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शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए बनेगा हाईटेक एमएनसीयू
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कन्नौज। जिले में शिशु मृत्यु दर में गिरावट लाने के लिए महिला विंग में एमएनसीयू की स्थापना की जाएगी। इसमें नवजात शिशुओं को भर्ती कर हाईटेक उपकरणों से बेहतर इलाज किया जाएगा। इसके लिए शासन ने स्वास्थ्य विभाग को पहली किस्त में 12.84 लाख रुपये की धनराशि मुहैया करा दी है।
2019 में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 100 नवजातों में 34 की मौत हो रही है। जिले में शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए शासन ने मदर एंड न्यू बॉर्न केयर यूनिट की स्थापना क ा फैसला लिया है। इस यूनिट को जिला अस्पताल की महिला विंग में दिसंबर माह तक स्थापित कर लिया जाएगा। यहां एक बार में 34 नवजातों को भर्ती कर उपचार मुहैया कराया जाएगा। यूनिट की ओपीडी में 68 नवजातों व दो माह तक बच्चों की फोटोथेरेपी कर उपचार की व्यवस्था रहेगी। 24 घंटे में इमरजेंसी के साथ ओपीडी खुली रहेगी।
एसीएमओ डॉ. राम मोहन तिवारी ने बताया कि शासन ने इसके लिए 12. 84 लाख रुपये की धनराशि मुहैया करा दी है। जल्द ही रेडिएंट वार्मर और फोटोथेरेपी से लेकर अन्य उपकरणों की खरीद कर ली जाएगी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि यूनिट मेें ऑक्सीजन पाइप लाइन, वार्म जार, बेड व अन्य सुविधाएं बेहतर रहेंगी। जन्म लेने के बाद बच्चे के गंदा पानी पी लेने, सांस फूलने, पीलिया व अन्य किसी बीमारी की चपेट में होने पर हाई रिस्क में मानकर उपचार किया जाएगा।
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अभी 12 बेड का चल रहा एसएनसीयू
मौजूदा समय जिला अस्पताल की महिला विंग में सिक एंड न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में नवजातों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। यहां 12 रेडिएंट वार्मर हैं। इससे एक बार में कम संख्या में नवजातों को भर्ती करना पड़ रहा है। एमएनसीयू की स्थापना के बाद एक बार में अधिकांश नवजातों को भर्ती करने के बाद उपचार मिलना शुरू हो जाएगा।
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2019 में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 100 नवजातों में 34 की मौत हो रही है। जिले में शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए शासन ने मदर एंड न्यू बॉर्न केयर यूनिट की स्थापना क ा फैसला लिया है। इस यूनिट को जिला अस्पताल की महिला विंग में दिसंबर माह तक स्थापित कर लिया जाएगा। यहां एक बार में 34 नवजातों को भर्ती कर उपचार मुहैया कराया जाएगा। यूनिट की ओपीडी में 68 नवजातों व दो माह तक बच्चों की फोटोथेरेपी कर उपचार की व्यवस्था रहेगी। 24 घंटे में इमरजेंसी के साथ ओपीडी खुली रहेगी।
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एसीएमओ डॉ. राम मोहन तिवारी ने बताया कि शासन ने इसके लिए 12. 84 लाख रुपये की धनराशि मुहैया करा दी है। जल्द ही रेडिएंट वार्मर और फोटोथेरेपी से लेकर अन्य उपकरणों की खरीद कर ली जाएगी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि यूनिट मेें ऑक्सीजन पाइप लाइन, वार्म जार, बेड व अन्य सुविधाएं बेहतर रहेंगी। जन्म लेने के बाद बच्चे के गंदा पानी पी लेने, सांस फूलने, पीलिया व अन्य किसी बीमारी की चपेट में होने पर हाई रिस्क में मानकर उपचार किया जाएगा।
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अभी 12 बेड का चल रहा एसएनसीयू
मौजूदा समय जिला अस्पताल की महिला विंग में सिक एंड न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में नवजातों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। यहां 12 रेडिएंट वार्मर हैं। इससे एक बार में कम संख्या में नवजातों को भर्ती करना पड़ रहा है। एमएनसीयू की स्थापना के बाद एक बार में अधिकांश नवजातों को भर्ती करने के बाद उपचार मिलना शुरू हो जाएगा।