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बालू माफिया ने नहर की धारा मोड़ी
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Sat, 20 Feb 2016 12:05 AM IST
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खनन माफिया के सामने नदियां ही नहीं अब नहरों की भी
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धार कुंद होने लगी हैं। खनन माफिया ने जेसीबी लगाकर नहर से हजारों
ट्रैक्टर-ट्राली बालू का खनन कर लिया। नहर विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक
चुप्पी साधे हुए हैं, वहीं क्षेत्र में करीब एक हजार हेक्टेयर में बोई गई
गेहूं की फसल में पानी के लाले पड़ गए है।
बालू माफिया ने नहर की धारा को ही मोड़ दिया है। इस समय वैसे भी नहर में पानी कम है। ऐसे में खनन माफिया ने जेसीबी लगाकर बालू का जबरदस्त खनन कर रहे हैं, जिससे नहर में बड़े-बड़े गड्ढे हो जाने के चलते जितना भी पानी नहर में है वह आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इतना ही नहीं खनन के कारण नहर के पानी के बहाव की धारा भी मुड़ गई है।
इस नहर से करीब एक हजार हेक्टेयर की खेती की सिंचाई होती है। इस समय खेतों पर गेहूं की फसल खड़ी है, जिसमें पानी लगाने का समय है। किसान नहर के पानी की तरफ टकटकी लगाकर देख रहा है, पर नहरों में पानी नाम मात्र का ही बह रहा है। किसी तरह खेतों तक पानी ले जाने की व्यवस्था किसान कर रहे हैं, पर उसमें भी खनन माफियाओं ने नहर की धारा को ही मोड़ दिया है।
माइनर सूखे पड़े हैं। खनन के कारण नहर में बड़े बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिसके कारण नहर के पानी का बहाव ही आगे नहीं बढ़ पा रहा है। करीब एक महीने से चल रहे खनन पर अभी तक किसी भी अधिकारी की नजर नहीं पड़ी है। कुछ लोगों की मानें तो सारा खेल पुलिस की सेटिंग से चल रहा है।
किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हुआ है। उधर, किसान बनवासी सिंह ने बताया कि खनन होने से नहर में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिनसे पानी आगे ही नहीं बढ़ रहा है। कहा कि अगर नहर पूरी चढ़ती भी है, तब भी खनन से किनारे कट जाने से बहाव धीमा हो जाएगा और माइनर में टल तक पानी पहुंचने में दिक्कत होगी।
किसान धनवीर सिंह ने कहा कि इस समय गेहूं की फसल में पानी की बहुत जरूरत है, इसलिए ऐसे में नहर के पानी पर हम लोग आस लगाए थे। पानी भी कम है और उसमें खनन के कारण वह पानी भी आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
बालू माफिया ने नहर की धारा को ही मोड़ दिया है। इस समय वैसे भी नहर में पानी कम है। ऐसे में खनन माफिया ने जेसीबी लगाकर बालू का जबरदस्त खनन कर रहे हैं, जिससे नहर में बड़े-बड़े गड्ढे हो जाने के चलते जितना भी पानी नहर में है वह आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इतना ही नहीं खनन के कारण नहर के पानी के बहाव की धारा भी मुड़ गई है।
इस नहर से करीब एक हजार हेक्टेयर की खेती की सिंचाई होती है। इस समय खेतों पर गेहूं की फसल खड़ी है, जिसमें पानी लगाने का समय है। किसान नहर के पानी की तरफ टकटकी लगाकर देख रहा है, पर नहरों में पानी नाम मात्र का ही बह रहा है। किसी तरह खेतों तक पानी ले जाने की व्यवस्था किसान कर रहे हैं, पर उसमें भी खनन माफियाओं ने नहर की धारा को ही मोड़ दिया है।
माइनर सूखे पड़े हैं। खनन के कारण नहर में बड़े बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिसके कारण नहर के पानी का बहाव ही आगे नहीं बढ़ पा रहा है। करीब एक महीने से चल रहे खनन पर अभी तक किसी भी अधिकारी की नजर नहीं पड़ी है। कुछ लोगों की मानें तो सारा खेल पुलिस की सेटिंग से चल रहा है।
किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हुआ है। उधर, किसान बनवासी सिंह ने बताया कि खनन होने से नहर में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिनसे पानी आगे ही नहीं बढ़ रहा है। कहा कि अगर नहर पूरी चढ़ती भी है, तब भी खनन से किनारे कट जाने से बहाव धीमा हो जाएगा और माइनर में टल तक पानी पहुंचने में दिक्कत होगी।
किसान धनवीर सिंह ने कहा कि इस समय गेहूं की फसल में पानी की बहुत जरूरत है, इसलिए ऐसे में नहर के पानी पर हम लोग आस लगाए थे। पानी भी कम है और उसमें खनन के कारण वह पानी भी आगे नहीं बढ़ पा रहा है।