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मेडिकल कालेज में अल्ट्रासाउंड बंद
अमर उजाला ब्यूरो/कन्नौज
Updated Wed, 06 Sep 2017 12:17 AM IST
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बंद पड़ा अल्ट्रासाउंड कक्ष।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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राजकीय मेडिकल कालेज में अल्ट्रासाउंड कराने की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों व तीमारदारों को अब मायूस होना पड़ेगा। रेडियोलॉजी विभाग में तैनात महज एक चिकित्सक ने भी मेडिकल कालेज प्रशासन की सख्ती के चलते नौकरी छोड़ दी है। इस वजह से अल्ट्रासाउंड कक्ष बंद हो गया है। इससे संबंधित पूछताछ कक्ष में भी कर्मचारियों की ड्यूटी नहीं लग रही है।
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राजकीय मेडिकल कालेज के रेडियोलाजी विभाग में रेडियोलाजी चिकित्सक के छह पद सृजित हैं। मार्च में जब एमसीआई टीम ने निरीक्षण किया था तो चार पदों पर रेडियोलाजी चिकित्सकों की तैनाती थी। दो पद रिक्त थे। मई तक चारों चिकित्सक सप्ताह में छह दिन अल्ट्रासाउंड कर रहे थे। जिससे मरीजोें व तीमारदारों को काफी राहत मिल रही थी। मई के दौरान प्रदेश शासन से अल्ट्रासाउंड करने के लिए सिर्फ रेडियोलाजी में डिग्रीधारी चिकित्सकों को ही तैनाती देने के फरमान के बाद मेडिकल कालेज प्रशासन ने रेडियोलाजी में डिप्लोमाधारी तीन डाक्टरों की सेवाएं समाप्त कर दी। इस तरह से रेडियोलाजी विभाग में सिर्फ एक ही चिकित्सक डा. रामेंद्र नारायण त्रिपाठी रह गए। वह सप्ताह में सिर्फ सोमवार व शुक्रवार को ही अल्ट्रासाउंड कर रहे थे।
जुलाई व अगस्त से यह सिलसिला जारी था। मेडिकल कालेज के प्राचार्य ने अगस्त के दौरान डा. रामेंद्र नारायण त्रिपाठी को महज नौ दिन का वेतन दिया। इस वजह से उन्होंने नाराज होकर नौकरी छोड़ दी। दो सितंबर के बाद से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। अल्ट्रासाउंड की उम्मीद लेकर आने वाले मरीज व तीमारदार मायूस होकर वापस लौट रहे हैं।
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रेडियोलॉजी चिकित्सक को अगस्त में मिला सिर्फ नौ दिन का वेतन
मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. डीएस मारतोलिया ने बताया कि डा. रामेंद्र नारायण त्रिपाठी की तैनाती संविदा पर थी। उन्हें सप्ताह में छह दिन काम करने को कहा गया था। इसके बावजूद भी वह सिर्फ सोमवार व शुक्रवार को आ रहे थे। इस वजह से अगस्त में उन्होंने सिर्फ नौ दिन काम किया। शेष दिन वह अनुपस्थित रहे। इसी वजह से उनको नौ दिन का वेतन दिया गया। पूरे प्रदेश में रेडियोलॉजी डिग्रीधारी चिकित्सकों की कमी है। प्राइवेट मेडिकल कालेज रेडियोलाजी चिकित्सकों को करीब डेढ़ लाख रुपये प्रतिमाह का वेतन देते हैं। इसके विपरीत मेडिकल कालेज में संविदा पर तैनाती के दौरान उन्हें महज 70 हजार रुपये प्रतिमाह का वेतन दिया जाता है। जिस वजह से रेडियोलाजी चिकित्सक मेडिकल कालेज को खोजे नहीं मिल रहे हैं।
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