{"_id":"461c9d545848ba5bf33857fa687b05f8","slug":"the-mango-trees-blossom-lhlhaa-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बौर से आम के पेड़ लहलहाए ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बौर से आम के पेड़ लहलहाए
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Wed, 02 Mar 2016 12:08 AM IST
विज्ञापन
फलों के राजा कहे जाने वाले आम की फसल ने किसानों के
विज्ञापन
चेहरों पर रौनक बिखेर दी है। आम के पेड़ों आए बौर से किसान अबकी अंदाजा लगा
रहा कि फसल से मोटा मुनाफा कमाया जा सकेगा। आम के पेड़ अबकी बौर से पूरी
तरह से ढक गए हैं, जिससे पेड़ झुक गए हैं। कन्नौज, गुगरापुर व तालग्राम
क्षेत्र में सर्वाधिक आम की बागवानी है।
ज्ञात हो कि बसंत मौसम के शुरू होते ही आम के पेड़ो में बौर आना शुरू हो जाता है। आम की फसल करने वाले किसानों ने देखरेख व पेड़ो में पानी व दवाइयों का छिड़काव करना शुरू कर दिया है। अबकी यदि मौसम ने साथ दिया तो जिले के लोगों को भरपूर मात्रा में आम का स्वाद चखने को मिल सकेगा।
उद्यान विभाग के आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो जिले में बागवानी का लगभग 1500 हेक्टेयर क्षेत्रफल है। सर्वाधिक आमों का क्षेत्र कन्नौज, गगुरापुर, तालग्राम व छिबरामऊ में है। जिले में दशहरी आमों में लंगड़ा, चौसा, कलमी, वैनजीरा सहित अन्य प्रजातियां होती है, जबकि देसी आमों की ज्यादा प्रजातियां हैं।
जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव ने बताया कि गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिए कीट एवं रोगों का उचित समय प्रबंधन जरूरी है। बौर निकलने से लेकर फल लगने तक की अवस्था अत्यंत ही संवेदनशील होती है। वर्तमान में आम की फसल को भुनगा, मिज कीट तथा खर्रा से क्षति पहुंचने की संभावना है।
आम के बागों में भुनगा कीट कोमल पत्तियों व छोटे फलों के रस चूसकर हानि पहुंचाते है। प्रभावित भाग सूखकर गिर जाता है, साथ ही कीट मधु की तरह पदार्थ भी विसर्जित करता है, जिससे पत्तियों पर काले रंग की फफूंद जम जाती है। आम के बौर में लगने वाला मिज कीट मंजरियों व तुरंत बने फलों तथा बाद में मुलायम कोपलों में अंडे देती है।
जिसकी सूडी अंदर खाकर क्षति पहुंचाती है। प्रभावित भाग काला पड़कर सूख जाता है। भुनगा एवं मिज कीट के नियंत्रण को इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मिली प्रति लीटर पानी या क्लोरोपाइरीफास 2.0 मिली पानी अथवा डायमेथोएट में घोल बनाकर छिड़काव करें। बताया कि खर्रा रोग के प्रकोप से ग्रसित फल एवं डंठलों पर सफेद चूर्ण के समान फफूंद की वृद्धि दिखाई देती है।
प्रभावित भाग पीले पड़ जाते हैं। इस रोग के बचाव हेतु ट्राइडोमार्फ 1.0 मिलीया डायनोकेप 1.0 मिली पानी में भुनगा कीट के नियंत्रण के प्रयोग हेतु घोल के साथ मिलाकर छिड़काव करें। कहा कि बागों में जब बौर पूर्ण रूप से खिला हो तो उस अवस्था में कम से कम रासायनिक दवाओं का छिड़काव किया जाए।
ज्ञात हो कि बसंत मौसम के शुरू होते ही आम के पेड़ो में बौर आना शुरू हो जाता है। आम की फसल करने वाले किसानों ने देखरेख व पेड़ो में पानी व दवाइयों का छिड़काव करना शुरू कर दिया है। अबकी यदि मौसम ने साथ दिया तो जिले के लोगों को भरपूर मात्रा में आम का स्वाद चखने को मिल सकेगा।
उद्यान विभाग के आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो जिले में बागवानी का लगभग 1500 हेक्टेयर क्षेत्रफल है। सर्वाधिक आमों का क्षेत्र कन्नौज, गगुरापुर, तालग्राम व छिबरामऊ में है। जिले में दशहरी आमों में लंगड़ा, चौसा, कलमी, वैनजीरा सहित अन्य प्रजातियां होती है, जबकि देसी आमों की ज्यादा प्रजातियां हैं।
जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव ने बताया कि गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिए कीट एवं रोगों का उचित समय प्रबंधन जरूरी है। बौर निकलने से लेकर फल लगने तक की अवस्था अत्यंत ही संवेदनशील होती है। वर्तमान में आम की फसल को भुनगा, मिज कीट तथा खर्रा से क्षति पहुंचने की संभावना है।
आम के बागों में भुनगा कीट कोमल पत्तियों व छोटे फलों के रस चूसकर हानि पहुंचाते है। प्रभावित भाग सूखकर गिर जाता है, साथ ही कीट मधु की तरह पदार्थ भी विसर्जित करता है, जिससे पत्तियों पर काले रंग की फफूंद जम जाती है। आम के बौर में लगने वाला मिज कीट मंजरियों व तुरंत बने फलों तथा बाद में मुलायम कोपलों में अंडे देती है।
जिसकी सूडी अंदर खाकर क्षति पहुंचाती है। प्रभावित भाग काला पड़कर सूख जाता है। भुनगा एवं मिज कीट के नियंत्रण को इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मिली प्रति लीटर पानी या क्लोरोपाइरीफास 2.0 मिली पानी अथवा डायमेथोएट में घोल बनाकर छिड़काव करें। बताया कि खर्रा रोग के प्रकोप से ग्रसित फल एवं डंठलों पर सफेद चूर्ण के समान फफूंद की वृद्धि दिखाई देती है।
प्रभावित भाग पीले पड़ जाते हैं। इस रोग के बचाव हेतु ट्राइडोमार्फ 1.0 मिलीया डायनोकेप 1.0 मिली पानी में भुनगा कीट के नियंत्रण के प्रयोग हेतु घोल के साथ मिलाकर छिड़काव करें। कहा कि बागों में जब बौर पूर्ण रूप से खिला हो तो उस अवस्था में कम से कम रासायनिक दवाओं का छिड़काव किया जाए।