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Kannauj News: बाटम 59 दिनों का सावन चार से
Wed, 28 Jun 2023 12:17 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Wed, 28 Jun 2023 12:17 AM IST
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तालग्राम। इस बार सावन में अद्भुत संयोग बन रहा है। कारण है कि सावन दो माह तक रहेगा और आठ सोमवार मिलेंगे। इस दौरान शिव मंदिरों में भोलेनाथ के जयकारे गूंजेंगे और पूजन पाठ होगा। सावन का महीना देवों के देव महादेव को समर्पित माना जाता है। एक किंवदंती प्रचलित है कि सावन में सुआ (तोता) भी उपासा रहता है। हर साल सावन मास की शुरुआत आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि के अगले दिन से होती है। इस बार सावन महीने की शुरुआत चार जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक रहेगा। इस वर्ष शिव भक्तों को उपासना के लिए 59 दिन मिल रहे हैं। इसके लिए भक्तों ने तैयारी शुरू कर दी हैं। मंदिरों में साफ-सफाई का काम किया जा रहा है।
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फोटो 18- आचार्य कामिनी प्रसाद शुक्ला। संवाद
कस्बे तालग्राम के आचार्य कामिनी प्रसाद शुक्ला बताते है कि धर्म शास्त्रों में अधिक मास के स्वामी भगवान विष्णु बताए गए हैं। सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। ऐसे में इस बार सावन और अधिक मास साथ-साथ पड़ने से भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की भी कृपा प्राप्त होगी। हिंदू धर्म में सावन का महीना बेहद पवित्र माना जाता है। इस पूरे माह शिवभक्त अपने आराध्य को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए विधिविधान से पूजन करते हैं। कुंवारी कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए सोलह सोमवार का व्रत भी रखती हैं। जिसकी शुरुआत सावन महीने से ही होती है।
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फोटो 19 बाबा सीताराम महाराज। संवाद
अमोलर बिशोखर धाम आश्रम के संत शिरोमणि श्री श्री 108सीताराम महाराज बताते है कि सौर मास 365 दिनों का होता है, लेकिन वैदिक पंचांग की गणना और मास के आधार पर चंद्रमा 354 दिनों का होता है। इस तरह 11 दिन का अंतर आता है और हर तीसरे साल यह अंतर 33 दिन का हो जाता है। जिसे अधि मास कहा जाता है। इस बार आधे सावन के बाद अधिमास उसके बाद फिर आधा सावन का योग है। ऐसे में भगवान शिव की आराधना, जलाभिषेक व रुद्राभिषेक करने का फल श्रद्धालुओं को अधिक मिलता है। सबसे खास बात यह है कि सावन महीने के सोमवार को भगवान भोलेनाथ की मुख्य आराधना मानी जाती है और दो माह के सावन में आठ सोमवार मिल रहे हैं। सावन में आठ सोमवार की तिथियों का संयोग बहुत अच्छा माना जा रहा है।
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पहला सोमवार 10 जुलाई को
सावन का पहला पावन सोमवार 10 जुलाई, दूसरा 17, तीसरा 24, चौथा सोमवार 31 जुलाई को है, पांचवां सोमवार 07 अगस्त, छठा 14 अगस्त, सातवां 21 अगस्त व आठवां 28 अगस्त को पड़ रहा है।
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फोटो 18- आचार्य कामिनी प्रसाद शुक्ला। संवाद
कस्बे तालग्राम के आचार्य कामिनी प्रसाद शुक्ला बताते है कि धर्म शास्त्रों में अधिक मास के स्वामी भगवान विष्णु बताए गए हैं। सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। ऐसे में इस बार सावन और अधिक मास साथ-साथ पड़ने से भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की भी कृपा प्राप्त होगी। हिंदू धर्म में सावन का महीना बेहद पवित्र माना जाता है। इस पूरे माह शिवभक्त अपने आराध्य को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए विधिविधान से पूजन करते हैं। कुंवारी कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए सोलह सोमवार का व्रत भी रखती हैं। जिसकी शुरुआत सावन महीने से ही होती है।
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फोटो 19 बाबा सीताराम महाराज। संवाद
अमोलर बिशोखर धाम आश्रम के संत शिरोमणि श्री श्री 108सीताराम महाराज बताते है कि सौर मास 365 दिनों का होता है, लेकिन वैदिक पंचांग की गणना और मास के आधार पर चंद्रमा 354 दिनों का होता है। इस तरह 11 दिन का अंतर आता है और हर तीसरे साल यह अंतर 33 दिन का हो जाता है। जिसे अधि मास कहा जाता है। इस बार आधे सावन के बाद अधिमास उसके बाद फिर आधा सावन का योग है। ऐसे में भगवान शिव की आराधना, जलाभिषेक व रुद्राभिषेक करने का फल श्रद्धालुओं को अधिक मिलता है। सबसे खास बात यह है कि सावन महीने के सोमवार को भगवान भोलेनाथ की मुख्य आराधना मानी जाती है और दो माह के सावन में आठ सोमवार मिल रहे हैं। सावन में आठ सोमवार की तिथियों का संयोग बहुत अच्छा माना जा रहा है।
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पहला सोमवार 10 जुलाई को
सावन का पहला पावन सोमवार 10 जुलाई, दूसरा 17, तीसरा 24, चौथा सोमवार 31 जुलाई को है, पांचवां सोमवार 07 अगस्त, छठा 14 अगस्त, सातवां 21 अगस्त व आठवां 28 अगस्त को पड़ रहा है।