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बारिश की मार से सब्जी किसान परेशान

Wed, 12 Oct 2016 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज Updated Wed, 12 Oct 2016 11:35 PM IST
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Vegetable farmers hit by rains
पीली धनिया - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

बारिश ने क्षेत्र के सब्जी किसानाें को झटका दिया है। धान, लौकी, गोभी और पत्ता गोभी में गला और झुलसा रोग लगने के बाद धनिया और सोया की सब्जी में भी बीमारी लग गई है। बेमौसम बारिश ने धनिया की 50 प्रतिशत फसल को नुकसान पहुंचाया है। धनिया की फसल बचाने के लिए किसान परेशान हैं।

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क्षेत्र के नसरापुर गांव के किसान जयसिंह बताते हैं कि उन्होंने अपने एक खेत में गोभी और दूसरे में धनिया और सोया की सब्जी बोई थी। गत सप्ताह बारिश से गोभी में गला और झुलसा रोग लग जाने से 30 प्रतिशत फसल खराब हुई थी। उसके बाद अचानक दो-तीन दिन के अंदर उनकी धनिया की पौध भी पीली पड़ने लगी। इसी गांव के किसान रामकृपाल ने बताया कि उन्होंने अपने एक खेत में पत्ता गोभी और दूसरे में धनिया और सोया की फसल बोई थी, पिछले सप्ताह की बरसात ने एक ओर पत्ता गोभी की फसल को नुकसान पहुंचाया तो सोया और धनिया की फसल के पत्ते भी पीले पड़ने के कारण बाजार में उन्हें कोई नहीं ले रहा है।
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कृषि अधिकारी नीरज राज की मानें तो बरसात के दूसरे ही दिन तेज धूप में पानी के वाष्पीकृत होने के की वजह से धनिया और सोया की नई पौध को नुकसान पहुंचा है। वाष्पीकृत एक बड़ा कारण हो सकता है लेकिन बरसात के बाद अक्सर खेतों में अन्य कई कीट और तैयार हो जाते हैं जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।
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चैंपा - कीट
यह धनिया पर आक्रमण करने वाला पहला कीट है। यह पौधे के कोमल अंगों का रस चूसता है जिससे पौधे सूखकर पीले पड़ जाते हैं। नीरज राज ने बताया कि इसके नियंत्रण के लिए किसानाें को नीम का तेल को गोमूत्र को साथ मिलाकर पम्प द्वारा छिड़काव करें।

उकठा-कीट
यह धनिया का सबसे भयंकर रोग है। इस रोग के कारण पौधे मुरझा जाते हैं जिससे पौधों के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कृषि अधिकारी नीरज राज ने बताया कि किसानों को इसकी रोकथाम के लिए शुरू में ही गहरी जुताई करवाएं और मानक के अनुसार उचित फसल चक्र अपनाएं और साथ ही बीजोपचार करके बीज बोएं।


पाला पड़ने की आशंका पर क्या करें
कृषि अधिकारी नीरज राज ने बताया कि धनिया की फसल पर पाले से भी भारी हानि हो सकती है। पाला पड़ने की आशंका नजर आते ही एक हल्की सिंचाई कर दें और रात के समय खेत में चारों और धुआं करके भी फसल को पाले से बचाया जा सकता है। गोबर के उपलों की राख का छिड़काव करने से पाला का असर कम हो जाता है।

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