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संघर्ष कर महिलाओं को दिखाई समृद्धि की राह
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पति की मौत के बाद सुनीता चौहान ने हिम्मत नहीं हारी। मजबूत हौसले के दम पर घर की चौखट लांघ स्वयं सहायता समूह से जुड़ी संघर्ष की कहानी गढ़ी। समूह के माध्यम से स्वयं के साथ गांव की महिलाओं को समृद्धि की राह दिखाई तो क्षेत्र समेत प्रदेश स्तर पर पहचान मिली। जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर पर उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।
सदर तहसील क्षेत्र के गांव उदैतापुर निवासी सुनीता चौहान की जिंदगी कांटों भरी है लेकिन उन्होंने हौसले को कभी डिगने नहीं दिया। मूलरूप से जिला मैनपुरी के जासामई निवासी सुनीता चौहान वैवाहिक जीवन में व्यस्त थी। उनकी जिंदगी आराम से कट रही थी। उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे थे।
करीब 12 साल पहले उनके पति कृष्ण बिहारी चौहान की गोली मारकर हत्या कर दी। यहीं से उनके जीवन में संघर्ष शुरू हो गया। पति की मौत के बाद सबकुछ बदल गया। रंजिश के चलते उन्होंने बच्चों की खातिर ससुराल छोड़ दी। उन्होंने ससुराल छोड़ने के बाद मायके न जाने की मन में ठान ली।
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उन्होंने ससुर रामबाबू सिंह की ननिहाल उदैतापुर को अपना आशियाना बनाया। बुजुर्ग ससुर होने की वजह से वह बहू की ज्यादा मदद नहीं कर सके। सुनीता ने बच्चों को पालने व घर चलाने के लिए घर की चौखट लांघने की ठानी। शुरूआत में लोगों ने विरोध किया लेकिन बाद में सब राजी हो गए।
उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का मन बनाया। उन्होंने गांव की महिलाओं को साथ जोड़कर महात्मा गांधी स्वयं सहायता समूह का संचालन शुरू किया।
बापू के नाम से शुरू किए गए समूह से उन्हें अलग पहचान मिली। आज क्षेत्र ही नहीं बल्कि प्रदेश स्तर पर उन्हें सम्मान मिल चुका है। हाल में ही उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण की जयंती पर किसान सम्मान दिवस पर सम्मानित किया जा चुका है।
समूह में यह बन रहे उत्पाद
महात्मा गांधी स्वयं सहायता समूह में सुनीता चौहान बेसन, दाल, दलिया, आटा, मघौड़ी आदि उत्पाद बना रही हैं। इसकी बाजार में खूब मांग है।
उन्होंने घर में बने उत्पाद को बेचने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता है। बल्कि लोग घरों से ही उन्हें उत्पाद खरीदकर ले जाते हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू किया। आज उनके समूह में 18 से 20 महिलाएं काम रही हैं।
अब घरेलू मसालों पर करेगी काम
सुनीता चौहान ने बताया समूह के माध्यम से बनाए गए उत्पाद को लोगों ने खूब पसंद किया। अब समूह में मसालों पर काम करेगी। इसके लिए विभागीय अफसरों से भी बात कर ली है।
बताया कि हल्दी, मिर्च, धनिया समेत कई मसालों को वह समूह के माध्यम से तैयार कर बेचेंगी। इसका आने वाले दिनों में समूह को फायदा मिलेगा।
प्रदेश स्तर पर मिल चुका मिला सम्मान
महात्मा गांधी स्वयं सहायता से जुड़ने के बाद सुनीता चौहान की संघर्ष भरी जिंदगी आसान हो गई। उन्होंने सबसे पहले उत्पाद को जिला स्तर पर चलने वाले स्टाल में लगना शुरू किया।
इससे उन्हें पहचान मिली। एक साल पहले उन्हें वुमेन ऑफ दिया इंडिया में सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें जिला स्तर पर कई बार पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र मिल चुके हैं।
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सदर तहसील क्षेत्र के गांव उदैतापुर निवासी सुनीता चौहान की जिंदगी कांटों भरी है लेकिन उन्होंने हौसले को कभी डिगने नहीं दिया। मूलरूप से जिला मैनपुरी के जासामई निवासी सुनीता चौहान वैवाहिक जीवन में व्यस्त थी। उनकी जिंदगी आराम से कट रही थी। उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे थे।
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करीब 12 साल पहले उनके पति कृष्ण बिहारी चौहान की गोली मारकर हत्या कर दी। यहीं से उनके जीवन में संघर्ष शुरू हो गया। पति की मौत के बाद सबकुछ बदल गया। रंजिश के चलते उन्होंने बच्चों की खातिर ससुराल छोड़ दी। उन्होंने ससुराल छोड़ने के बाद मायके न जाने की मन में ठान ली।
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उन्होंने ससुर रामबाबू सिंह की ननिहाल उदैतापुर को अपना आशियाना बनाया। बुजुर्ग ससुर होने की वजह से वह बहू की ज्यादा मदद नहीं कर सके। सुनीता ने बच्चों को पालने व घर चलाने के लिए घर की चौखट लांघने की ठानी। शुरूआत में लोगों ने विरोध किया लेकिन बाद में सब राजी हो गए।
उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का मन बनाया। उन्होंने गांव की महिलाओं को साथ जोड़कर महात्मा गांधी स्वयं सहायता समूह का संचालन शुरू किया।
बापू के नाम से शुरू किए गए समूह से उन्हें अलग पहचान मिली। आज क्षेत्र ही नहीं बल्कि प्रदेश स्तर पर उन्हें सम्मान मिल चुका है। हाल में ही उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण की जयंती पर किसान सम्मान दिवस पर सम्मानित किया जा चुका है।
समूह में यह बन रहे उत्पाद
महात्मा गांधी स्वयं सहायता समूह में सुनीता चौहान बेसन, दाल, दलिया, आटा, मघौड़ी आदि उत्पाद बना रही हैं। इसकी बाजार में खूब मांग है।
उन्होंने घर में बने उत्पाद को बेचने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता है। बल्कि लोग घरों से ही उन्हें उत्पाद खरीदकर ले जाते हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू किया। आज उनके समूह में 18 से 20 महिलाएं काम रही हैं।
अब घरेलू मसालों पर करेगी काम
सुनीता चौहान ने बताया समूह के माध्यम से बनाए गए उत्पाद को लोगों ने खूब पसंद किया। अब समूह में मसालों पर काम करेगी। इसके लिए विभागीय अफसरों से भी बात कर ली है।
बताया कि हल्दी, मिर्च, धनिया समेत कई मसालों को वह समूह के माध्यम से तैयार कर बेचेंगी। इसका आने वाले दिनों में समूह को फायदा मिलेगा।
प्रदेश स्तर पर मिल चुका मिला सम्मान
महात्मा गांधी स्वयं सहायता से जुड़ने के बाद सुनीता चौहान की संघर्ष भरी जिंदगी आसान हो गई। उन्होंने सबसे पहले उत्पाद को जिला स्तर पर चलने वाले स्टाल में लगना शुरू किया।
इससे उन्हें पहचान मिली। एक साल पहले उन्हें वुमेन ऑफ दिया इंडिया में सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें जिला स्तर पर कई बार पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र मिल चुके हैं।