{"_id":"6570bb48df6d46c9870343b6","slug":"seven-years-imprisonment-after-32-years-for-getting-a-job-with-fake-appointment-letter-kannauj-news-c-214-1-knj1003-6365-2023-12-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kannauj News: फर्जी नियुक्ति पत्र से नौकरी करने में 32 साल बाद सात साल की कैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kannauj News: फर्जी नियुक्ति पत्र से नौकरी करने में 32 साल बाद सात साल की कैद
Wed, 06 Dec 2023 11:49 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Wed, 06 Dec 2023 11:49 PM IST
विज्ञापन
छिबरामऊ। फर्जी अभिलेखों व नियुक्ति पत्र की मदद से भारतीय स्टेट बैंक में दफ्तरी की नौकरी हासिल करने वाले आरोपी को 32 साल के लंबे इंतजार के बाद दोषी करार दिया गया है। अदालत ने उसे सात साल की कैद के साथ ही 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना जमा न करने पर तीन माह कर सजा और बढ़ा दी जाएगी।
सहायक अभियोजन अधिकारी दानिश जमाल सिद्दीकी ने बताया कि यह मामला 32 साल पुराना है। वर्ष 1991 में स्टेट बैंक की शाखा छिबरामऊ में दफ्तरी पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए थे। इस पद के लिए जनपद मैनपुरी के थाना किशनी अंतर्गत ग्राम केशवपुर निवासी संतोष सिंह ने फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर बैंक में नौकरी हासिल कर ली। उसके अभिलेखों की जब जांच कराई गई तो सभी फर्जी निकले। वर्ष 1991 में भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक एसी निगम ने उसके खिलाफ फर्जी अभिलेखों की सहायता से बैंक के साथ धोखाधड़ी कर नौकरी हासिल करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस ने 11 नवंबर 1994 में चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की थी। वर्ष 2006 से न्यायालय में मुकदमा ट्रायल पर आया। एसीजेएम सलोनी रस्तोगी ने बैंक व आरोपी पक्ष को सुनने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया गया।
इस तरह सुनाई गई सजा
अदालत ने दोषी को धारा 420 में पांच साल का साधारण कारावास व पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके लावा धारा 467 में सात साल की कैद व 10 हजार जुर्माना, धारा 468 में पांच साल कैद व 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। सभी सजाएं साथ साथ चलेंगी। इसके अलावा एसीजेएम ने अर्थदंड जमा न करने पर तीन माह की सजा और बढ़ाने का आदेश सुनाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सहायक अभियोजन अधिकारी दानिश जमाल सिद्दीकी ने बताया कि यह मामला 32 साल पुराना है। वर्ष 1991 में स्टेट बैंक की शाखा छिबरामऊ में दफ्तरी पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए थे। इस पद के लिए जनपद मैनपुरी के थाना किशनी अंतर्गत ग्राम केशवपुर निवासी संतोष सिंह ने फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर बैंक में नौकरी हासिल कर ली। उसके अभिलेखों की जब जांच कराई गई तो सभी फर्जी निकले। वर्ष 1991 में भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक एसी निगम ने उसके खिलाफ फर्जी अभिलेखों की सहायता से बैंक के साथ धोखाधड़ी कर नौकरी हासिल करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस ने 11 नवंबर 1994 में चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की थी। वर्ष 2006 से न्यायालय में मुकदमा ट्रायल पर आया। एसीजेएम सलोनी रस्तोगी ने बैंक व आरोपी पक्ष को सुनने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया गया।
विज्ञापन
इस तरह सुनाई गई सजा
अदालत ने दोषी को धारा 420 में पांच साल का साधारण कारावास व पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके लावा धारा 467 में सात साल की कैद व 10 हजार जुर्माना, धारा 468 में पांच साल कैद व 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। सभी सजाएं साथ साथ चलेंगी। इसके अलावा एसीजेएम ने अर्थदंड जमा न करने पर तीन माह की सजा और बढ़ाने का आदेश सुनाया है।
विज्ञापन