{"_id":"5cdfe61bd530183cf91e144c41c31d1b","slug":"swaying-land-falls-dasakandhara-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डोलत भूमि गिरत दशकंधर...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डोलत भूमि गिरत दशकंधर...
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Thu, 22 Oct 2015 11:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विजयदशमी का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। रामलीला
विज्ञापन
कमेटी के तत्वावधान में हुई रामलीला में राम-रावण की सेना में सड़कों पर
घमासान युद्ध हुआ। श्रीराम के हाथों रावण का अंत होते ही पूरा रामलीला
मैदान श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। सड़क से लेकर रामलीला मैदान तक
पुलिस व पीएसी का कड़ा पहरा था।
अबकी पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था न होने से कमेटी के लोगों में रोष व्याप्त रहा। रामलीला कमेटी के संयोजन में गत 15 दिनों से चल रही रामलीला के अंतिम दिन गुरुवार दोपहर बाद तालग्राम तिराहे से रामलीला मैदान तक राम-रावण की सेना के बीच सड़कों पर घमासान युद्ध हुआ। युद्ध को देखने भीड़ उमड़ पड़ी।
साथ में चल रहे रथ पर भगवान शंकर के रूप में पंकज दुबे अपने पुत्र भगवान गणेश के साथ विराजमान थे। सबसे पीछे चल रहे रथ पर रावण की भूमिका में रामसच्चे दीक्षित, माता सीता के साथ विराजमान थे। सड़क पर हनुमान के रूप में राजीव मिश्रा अपनी वानर सेना के साथ रावण की सेना से युद्ध करते हुए चल रहे थे।
इसमें राम, लक्ष्मण, अहिरावण, अंगद युद्ध करते हुए चल रहे थे। देर शाम सभी विशुनगढ़ रोड स्थित रामलीला मैदान पहुंचे। वहां हजारों की संख्या में भीड़ राम रावण का युद्ध देखने आई थी। अबकी कमेटी ने सुरक्षा की दृष्टि से मैदान के चारों तरफ बैरीकेडिंग कराई थी। महिलाओं और आगंतुकों के बैठने को पांडाल लगवाकर कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी।
रामलीला मैदान में काफी देर तक चले युद्ध में आखिरकार बुराई पर अच्छाई की जीत हुई और फिर श्रीराम के वाण से अधर्म के प्रतीक रावण का अंत हो गया। रावण के धराशायी होते ही श्रीराम के जयकारों तथा रावण के पुतले में रखे गोलों की गूंज से पूरा मैदान गुंजायमान हो उठा। आसमान में रंग-बिरंगी आतिशबाजी देख दर्शक रोमांचित हो उठे।
इस मौके पर अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता ललू, महावीर प्रसाद वैश्य, गंगेश्वरदयाल दीक्षित, मनोज दुबे, डा. प्रदीप सिंह, श्यामू चौहान, चंदन तिवारी, जग्गी पांडेय, राहुल दीक्षित, दिलीप गुप्ता, टीटू अग्निहोत्री, अवधेश अग्निहोत्री आदि ने भगवान राम की आरती उतारी।
अबकी पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था न होने से कमेटी के लोगों में रोष व्याप्त रहा। रामलीला कमेटी के संयोजन में गत 15 दिनों से चल रही रामलीला के अंतिम दिन गुरुवार दोपहर बाद तालग्राम तिराहे से रामलीला मैदान तक राम-रावण की सेना के बीच सड़कों पर घमासान युद्ध हुआ। युद्ध को देखने भीड़ उमड़ पड़ी।
साथ में चल रहे रथ पर भगवान शंकर के रूप में पंकज दुबे अपने पुत्र भगवान गणेश के साथ विराजमान थे। सबसे पीछे चल रहे रथ पर रावण की भूमिका में रामसच्चे दीक्षित, माता सीता के साथ विराजमान थे। सड़क पर हनुमान के रूप में राजीव मिश्रा अपनी वानर सेना के साथ रावण की सेना से युद्ध करते हुए चल रहे थे।
इसमें राम, लक्ष्मण, अहिरावण, अंगद युद्ध करते हुए चल रहे थे। देर शाम सभी विशुनगढ़ रोड स्थित रामलीला मैदान पहुंचे। वहां हजारों की संख्या में भीड़ राम रावण का युद्ध देखने आई थी। अबकी कमेटी ने सुरक्षा की दृष्टि से मैदान के चारों तरफ बैरीकेडिंग कराई थी। महिलाओं और आगंतुकों के बैठने को पांडाल लगवाकर कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी।
रामलीला मैदान में काफी देर तक चले युद्ध में आखिरकार बुराई पर अच्छाई की जीत हुई और फिर श्रीराम के वाण से अधर्म के प्रतीक रावण का अंत हो गया। रावण के धराशायी होते ही श्रीराम के जयकारों तथा रावण के पुतले में रखे गोलों की गूंज से पूरा मैदान गुंजायमान हो उठा। आसमान में रंग-बिरंगी आतिशबाजी देख दर्शक रोमांचित हो उठे।
इस मौके पर अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता ललू, महावीर प्रसाद वैश्य, गंगेश्वरदयाल दीक्षित, मनोज दुबे, डा. प्रदीप सिंह, श्यामू चौहान, चंदन तिवारी, जग्गी पांडेय, राहुल दीक्षित, दिलीप गुप्ता, टीटू अग्निहोत्री, अवधेश अग्निहोत्री आदि ने भगवान राम की आरती उतारी।