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काली रोजाना तीन बार बदलतीं रंग

Tue, 13 Oct 2015 12:17 AM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज Updated Tue, 13 Oct 2015 12:17 AM IST
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The black color three times daily Bdltin

मां काली दुर्गा देवी मंदिर सरायमीरा दूर-दूर तक

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विख्यात हैं। यहां सैकड़ों वर्ष पहले स्थापित काली मां की मूर्ति का रंग 24 घंटे में तीन बार बदलता है। कन्नौज के छिबरामऊ, गुरसहायगंज, ठठिया, मलिकपुर, उमर्दा, तिर्वा के साथ ही उरई जालौन, भिंड, औरैया, इटावा, कानपुर, हरदोई, शाहजहांपुर समेत आसपास कई जिलों के लोग इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं।

मंदिर के प्रबंधक एवं पुजारी बाबा अखंडानंद बताते हैं कि यह मंदिर कई सदी पुराना है। लाल पत्थर पर देवी की मूर्ति बनी है। इसे स्वर्ण व चांदी के आभूषणों से सजाया गया है। मां काली के बगल में मंदिर में दुर्गा की आदमकद प्रतिमा है। इसके अलावा मंदिर परिसर में ही भोले बाबा, शनिदेव, लक्ष्मीजी, विष्णु भगवान की भी भव्य मूर्तियां स्थापित हैं।

बताया कि मां काली के दरबार में कन्नौज जनपद ही नहीं आसपास क्षेत्र के लोग नवरात्र में खास तौर पर दर्शन करने आते हैं। सच्चे मन से मांगी गई मुराद अवश्य पूर्ण होती है। ाबा अखंडानंद के मुताबिक यह ऐेसी एकमात्र सिद्ध मूर्ति है जो हर मौसम में अलग-अलग रंग व भाव भंगिमा में नजर आती हैं।

कभी देवी का रौद्र रूप तो कभी प्रसन्न चित्त रूप नजर आता है। मंदिर परिसर में नवरात्र में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। गाजेबाजे के साथ मां के कई रूपों की स्थापना की जाती है। रोजाना शाम को आरती में सैकड़ों लोग शामिल होते हैं।

मंदिर परिसर में ही हवन कुंड बना है, जिसमें वेद मंत्रोच्चारण के साथ पूजा अर्चना करने के साथ ही हवन में आहुतियां भी डाली जाती हैं। मंदिर परिसर में भंडारा आयोजित कर कन्या भोज भी कराया जाता है। भागवत कथा, संगीतमय मां का जगराता भी होता है।

भक्त शैलेंद्र मिश्र बताते हैं कि कन्नौज रेलवे स्टेशन से करीब एक किमी की दूरी पर यह मंदिर स्थापित है। कन्नौज रेलवे स्टेशन पर जिले के कई मंदिरों की सूची में यह मंदिर शामिल है। दूरदराज से आने वाले पर्यटकों को देवी की बदली भाव भंगिमाएं व मूर्ति का रंग आस्था में डुबो देता है।

उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में बच्चों का अन्न प्रासन संस्कार भी होता है। जनश्रुति के अनुसार यहां जिस बच्चे का अन्नप्रासन होता है, वह तीक्ष्ण बुद्धि को होता है। बच्चे के जीवन में आने वाली ब्याधियों का निराकरण भी देवी मां की कृपा से हो जाता है।

फार्मेसिस्ट डा. जितेंद्र कटियार बताते हैं कि इस मंदिर में बैठकर ध्यान लगने से क्रोध अपने आप शांत हो जाता है। देवी के दर्शन मात्र से ही ऐसा महसूस होता है कि मानो मन व चित्त खिल उठा हो। सरायमीरा निवासी शानू कहते हैं कि मां काली दुर्गा देवी मंदिर की ख्याति दिनों दिनों फैलती जा रही है। एक बार जो यहां आ जाता है, वह फिर अक्सर आने लगता है।

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