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Kannauj News: 11 करोड़ खर्च के बाद भी बीमार पड़ीं दो सीएचसी
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कन्नौज। लाखों की उम्मीदें, करीब 11 करोड़ रुपये का बजट और डिप्टी सीएम का वर्चुअल लोकार्पण... फिर भी के उमर्दा और समधन के 80 हजार ग्रामीणों के नसीब में मुकम्मल इलाज नहीं आ सका। कागजों पर बनीं दो आधुनिक सीएचसी भ्रष्टाचार की जांच और सरकारी लालफीताशाही के बीच खुद ही वेंटिलेटर पर पड़ी हैं। राज्य स्तर से बिठाई गई एसआईटी की जांच दो वर्षों से खत्म होने का नाम नहीं ले रही। नतीजा यह कि भवन स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं हो पाए और दोनों अस्पतालों में दोपहर बाद सन्नाटा पसर जाता है।
समधन नगर पंचायत और आसपास के 13 गांवों की 63 हजार आबादी के लिए 597.10 लाख रुपये की लागत से सीएचसी तैयार हुई। वहीं, उमर्दा के सात गांवों की 17 हजार आबादी के लिए 501.11 लाख रुपये पानी की तरह बहा दिए गए। 27 नवंबर 2023 को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एवं डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बड़े-बड़े दावों के साथ इनका वर्चुअल लोकार्पण किया।
प्रशासन ने ओपीडी शुरू करा दी, लेकिन हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इसी बीच निर्माण कार्य की गुणवत्ता और लागत राशि बढ़ने के खेल पर वर्ष 2024 में राज्य स्तर से एसआईटी जांच शुरू हो गई। दो साल बीत जाने के बाद भी जांच की रिपोर्ट ठंडे बस्ते में है और हैंडओवर अटका हुआ है।
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इनसेट--
रात होते ही झोलाछापों का सहारा
ओपीडी का समय खत्म होते ही दोपहर में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी रफूचक्कर हो जाते हैं। रात के समय ये सीएचसी वीरान पड़ जाती हैं। उल्टी-दस्त और आधी रात को अचानक किसी की तबीयत बिगड़े, तो प्राथमिक इलाज तक नसीब नहीं होता है। मरीजों को मजबूरन झोलाछाप के पास जेब ढीली करनी पड़ती है या फिर जिला अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज के चक्कर काटने पड़ते हैं।
वर्जन
उमर्दा और समधन सीएचसी की जांच राज्य स्तर पर गठित एसआईटी कर रही है। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही दोनों सीएचसी स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर की जा सकेंगी। इसके बाद ही यहां पूर्णकालिक और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं शुरू हो पाएंगी। -डॉ. विकास चंद्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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समधन नगर पंचायत और आसपास के 13 गांवों की 63 हजार आबादी के लिए 597.10 लाख रुपये की लागत से सीएचसी तैयार हुई। वहीं, उमर्दा के सात गांवों की 17 हजार आबादी के लिए 501.11 लाख रुपये पानी की तरह बहा दिए गए। 27 नवंबर 2023 को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एवं डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बड़े-बड़े दावों के साथ इनका वर्चुअल लोकार्पण किया।
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प्रशासन ने ओपीडी शुरू करा दी, लेकिन हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इसी बीच निर्माण कार्य की गुणवत्ता और लागत राशि बढ़ने के खेल पर वर्ष 2024 में राज्य स्तर से एसआईटी जांच शुरू हो गई। दो साल बीत जाने के बाद भी जांच की रिपोर्ट ठंडे बस्ते में है और हैंडओवर अटका हुआ है।
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रात होते ही झोलाछापों का सहारा
ओपीडी का समय खत्म होते ही दोपहर में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी रफूचक्कर हो जाते हैं। रात के समय ये सीएचसी वीरान पड़ जाती हैं। उल्टी-दस्त और आधी रात को अचानक किसी की तबीयत बिगड़े, तो प्राथमिक इलाज तक नसीब नहीं होता है। मरीजों को मजबूरन झोलाछाप के पास जेब ढीली करनी पड़ती है या फिर जिला अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज के चक्कर काटने पड़ते हैं।
वर्जन
उमर्दा और समधन सीएचसी की जांच राज्य स्तर पर गठित एसआईटी कर रही है। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही दोनों सीएचसी स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर की जा सकेंगी। इसके बाद ही यहां पूर्णकालिक और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं शुरू हो पाएंगी। -डॉ. विकास चंद्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी