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Kannauj News: डिग्री कॉलेजों के 17 हजार विद्यार्थियों के वजीफे अधर में

Fri, 10 Mar 2023 10:44 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज Updated Fri, 10 Mar 2023 10:44 PM IST
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Scholarship of 17 thousand students of degree colleges in balance
कन्नौज। जनपद के 100 डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले 17 हजार छात्र-छात्राओं को वजीफा व शुल्क प्रतिपूर्ति मिलना मुश्किल दिख रहा है। समय रहते विश्वविद्यालय की ओर से डाटा लॉक नहीं किया गया है। इस कारण मजबूरीवश आवेदनों को संबंधित विभाग निरस्त करने लगा है।
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दरअसल, छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए विद्यार्थियों को पहले ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इस आवेदन को संबंधित महाविद्यालय की ओर से जांचने के बाद आगे बढ़ाया जाता है। पिछड़ा वर्ग और समाज कल्याण विभाग भी डाटा को देखता है। जिस स्कूल या डिग्री कॉलेज को बोर्ड या विश्वविद्यालय से मान्यता मिली होती है और फीस, प्रवेश के लिए सीट आदि का निर्धारण होता है। वही वजीफा आवेदन को सत्यापित करता है। इस बार जिले के 17 हजार छात्र-छात्राओं का डाटा सत्यापित नहीं किया गया है। इसकी अंतिम तिथि भी निकल गई है।
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जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी अनुपम राय का कहना है कि जो डाटा सत्यापित और लॉक नहीं किया जाता है, उसे नियम के तहत रिजेक्ट कर दिया जाता है। उसके बाद विद्यार्थी को वजीफा नहीं मिलता है। अब 10 मार्च को समाज कल्याण विभाग और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति के आवेदनों को निरस्त करना मजबूरी है।
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एजेंसी या संस्था की ओर से ही वजीफा आवेदन को प्रमाणित किया जाता है। ऐसा न करने पर आवेदन निरस्त हो जाता है। शुक्रवार को अंतिम तिथि है, समय रहते प्रक्रिया पूर्ण होगी। चार हजार डाटा सत्यापित नहीं हुआ है। उसे रिथेक्ट किया जाएगा। हालांकि आगे भारत सरकार से अनुमति लेकर तारीख बढ़ सकती है। छात्रों को वजीफा भी मिलने की उम्मीद है।
सुनील सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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अधिकांश डिग्री कॉलेजों के वजीफा डाटा को विश्वविद्यालय व अन्य संस्थाओं की ओर से सत्यापित नहीं किया गया है। विभाग में 10,734 आवेदन रिजेक्ट होंगे। इसके लिए डॉटा लॉगिन पर मंगा लिया गया है। 20 मार्च वजीफा व शुल्क प्रतिपूर्ति भेजने की आखिरी तारीख है।
अनुपम राय, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग
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विभाग ने लिखे चार बार पत्र
छात्रवृत्ति के डाटा को समय पर सत्यापित करने के लिए पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से 19 नवंबर 2022 से अब तक चार बार पत्र लिखे गए हैं। इसमें निदेशक, उप निदेशक व जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी ने भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को चिट्ठी लिखी थीं। इसके बाद भी लापरवाही बरती गई।
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रिजेक्ट के लिए लिखी गई थी चिट्ठी
पहली मार्च को पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी को पत्र लिखा था। उसमें कहा गया है कि पेंडिंग डाटा को रिजेक्ट करने के लिए विकल्प दिया जाए।

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विश्वविद्यालय का परीक्षा परिणाम पूरा नहीं था। जब जारी हुआ तो वजीफा का डाटा सत्यापित करने का समय निकल गया। समाज कल्याण विभाग के उच्चाधिकारियों को यूनिवर्सिटी की ओर से पत्र लिखा गया है। वजीफा व शुल्क प्रतिपूर्ति दिलाने की प्रक्रिया चल रही है।
डॉ. अजय सिंह, प्राचार्य- पीएसएम पीजी कॉलेज
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