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Kannauj News: आरोप की जांच के लिए लखनऊ से पहुंची टीम

Mon, 04 Mar 2024 11:50 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज Updated Mon, 04 Mar 2024 11:50 PM IST
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Team arrived from Lucknow to investigate the allegation
कन्नौज। बीएसए कार्यालय में तैनात वरिष्ठ लिपिक विमल पांडेय को रिश्वत लेने के आरोप में रंगे हाथ पकड़ने का दावा करने वाली एंटी करप्शन टीम अब खुद ही सवालों में घिर गई है। सीसीटीवी कैमरे का फुटेज बाहर आने के बाद एंटी करप्शन टीम पर उठ रहे सवाल के बाद विभाग सक्रिय हुआ है। मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने के बाद सोमवार को लखनऊ से एएसपी की अगुआई में टीम ने यहां पहुंचकर जरूरी जानकारी ली।
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दो दिन पहले वायरल हुए वीडियो में एंटी करप्शन टीम की ओर से की गई पूरी कार्रवाई पर ही प्रश्नचिह्न लग गया हैं। ऐसे में उस वीडियो का संज्ञान लेकर सोमवार को लखनऊ से एंटी करप्शन यूनिट की एएसपी इंदू प्रभा सिंह की अगुआई में टीम यहां बीएसए कार्यालय पहुंची। दोपहर दो बजे के बाद टीम ने वहां के कर्मचारियों से मुलाकात की। बीएसए के कक्ष में उन्होंने पहले तो सभी वहां के सभी कर्मचारियों को बुलाकर जानकारी की। इसके बाद कमरे का दरवाजा बंद करवा दिया। मौजूद कर्मचारियों से बारी-बारी 29 फरवरी को एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई से जुड़ी जानकारी की। टीम के सदस्यों ने उस दिन का पूरा ब्योरा उनके सामने रख दिया। उसके बाद उन्होंने वायरल वीडियो में लिपिक को रुपये देने वाले युवक और बीएसए के कक्ष में घुसकर वहां लगे सीसीटीवी कैमरा का डीवीआर खोल कर ले जाने वाले व्यक्ति से जुड़ी जानकारी चाही। कर्मचारियों ने उनमें से किसी को भी पहचानने से इंकार कर दिया। कर्मचारियों का कहना था कि जिस समय एंटी करप्शन टीम के लोग कार्रवाई कर रहे थे, वह संदिग्ध युवक भी टीम के साथ ही थे। करीब तक बीएसए कार्यालय में रहने के बाद वह टीम के साथ वापस चली गईं।
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एएसपी बोलीं, अभी जांच पूरी नहीं हुई
बीएसए कार्यालय के कर्मचारियों से जानकारी जुटाने के बाद वापसी के दौरान मीडिया से अनौपचारिक बातचीत के दौरान एंटी करप्शन यूनिट की एएसपी इंदू प्रभा सिंह ने बताया कि अभी जांच चल रही है। उनके मुताबिक वह जब जांच के लिए यहां आईं तो कई कर्मचारी कार्यालय से जा चुके थे। इसलिए कुछ ही लोगों से बात हो सकी है। यह पूछने पर कि वायरल वीडियो में जो लोग दिख रहे हैं उनमें एंटी करप्शन टीम के अलावा कौन लोग हैं, उन्होंने कहा कि वह इन्ही बिंदुओं की जांच कर रही हैं। मारपीट करने वाले कौन लोग थे और डीवीआर ले जाने वाले कौन लोग थे, इसकी जांच की जा रही है। हालांकि एंटी करप्शन टीम की संदिग्ध भूमिका पर उन्होंने कुछ भी बोलने से मना कर दिया।
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कर्मचारियों ने हस्ताक्षर करने से किया इंकार
एएसपी की जांच के दौरान कर्मचारियों ने बंद कमरे में 29 फरवरी की घटना से जुड़ी जानकारी मौखिक रूप से बता दी। इस दौरान टीम के लोग मोबाइल में उनका वीडियो बनाते रहे। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें जो हकीकत पता थी, वह बता दी। कागज पर हस्ताक्षर करने को कहा गया तो मना कर दिया। कर्मचारियाें का तर्क था कि उनकी विभागाध्यक्ष बीएसए अपने कार्यालय में नहीं हैं। उनकी गैरहाजिरी में वह किसी भी कागज पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। कर्मचारियों के मुताबिक एंटी करप्शन टीम की एएसपी ने बीएसए कार्यालय में तैनात शैलेंद्र कुमार, शिवा चतुर्वेदी, बीएसए के ड्राइवर अनिल पाल, सूरज कुमार, प्रदीप कुमार से उनका पक्ष जाना। 29 फरवरी की कार्रवाई की अगुआई करने वाली एंटी करप्शन यूनिट के इंस्पेक्टर मृत्युंज मिश्र भी इस दौरान मौजूद थे। कई कर्मचारियों ने एएसपी के सामने ही उनकी भूमिका पर सवाल किया। बताया कि बाबू की पिटाई करने वाले और डीवीआर खोलकर ले जाने वाले लोग इनके साथ ही घूम रहे थे। हालांकि मृत्युंज मिश्र इसे नकारते रहे।


