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वाह री लापरवाही: 67 साल बाद भी जमीन पर कब्जा नहीं ले सका वन विभाग

Tue, 03 Dec 2019 11:42 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 03 Dec 2019 11:42 PM IST
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vaah ree laaparavaahee: 67 saal baad bhee jameen par kabja nahin le saka van vibhaag
तिर्वा(कन्नौज)। अपनी संपत्ति को लेकर वन विभाग कितना संजीदा है, इसकी बानगी जमीन के एक मामले में देखने को मिली है। वन विभाग के अफसरों को 67 साल बाद तिर्वा क्षेत्र के 26 गांवों में मौजूद अपनी 6026.45 एकड़ जमीन पर कब्जा लेने का होश आया है। करोड़ों की इस जमीन का आवंटन 1952 में वन विभाग को किया गया था। अफसरों की लापरवाही के कारण विभाग का इस जमीन पर कब्जा नहीं हो सका। वन विभाग अब तहसील अफसरों से इस जमीन पर कब्जा लेने के लिए मदद मांग रहा है।
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वन विभाग को तिर्वा तहसील क्षेत्र के अलीपुर अहना, बलनपुर, सुर्सी, तिजलापुर, गूरा, हिसामुद्दीनपुर, शाहनगर, सिगरी, उमरन, औसेर, हरेईपुर, खानपुर, सरसई, सिमरिया, अज्यौरा, बहोसी, फकरपुर बरेवा, गुरौली, जनखत, खैरनगर, कुढ़िना, मवई बिलवारी, सिंहपुर, उमर्दा समेत 26 गांवों में हरियाली उगाने के लिए जमीन दी गई थी। इन गांवों में विभाग को 6026.45 एकड़ जमीन आवंटित की गई। विभाग ने न तो इस जमीन पर कभी कब्जा लिया और न ही हरियाली उगा सका। इन जमीनों पर गांव के लोगों ने कब्जा जमा लिया। यह फसल करने लगे। हद तो यह है कि यह जमीन गांव के किस स्थान पर है, इसकी भी जानकारी वन विभाग को नहीं है। अपनी जमीन का चिह्नांकन कराने और कब्जा लेने के लिए अफसर अब हाथ पांव मार रहे हैं। वन विभाग ने तहसील प्रशासन से मुलाकात कर इस जमीन को सरकारी रिकार्डों में दर्ज कराने की मांग की है।
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वन विभाग के डीएफओ जवाहरलाल गुप्ता ने बताया कि 1952 में तिर्वा तहसील क्षेत्र के गांवों में 6026.45 एकड़ जमीन विभाग के नाम की गई थी। अभी तक तहसील क्षेत्र के सभी गांवों में 2336.08 एकड़ भूमि वन विभाग के नाम रिकार्ड में मिली है। शेष 3693.37 एकड़ भूमि का रिकार्ड 67 साल बाद भी वन विभाग के पास नहीं है। जमीन को वन विभाग के नाम दर्ज कराने के लिए तहसील प्रशासन को अवगत कराया गया है। तहसील प्रशासन को वन विभाग को पूरी 6026.45 एकड़ जमीन पर कब्जा दिलाने और जिन जमीनों के कागजात नहीं हैं, उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
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एसडीएम जयकरन ने बताया कि वन विभाग ने जो सूची उपलब्ध कराई है, उसकी जांच कराई जाएगी। पुराने रिकार्डों में देखा जाएगा कि वन विभाग के नाम कितनी भूमि दर्ज है। अगर दर्ज नहीं है तो भूमि को चिह्नित कराकर वन विभाग के नाम दर्ज कराई जाएगी।
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