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‘कथा सुनने के लिए प्रभु भी आए थे धरती पर’
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Tue, 15 Dec 2015 12:21 AM IST
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कस्बा तालग्राम के कृष्ण धाम सत्संग भवन में चल रही
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कृष्ण कथा के अंतिम दिन वृंदावन से आए संतों ने कथा सुनाकर कृष्ण भक्ति की
अलख जगाई। कथा सुनने को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। कृष्ण कथा सुनकर श्रोता
मंत्रमुग्ध हो गए। इस दौरान जमकर जयकारे लगे। लोग भक्तिभाव में लीन होकर
झूमने लगे।
कस्बे में स्वामी आचार्य चैतन्य प्रभू के अनुयायी किंकर दामोदर महाराज ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि जिस दिन हमारा मन भगवान की सच्ची भक्ति में लग जाएगा, उसी दिन से हम अपने में भावना की मौजूदगी महसूस करने लगेंगे। भगवान भी इस भगवत कथा को सुनने के लिए धरती पर आए थे।
भगवान सबके हृदय में रहते हैं। अंत में संत ने कृष्ण व सुदामा चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि आज के समय में कोई भी मित्र सुदामा जैसा नहीं होता है। मतलब परख मित्र से दूरी बनाए रखने में ही भला है। कहा कि निस्वार्थ मित्र से दोस्ती का हाथ बढ़ाने में भला होता है। कार्यक्रम के बाद आचार्य एवं संतों को विदा किया गया।
जगह-जगह लोगों ने संतों का स्वागत किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस मौके पर आयोजक अभय गुप्ता बबलू, राधेश्याम, दीपक, सर्वेश, गोविंद शर्मा, अन्नू यादव, लालाराम, अतुल, राकेश, हिमांशु शर्मा आदि मौजूद थे।
कस्बे में स्वामी आचार्य चैतन्य प्रभू के अनुयायी किंकर दामोदर महाराज ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि जिस दिन हमारा मन भगवान की सच्ची भक्ति में लग जाएगा, उसी दिन से हम अपने में भावना की मौजूदगी महसूस करने लगेंगे। भगवान भी इस भगवत कथा को सुनने के लिए धरती पर आए थे।
भगवान सबके हृदय में रहते हैं। अंत में संत ने कृष्ण व सुदामा चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि आज के समय में कोई भी मित्र सुदामा जैसा नहीं होता है। मतलब परख मित्र से दूरी बनाए रखने में ही भला है। कहा कि निस्वार्थ मित्र से दोस्ती का हाथ बढ़ाने में भला होता है। कार्यक्रम के बाद आचार्य एवं संतों को विदा किया गया।
जगह-जगह लोगों ने संतों का स्वागत किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस मौके पर आयोजक अभय गुप्ता बबलू, राधेश्याम, दीपक, सर्वेश, गोविंद शर्मा, अन्नू यादव, लालाराम, अतुल, राकेश, हिमांशु शर्मा आदि मौजूद थे।