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कन्नौज: विभव की डिग्री पर नौकरी करने वाला आरोपी जसवंत लिखा-पढ़ी में भी कमजोर था
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आरोपी जसवंत
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। कन्नौज के ब्लाक हसेरन के पूर्व माध्यमिक विद्यालय रामपुर बरौली में विभव की डिग्री पर नौकरी करने वाला आरोपी जसवंत कागजी लिखा-पढ़ी में कमजोर था। वह भाई पुष्पेंद्र उर्फ राज की मदद लिया करता था। मिड-डे मील का बिल, भवन मरम्मत कार्य, रंगाई-पुताई समेत अन्य कागजों को पुष्पेंद्र तैयार करता था, जबकि विभव उर्फ जसवंत हस्ताक्षर करता था। विभव उर्फ जसवंत को स्कूल के एकल होने का फायदा मिला। वह स्कूल में हस्ताक्षर कर आयेदिन गायब हो जाता था जबकि स्कूल में तैनात चपरासी प्रदीप बच्चों को पढ़ाता रहा।
हिंदी में हस्ताक्षर करता था विभव उर्फ जसवंत
रामपुर बरौली के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि चंद्रप्रकाश राजपूत ने बताया उन्हें मध्याह्न भोजन समेत अन्य कामों के लिए इंचार्ज प्रधानाध्यापक विभव उर्फ जसवंत से हस्ताक्षर करवाने पढ़ते थे। बताया विभव हमेशा हिंदी में बड़ी सावधानी से हस्ताक्षर करता था। उन्होंने बताया उसके व्यवहार से कभी किसी को विभव न होने शक नहीं हुआ।
बच्चों के प्रति व्यवहार था अच्छा
कक्षा सात के छात्र अनुज ने बताया कि गुरुजी जब भी स्कूल आते थे तो पूरा समय स्कूल को देते थे। बच्चों को अच्छे से पढ़ाते थे। कभी किसी बच्चे के साथ मारपीट नहीं की। इससे सभी बच्चे उनसे खुश रहते थे। विभव के जसवंत होने की गांव में चर्चा होेने से उसके साथियों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
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बाबू पर घूम रही शक की सुई
अनामिका शुक्ला की जब जांच हुई तो विभव की डिग्री पर जसवंत के नौकरी करने का मामला खुला। भनक लगते ही बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े बाबू ने प्रकरण संबंधी कागजात हटा दिए। मीडिया कर्मियों ने बाबू से विभव की सर्विस बुक से फोटो देने को कहा तो गोलमोल जवाब देते रहे। बाद में फोटो देने से इनकार कर दिया।
अफसरों के नहीं उठे फोन
इस मामले के बाद बीईओ हसेरन जय सिंह व बीएसए केके ओझा को फोन मिलाया गया, लेकिन किसी का भी नंबर नहीं उठा। इससे पहले भी अफसर जसवंत के मामले में गोलमोल जवाब देते रहे। इससे विभागीय गड़बड़ी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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हिंदी में हस्ताक्षर करता था विभव उर्फ जसवंत
रामपुर बरौली के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि चंद्रप्रकाश राजपूत ने बताया उन्हें मध्याह्न भोजन समेत अन्य कामों के लिए इंचार्ज प्रधानाध्यापक विभव उर्फ जसवंत से हस्ताक्षर करवाने पढ़ते थे। बताया विभव हमेशा हिंदी में बड़ी सावधानी से हस्ताक्षर करता था। उन्होंने बताया उसके व्यवहार से कभी किसी को विभव न होने शक नहीं हुआ।
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बच्चों के प्रति व्यवहार था अच्छा
कक्षा सात के छात्र अनुज ने बताया कि गुरुजी जब भी स्कूल आते थे तो पूरा समय स्कूल को देते थे। बच्चों को अच्छे से पढ़ाते थे। कभी किसी बच्चे के साथ मारपीट नहीं की। इससे सभी बच्चे उनसे खुश रहते थे। विभव के जसवंत होने की गांव में चर्चा होेने से उसके साथियों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
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बाबू पर घूम रही शक की सुई
अनामिका शुक्ला की जब जांच हुई तो विभव की डिग्री पर जसवंत के नौकरी करने का मामला खुला। भनक लगते ही बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े बाबू ने प्रकरण संबंधी कागजात हटा दिए। मीडिया कर्मियों ने बाबू से विभव की सर्विस बुक से फोटो देने को कहा तो गोलमोल जवाब देते रहे। बाद में फोटो देने से इनकार कर दिया।
अफसरों के नहीं उठे फोन
इस मामले के बाद बीईओ हसेरन जय सिंह व बीएसए केके ओझा को फोन मिलाया गया, लेकिन किसी का भी नंबर नहीं उठा। इससे पहले भी अफसर जसवंत के मामले में गोलमोल जवाब देते रहे। इससे विभागीय गड़बड़ी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।