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बच्चों के चेहरों पर दिखी दहशत
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Sat, 24 Oct 2015 12:23 AM IST
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दंगे के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
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बच्चे घरों के अंदर कैद हो गए। कई मोहल्लों में पुलिस की सायरन बजाते हुई
वाहनों के निकलने के बाद बच्चे कभी खिड़की तो कभी छज्जे से झांकते नजर आए।
मासूमों के चेहरों पर भी दहशत साफ नजर आई। यही हाल महिलाओं का रहा।
अफवाहें पूरे दिन फैलती रहीं। गुरसहायगंज, समधन, सौरिख, छिबरामऊ, तिर्वा, मानीमऊ समेत अन्य क्षेत्रों में खौफ की बातें चर्चा का विषय बनी रहीं। दुकानें बंद करके घरों की तरफ भागे दुकानदारों को नुकसान के साथ भी यह डर सता रहा था कि कहीं बंद दुकान दंगाइयों के बुरे इरादों की शिकार न हो जाए।
रेलवे व रोडवेज से आने वाली सवारियों को सरायमीरा से कन्नौज शहर तक पहुंचाकर रोजी-रोटी कमाने वाले दो दर्जन तांगा चालकों का धंधा भी बवाल की भेंट चढ़ गया। जान बचाने के लिए बस स्टाप के बाहर खड़े तांगा चालक सवारियां छोड़कर अपने घरों तक सुरक्षित पहुंचने के लिए चल पड़े।
दंगे को लेकर लोगों से बातचीत का प्रयास किया गया, पर किसी ने कोई प्रतिक्रिया देने की हिम्मत नहीं जुटाई। नाम न छापने पर बुजुर्गों और युवाओं ने कहा कि दंगे के लिए पुलिस व जिला प्रशासन पूरी तरह दोषी है। थाने में गठित शांति कमेटी बेमतलब है। पुलिस अपने चहेतों व तमाम असामाजिक तत्वों को ही शांति कमेटी की बैठकों में बुलाती है।
मुकदमे में नामजद कई नाम शांति कमेटी में शामिल हैं। शहरवासियों का कहना है कि पिछली बार की तरह अबकी असरदार दंगाइयों को नेताओं के दबाव में छोड़ा न जाए।
अफवाहें पूरे दिन फैलती रहीं। गुरसहायगंज, समधन, सौरिख, छिबरामऊ, तिर्वा, मानीमऊ समेत अन्य क्षेत्रों में खौफ की बातें चर्चा का विषय बनी रहीं। दुकानें बंद करके घरों की तरफ भागे दुकानदारों को नुकसान के साथ भी यह डर सता रहा था कि कहीं बंद दुकान दंगाइयों के बुरे इरादों की शिकार न हो जाए।
रेलवे व रोडवेज से आने वाली सवारियों को सरायमीरा से कन्नौज शहर तक पहुंचाकर रोजी-रोटी कमाने वाले दो दर्जन तांगा चालकों का धंधा भी बवाल की भेंट चढ़ गया। जान बचाने के लिए बस स्टाप के बाहर खड़े तांगा चालक सवारियां छोड़कर अपने घरों तक सुरक्षित पहुंचने के लिए चल पड़े।
दंगे को लेकर लोगों से बातचीत का प्रयास किया गया, पर किसी ने कोई प्रतिक्रिया देने की हिम्मत नहीं जुटाई। नाम न छापने पर बुजुर्गों और युवाओं ने कहा कि दंगे के लिए पुलिस व जिला प्रशासन पूरी तरह दोषी है। थाने में गठित शांति कमेटी बेमतलब है। पुलिस अपने चहेतों व तमाम असामाजिक तत्वों को ही शांति कमेटी की बैठकों में बुलाती है।
मुकदमे में नामजद कई नाम शांति कमेटी में शामिल हैं। शहरवासियों का कहना है कि पिछली बार की तरह अबकी असरदार दंगाइयों को नेताओं के दबाव में छोड़ा न जाए।