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सौ शय्या अस्पताल में बगैर कोरोना जांच के चल रहा 78 मरीजों का उपचार
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Treatment of 78 patients undergoing corona examination in hundred beds
- फोटो : CHIBRAMAU
छिबरामऊ। नगर के सौ शय्या संयुक्त चिकित्सालय में लापरवाही का आलम यह है कि बिना कोरोना जांच के 78 मरीजों का उपचार किया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन की यह लापरवाही यहां पर भर्ती मरीजों, उनके तीमारदारों के अलावा स्वास्थ्य कर्मियों व चिकित्सकों पर भारी पड़ सकती है।
चिकित्सालय में इमरजेंसी वार्ड में 12, गायनी में 18, फर्स्ट फ्लोर पर बने वार्डों में 48 रोगी भर्ती हैं। ये सभी रोगी बुखार, पेट दर्द, उलटी से पीड़ित हैं। इन रोगियों का उपचार डेंगू के लक्षण के रूप में किया जा रहा है लेकिन किसी अधिकृत लैब की रिपोर्ट न होने से चिकित्सक खुलकर डेंगू होने की बात नहीं कह पा रहे हैं। मरीजों की टेस्टिंग अस्पताल के बाहर बनी लैब से कराई जा रही है। इसके अलावा अस्पताल से ज्यादा बाहर से लाई हुई दवाएं मरीजों को लगाई जा रही हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि अस्पताल में भर्ती इन मरीजों और इनके तीमारदारों ने कोरोना सैंपलिंग नहीं कराई है। ऐसे में इनके साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों, चिकित्सकों व इनके संपर्क में आने वालों को खतरा बना हुआ है। इस संबंध में ईएमओ डा. मनीष तिवारी ने बताया कि सीएमएस ने इमरजेंसी में ड्यूटी करने वाले सभी चिकित्सकों को अपने मरीजों की कोरोना सैंपलिंग कराने के लिए सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। वह प्रतिदिन सूची उपलब्ध भी करा रहे हैं लेकिन मरीज और उनके तीमारदार कोरोना सैंपलिंग कराने से बच रहे हैं।
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सौ शय्या संयुक्त चिकित्सालय के डा. मनीष तिवारी का कहना है कि डेंगू और कोराना दोनों वायरस से फैलने वाली बीमारियां हैं। दोनों के शुरुआती लक्षण एक जैसे ही हैं, जिस कारण अनुमान लगाना मुश्किल होता है कि मरीज कोरोना से पीड़ित है या डेंगू से। लक्षणों के आधार पर ही उनका इलाज शुरू किया जाता है। दोनों ही बीमारियों में सावधानी ही एकमात्र बचाव है। बुखार, शरीर में दर्द, जी-मचलाना, भूख कम लगना व सांस में तकलीफ, शरीर पर लाल रंग के चकत्ते पड़ना आदि डेंगू के लक्षण हैं जबकि बुखार, सर्दी, जुकाम, खांसी व सांस लेने में तकलीफ यह कोरोना के लक्षण हैं। नाक बहने वाली समस्या होने पर तीन दिन तक अगर बुखार नहीं उतरता है तो मरीज की कोरोना सैंपलिंग करानी चाहिए।
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चिकित्सालय में इमरजेंसी वार्ड में 12, गायनी में 18, फर्स्ट फ्लोर पर बने वार्डों में 48 रोगी भर्ती हैं। ये सभी रोगी बुखार, पेट दर्द, उलटी से पीड़ित हैं। इन रोगियों का उपचार डेंगू के लक्षण के रूप में किया जा रहा है लेकिन किसी अधिकृत लैब की रिपोर्ट न होने से चिकित्सक खुलकर डेंगू होने की बात नहीं कह पा रहे हैं। मरीजों की टेस्टिंग अस्पताल के बाहर बनी लैब से कराई जा रही है। इसके अलावा अस्पताल से ज्यादा बाहर से लाई हुई दवाएं मरीजों को लगाई जा रही हैं।
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हैरान करने वाली बात यह है कि अस्पताल में भर्ती इन मरीजों और इनके तीमारदारों ने कोरोना सैंपलिंग नहीं कराई है। ऐसे में इनके साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों, चिकित्सकों व इनके संपर्क में आने वालों को खतरा बना हुआ है। इस संबंध में ईएमओ डा. मनीष तिवारी ने बताया कि सीएमएस ने इमरजेंसी में ड्यूटी करने वाले सभी चिकित्सकों को अपने मरीजों की कोरोना सैंपलिंग कराने के लिए सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। वह प्रतिदिन सूची उपलब्ध भी करा रहे हैं लेकिन मरीज और उनके तीमारदार कोरोना सैंपलिंग कराने से बच रहे हैं।
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सौ शय्या संयुक्त चिकित्सालय के डा. मनीष तिवारी का कहना है कि डेंगू और कोराना दोनों वायरस से फैलने वाली बीमारियां हैं। दोनों के शुरुआती लक्षण एक जैसे ही हैं, जिस कारण अनुमान लगाना मुश्किल होता है कि मरीज कोरोना से पीड़ित है या डेंगू से। लक्षणों के आधार पर ही उनका इलाज शुरू किया जाता है। दोनों ही बीमारियों में सावधानी ही एकमात्र बचाव है। बुखार, शरीर में दर्द, जी-मचलाना, भूख कम लगना व सांस में तकलीफ, शरीर पर लाल रंग के चकत्ते पड़ना आदि डेंगू के लक्षण हैं जबकि बुखार, सर्दी, जुकाम, खांसी व सांस लेने में तकलीफ यह कोरोना के लक्षण हैं। नाक बहने वाली समस्या होने पर तीन दिन तक अगर बुखार नहीं उतरता है तो मरीज की कोरोना सैंपलिंग करानी चाहिए।