरफ से क्षतिपूर्ति के लिए पात्र मानकर चयनित किया गया है। कई महीने बीत जाने के बाद भी बीमा कंपनी की तरफ से किसानों को क्षतिपूर्ति की रकम उपलब्ध नहीं कराई गई है। डीएम, उप निदेशक कृषि समेत अन्य उच्चाधिकारियों को भेजी रिपोर्ट में भी माना गया है कि किसानों को 1 करोड़ 59 लाख रुपये की धनराशि क्षतिपूर्ति के तौर पर दी जानी है।
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इस संबंध मे बीमा योजना के तहत जिले के उप निदेशक कृषि डा. राजेश से जानकारी करने के लिए उनके दफ्तर जाकर मिलने का प्रयास किया गया तो वे नहीं मिले। बताया गया कि वह कलेक्ट्रेट में आयोजित समीक्षा बैठक में गए हैं। रबी की फसल में हुए नुकसान का कितना सर्वे हो चुका है,
किन-किन गांवों की क्राप कटिंग या सर्वे बाकी है, इसका जवाब कोई देने वाला नहीं है। इस संबंध में विकास भवन स्थित जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में संपर्क किया गया तो वे भी नहीं मिले। बाबू ने बताया कि फसल दुर्घटना बीमा योजना की जानकारी या तो उप निदेशक कृषि के दफ्तर में है या फिर कलेक्ट्रेट के राजस्व विभाग के कार्यालयों में।
डीएम बोले, 10 से बंटेगी क्षतिपूर्ति
जिलाधिकारी अनुज कुमार झा का कहना है कि खरीफ के सीजन में किसानों को हुए नुकसान के रूप में चयनित किसानों को क्षतिपूर्ति जल्द दिलाने के निर्देश मातहत अफसरों को दिए हैं। 10 अप्रैल से खरीफ सीजन में चयनित किसानों को क्षतिपूर्ति की धनराशि का वितरण शुुरू करा दिया जाएगा। केसीसी कार्डधारक किसानों के बैंक खाते में सीधे रुपया पहुंचेगा।
पब्लिक कॉल में बताईं समस्याएं
अमर उजाला के पब्लिक काल में सोमवार को 20 से ज्यादा किसानों ने तरह-तरह की समस्या बताई। दरअसल यह समस्या सिर्फ जिले के 20 लोगों की ही नहीं है। फसल का बीमा कराने के बाद कैसे मुआवजा मिलेगा, सर्वे कब होगा। इन सवालों का जवाब देने के लिए बीमा कंपनी की ओर से कोई व्यवस्था ही नहीं की गई है।
अफसर भी उदासीन रवैया अपनाए हैं। किसान कभी एसडीएम के पास जाकर दुखड़ा सुनाते हैं तो कभी बैंक शाखाओं में जाकर अफसरों के आगे गिड़गिड़ाते हैं। ज्यादातर बार टका सा जवाब मिलता है कि ...बीमा कंपनी वालों से जाकर पूछो।
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जिले में बीमा कंपनी का नहीं है कोई कार्यालय
जिले में फसल बीमा के रूप में लाखों रुपये प्रीमियम वसूलने वाली एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी का कोई दफ्तर तक नहीं है। न ही कंपनी का कोई अधिकारी यहां किसानों को नजर आता है। उनकी मर्जी हुई तो आला अफसरों की मीटिंग में कभी-कभार दर्शन दे दिए, वरना कोई पूछने वाला भी नहीं है।
किसानों की समस्या पर जब एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर रूरल एंड एग्रीकल्चर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कन्नौज में कोई कार्यालय नहीं है लेकिन वह अफसरों की बैठकों में आते हैं। किसानों की समस्याएं सुनी जाती हैं। सर्वे के दौरान भी उनके प्रतिनिधि तैनात रहते हैं। फसल बीमा योजना के बारे में किसानों को जानकारी दी जाती है।