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टमाटर पर मंदी, किसानों ने कूड़े में फेंके
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किसानों ने खेत में ही छोड़ दी टमाटर की फसल।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। कोरोना ने किसानों की कमर तोड़ दी है। आलू को छोड़कर लगभग सभी सब्जियों पर मंदी है। लागत तक नहीं निकल रही है। टमाटर के दामों में तगड़ी गिरावट है। शनिवार को थोक बाजार में टमाटर का भाव सवा रुपये प्रति किलो भी नहीं मिला। परेशान किसान मंडी के पास कूड़े में फेंक कर लौट गए। इस बार जलालपुर पनवारा इलाके में करीब डेढ़ सौ बीघा में टमाटर की फसल की गई है। यह किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है।
शनिवार को कन्नौज की थोक मंडी में टमाटर के भाव 30 रुपये कैरेट (25 किलो) आ गए। यानी एक रुपया 20 पैसा प्रति किलो दाम रहे। इस भाव में किसानों का भाड़ा तक वसूल नहीं हुआ। यह बचे टमाटर घर नहीं ले गए। कूड़े के ढेर में फेंक दिए। हाल यह है कि फसल को खेत से मंडी तक लाने में किसानों का भाड़ा तक नहीं निकल रहा। ऐसे में यह फसल को खेत में छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। किसानों के मुताबिक सॉस बनाने वाली फैक्टरियां बंद हैं। इससे खपत नहीं है। माल बाहर नहीं जा पा रहा है। दूसरी सब्जियों का हाल भी ठीक नहीं है। थोक मंडी में कद्दू दो रुपये किलो बिक रहा है। तोरई तीन रुपये किलो बिकी। भिंडी छह रुपये, करेला आठ रुपये प्रति किलो बिक रहा है। सब्जी खरीदने वालों को धनिया और मिर्च मुफ्त दी जा रही है।
जिले में टमाटर की फसल 200 हेक्टेयर के आसपास होती है। लोग दाल, राजमा, छोले आदि से काम चला रहे हैं। सॉस बनाने वाली फैक्टरियों में उत्पादन ठप रहा है। इससे भी मांग घटी है। गैर जनपदों की मंडियों से मांग लगभग शून्य है। ऐसे में किसानों की लागत भी नहीं निकल रही।
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- मनोज चतुर्वेदी, जिला उद्यान अधिकारी।
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शनिवार को कन्नौज की थोक मंडी में टमाटर के भाव 30 रुपये कैरेट (25 किलो) आ गए। यानी एक रुपया 20 पैसा प्रति किलो दाम रहे। इस भाव में किसानों का भाड़ा तक वसूल नहीं हुआ। यह बचे टमाटर घर नहीं ले गए। कूड़े के ढेर में फेंक दिए। हाल यह है कि फसल को खेत से मंडी तक लाने में किसानों का भाड़ा तक नहीं निकल रहा। ऐसे में यह फसल को खेत में छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। किसानों के मुताबिक सॉस बनाने वाली फैक्टरियां बंद हैं। इससे खपत नहीं है। माल बाहर नहीं जा पा रहा है। दूसरी सब्जियों का हाल भी ठीक नहीं है। थोक मंडी में कद्दू दो रुपये किलो बिक रहा है। तोरई तीन रुपये किलो बिकी। भिंडी छह रुपये, करेला आठ रुपये प्रति किलो बिक रहा है। सब्जी खरीदने वालों को धनिया और मिर्च मुफ्त दी जा रही है।
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जिले में टमाटर की फसल 200 हेक्टेयर के आसपास होती है। लोग दाल, राजमा, छोले आदि से काम चला रहे हैं। सॉस बनाने वाली फैक्टरियों में उत्पादन ठप रहा है। इससे भी मांग घटी है। गैर जनपदों की मंडियों से मांग लगभग शून्य है। ऐसे में किसानों की लागत भी नहीं निकल रही।
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- मनोज चतुर्वेदी, जिला उद्यान अधिकारी।