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बिछड़े जोड़ों को मिलाने के लिए कर रहीं काम
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Tue, 20 Oct 2015 12:38 AM IST
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शहर की रहने वाली मेराज बानो एनजीओ संचालिका ही नहीं
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हैं। वह कई ऐसे काम कर रही हैं, जिससे लोगों को सीख लेनी होगी। उनके कार्य
से कई लोगों को राहत मिली है। महिलाओं व बच्चों के लिए हर संभव मदद के लिए
वह जुट जाती हैं।
वारसी सेवा सदन नाम से एनजीओ चलाने वाली करीब 55 वर्षीय मेराज बानो का कहना है कि उनका एनजीओ कन्नौज समेत इटावा, कानपुर, कानपुर देहात, औरैया, हरदोई, एटा जिलों में सक्रिय हैं। इस समय वह पुलिस लाइन में नई किरण के नाम से चल रहे बिछड़े दंपति को मिलाने के लिए भी काम रही हैं।
हालांकि, उनके साथ कई पुलिस विभाग के अफसर व अन्य लोग भी जोड़े मिलवाने के लिए काम करते हैं। उन्होंने बताया कि योजना शुरू होने से अब तक करीब तीन सैकड़ा जोड़ों के बीच ऐसा समझौता हुआ कि वह सही ढंग से रहने लगे हैं। उन्होंने बताया कि जब बीच में जोड़े को दिक्कत आती है, तो वह फालोअप भी करती हैं।
मेराज ने बताया कि करीब एक साल से एक गूंगी युवती जो अपना नाम किसी तरह हुसना लिखकर बताती है, के माता-पिता का पता नहीं चल पा रहा है। घर भी नहीं बता पा रही है। वर्तमान में वह इटावा के नारी सुरक्षा केंद्र में है। जब उसकी तारीख यहां होती है, तो वह इटावा जाती हैं व उसे लेकर डीएम के यहां पेश किया जाता है।
उसके परिजन ढूंढने में मदद कर रही हैं। इस मामले में डीएम अनुज झा भी बेहतर ढंग से लगे हैं। उन्होंने बताया कि महिला सशक्तीकरण के अलावा वह चाइल्ड लाइन 1090 में भी काम कर रही हैं। महिलाओं को वह प्रशिक्षण देती हैं। आमदनी बढ़ाने के साथ ही आत्मनिर्भर बनाने को कहती हैं।
सैकड़ों महिलाओं को इससे लाभ मिला है। कुछ महीने पहले लावारिस बच्चे को गोद लेने के लिए निसंतान दंपति व गरीब किशोरी को आवासीय स्कूल में प्रवेश लेने के मामले में भी जिला प्रोबेशन अधिकारी राजेश कुमार बघेल के मदद करने की बात भी उन्होंने बताई। कहा कि अधिकतर मामलों में उनको सफलता मिली है।
वारसी सेवा सदन नाम से एनजीओ चलाने वाली करीब 55 वर्षीय मेराज बानो का कहना है कि उनका एनजीओ कन्नौज समेत इटावा, कानपुर, कानपुर देहात, औरैया, हरदोई, एटा जिलों में सक्रिय हैं। इस समय वह पुलिस लाइन में नई किरण के नाम से चल रहे बिछड़े दंपति को मिलाने के लिए भी काम रही हैं।
हालांकि, उनके साथ कई पुलिस विभाग के अफसर व अन्य लोग भी जोड़े मिलवाने के लिए काम करते हैं। उन्होंने बताया कि योजना शुरू होने से अब तक करीब तीन सैकड़ा जोड़ों के बीच ऐसा समझौता हुआ कि वह सही ढंग से रहने लगे हैं। उन्होंने बताया कि जब बीच में जोड़े को दिक्कत आती है, तो वह फालोअप भी करती हैं।
मेराज ने बताया कि करीब एक साल से एक गूंगी युवती जो अपना नाम किसी तरह हुसना लिखकर बताती है, के माता-पिता का पता नहीं चल पा रहा है। घर भी नहीं बता पा रही है। वर्तमान में वह इटावा के नारी सुरक्षा केंद्र में है। जब उसकी तारीख यहां होती है, तो वह इटावा जाती हैं व उसे लेकर डीएम के यहां पेश किया जाता है।
उसके परिजन ढूंढने में मदद कर रही हैं। इस मामले में डीएम अनुज झा भी बेहतर ढंग से लगे हैं। उन्होंने बताया कि महिला सशक्तीकरण के अलावा वह चाइल्ड लाइन 1090 में भी काम कर रही हैं। महिलाओं को वह प्रशिक्षण देती हैं। आमदनी बढ़ाने के साथ ही आत्मनिर्भर बनाने को कहती हैं।
सैकड़ों महिलाओं को इससे लाभ मिला है। कुछ महीने पहले लावारिस बच्चे को गोद लेने के लिए निसंतान दंपति व गरीब किशोरी को आवासीय स्कूल में प्रवेश लेने के मामले में भी जिला प्रोबेशन अधिकारी राजेश कुमार बघेल के मदद करने की बात भी उन्होंने बताई। कहा कि अधिकतर मामलों में उनको सफलता मिली है।