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Kannauj News: 58 हजार के गबन में 33 साल बाद सात साल की कैद

Fri, 31 Mar 2023 11:31 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज Updated Fri, 31 Mar 2023 11:31 PM IST
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Seven years imprisonment after 33 years for embezzlement of 58 thousand
कन्नौज। आलू विकास एवं विपणन संघ लिमिटेड नजरापुर के पूर्व विक्रेता को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 53 हजार रुपये के गबन का दोषी पाया है। 33 साल पुराने मामले में दोषी को सात साल की सजा सुनाई है। साथ ही 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। न देने पर डेढ़ महीने का अतिरिक्त कारावास भी भोगना पड़ेगा।
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सहायक अभियोजन अधिकारी संजीव यादव ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट धर्मवीर सिंह ने कानपुर के थाना नौबस्ता बर्रा विश्व बैंक कॉलोनी ई-669 निवासी दिवाकर पांडेय पुत्र रामचंद्र पांडेय को धारा 409 और 201 का दोषी पाया। उन्होंने बताया कि 1987 में दिवाकर पांडेय की नियुक्ति उत्तर प्रदेश आलू विकास एवं विपणन सहकारी संघ लिमिटेड नजरापुर कन्नौज में विक्रेता पद पर हुई थी। उसके बाद क्षेत्रीय प्रबंधक फतेहगढ़ पीवी सिंह ने तिर्वा थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 31 मार्च 1989 के खाद के स्टॉक, कैश बैलेंस आदि का सत्यापन किया जाना था, लेकिन 20 अप्रैल 1989 को चाबियों व अभिलेख समेत विक्रेता फरार हो गए।
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इनसेट
जिला मजिस्ट्रेट फर्रुखाबाद के आदेश पर तोड़ा गया था ताला
सहायक अभियोजन अधिकारी ने बताया कि सूचना देने के बाद भी दिवाकर पांडेय अपने उच्चाधिकारियां के सामने पेश नहीं हुए। उसके बाद छह मई को उनका तबादला नजरापुर से फतेहगढ़ कर दिया गया। नजरापुर में उमाशंकर अग्निहोत्री को विक्रेता नियुक्त किया गया। लेकिन उनको भी बीमारी आदि का बहाना बनाकर चार्ज नहीं दिया गया। जिला मजिस्ट्रेट फर्रुखाबाद के आदेश पर दो मई 1989 को नजरापुर केंद्र का ताला तुड़वाकर तहसीलदार नागेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव व आलू विकास एवं विपणन सहकारी संघ लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एमएल गुप्ता की मौजूदगी में उमाशंकर अग्निहोत्री को विक्रेता पद का चार्ज मिला। उसी दौरान पता चला कि दिवाकर पांडेय ने 52,770 रुपये का गबन किया है।
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बयान
निचली अदालत की सबसे बड़ी सजा
निचली अदालत में सबसे बड़ी सजा सात साल की ही होती है। सीजेएम न्यायालय ने गबन के मामले में अधिकतम सजा सुनाई, जो ऐतिहासिक बात है। इसके लिए उन्होंने प्रभावी बहस की थी।
संजीव यादव, सहायक अभियोजन अधिकारी
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