टीम को बचाने की कोशिश में दिखी एंटी करप्शन
सोमवार को बीएसए कार्यालय में जांच के लिए पहुंची एंटी करप्शन यूनिट की टीम विभागीय लोगों को बचाने की कोशिश करती दिखी। जांच करने वाली टीम बार-बार इस बात पर जोर देती रही कि वायरल वीडियो जो युवक शिकायतकर्ता शिक्षक के साथ मौजूद है उससे विभाग का वास्ता नहीं है। इसके अलावा बीएसए के कार्यालय कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरा के डीवीआर को खोलकर ले जाने वाला बीएसए की मेज की रैक को खोलकर जांच करने वाला युवक कौन था, इससे भी जांच टीम मुकर गई।


यह है पूरा मामला
बीएसए कार्यालय में 29 फरवरी दोपहर 12 बजे के बाद उस समय अफरातफरी मच गई थी, जब एंटी करप्शन टीम ने वहां के वरिष्ठ लिपिक विमल पांडेय को यह कहते हुए दबोच लिया था कि उन्होंने एक शिक्षक से एरियर निकलवाने के बदले में 10 हजार रुपये लिया है। कानपुर से आई एंटी करप्शन टीम की अगुआई कर रहे इंस्पेक्टर मृत्युंजय मिश्र का तर्क था कि पीड़ित शिक्षक ने इस मामले की शिकायत की थी। उसी के तहत गुरुवार को टीम ने लिपिक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। हालांकि आरोपी लिपिक विमल पांडेय ने इस तरह के आरोप से इन्कार किया था। बीएसएस कार्यालय के दूसरे कर्मचारियों ने एंटी करप्शन टीम पर बीएसए के कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरा का डीवीआर तोड़ कर ले जाने का अरोप लगाया था।

एफआईआर की चुगली कर रहा सीसीटीवी का फुटेज

-एंटी करप्शन टीम के मुताबिक बीएसए अपने कार्यालय से जा चुकी थीं, जबकि बीएससए का दावा वह वहीं थीं।



-एंटी करप्शन टीम के मुताबिक वरिष्ठ लिपिक विमल पांडेय को रुपये लेते हए रंगे हाथों पकड़ा, रुपये उसकी जेब से बरामद हुए। जबकि सीसीटीवी में रुपये फाइल से गिराते हुए दिख रहा है।



-टीम ने दर्ज एफआईआर में दावा किया था कि रुपये बाबू ने अपने पॉकेट में रख लिए थे, जबकि सीसीटीवी में ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है।



-टीम ने लिपिक से मारपीट की घटना से इंकार किया था, जबकि सीसीटीवी कैमरा में पिटाई होती दिख रही है।


-एफआईआर में लिखा है कि टीम ने शिकायतकर्ता शिक्षक को ट्रीटेड नोट दिए और उसने अपनी शर्ट की जेब में रखा। जबकि सीसीटीवी में रुपये फाइल से गिराते हुए दिख रहा है।
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