फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kannauj News ›   Rare idols made foreigners admirers of craftsmanship

दुर्लभ मूर्तियों ने विदेशियों को बनाया शिल्पकारी का मुरीद

Thu, 11 Nov 2021 11:48 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 11 Nov 2021 11:48 PM IST
विज्ञापन
Rare idols made foreigners admirers of craftsmanship
प्रतिहार काल की मां सप्त मातृका की दुर्लभ मूर्ति। - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। कन्नौज अतुल्य धरोहरों और इतिहास को अपने अंदर समेटे है। राजकीय पुरातत्व संग्रहालय में रखीं दुर्लभ मूर्तियां यहां के प्रतापी राजाओं की शौर्यगाथा और अति प्राचीन शिल्पकारी को बयां कर रही हैं। संग्रहालय में स्थापित तीन मूर्तियों ने विदेशों में अतुल्य विरासत का परिचय दिया है। अन्नपूर्णा की मूर्ति भारत आने पर देश की शिल्पकारी की फिर से चर्चा होने लगी है।
विज्ञापन

शहर के मकरंदनगर के राजकीय पुरातत्व संग्रहालय में स्थापति सप्त मातृका मूर्ति, अर्द्धनारीश्वर और सजावटी पट्टिका, युगल (यक्ष) मूर्ति देश की अति दुर्लभ मूर्तियों में हैं। यह लगभग 12 साल पूर्व आठवीं से नौवीं शताब्दी में प्रतिहार काल में विलुप्त बलुआ पत्थर पर उकेरी गई थीं। इतिहासकारों के अनुसार महमूद गजनी ने आक्रमण किया था। तब कन्नौज में उसने सभी मूर्तियों को नष्ट कर दिया था। आज भी कई विशाल मूर्तियां खंडित हालत में संग्रहालय में हैं। महमूद गजनी से बचाने के लिए इन्हें जमीन में छिपा दिया गया था। इससे आज भी शहर में प्राचीन मूर्तियों के निकलने का सिलसिला जारी है। कई दुर्लभ मूर्तियां खुदाई के समय मिली हैं।
विज्ञापन

संग्रहालय में वीथिका परिचय के पद पर तैनात प्रदीप कुमार ने बताया कि सप्त मातृका मूर्ति, युगल (यक्ष) और अर्धनारीश्वर दुर्लभ मूर्तियाें में हैं। वर्ष 1985 में वाशिंगटन (अमेरिका) में आयोजित दुर्लभ मूर्ति महोत्सव में भारत सरकार की ओर से इन्हें भेजा गया था। यहां कई देशों के नागरिकों ने मूर्ति को गहराई से परखा। भारत की अतुल्य शिल्पकारी की सराहना की। इसके बाद इन मूर्तियों को 1990 में यूनेस्को की ओर से आयोजित न्यूयार्क प्रदर्शनी में भेजा गया। 2012 में सप्त मातृका, अर्धनारीश्वर और सजावटी पट्टिका को बेल्जियम एक साथ भेजा गया गया था। तीनों मूर्तियों ने अतीत की खुशहाली, समृद्धि और ईश्वरीय प्रेम की गाथा बयां कर लोगों को भारत में अनोखी शिल्पकारी का हुनर मानने के लिए विवश कर दिया था। पुरातत्व संग्रहालय अध्यक्ष दीपक कुमार बताते हैं कि दुर्लभ मूर्तियां ऐतिहासिक नगरी का प्रमाण दे रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

सप्त मातृका मूर्ति
सप्त मातृका मूर्ति में एक साथ सात देवियों की मूर्तियां थीं। मौजूदा समय मां वैष्णवी देवी, मां वाराही देवी, मां इंद्राणी देवी और मां चामुंडा का अंकन है। महमूद गजनी की सेना ने इस मूर्ति में से मां माहेश्वरी, मां कौमारी और मां ब्रह्माणी को नष्ट कर दिया। मान्यता के अनुसार एक साथ सातों देवियों की पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है। देश में अब सप्त मातृका मूर्तियां गिनी चुनी देखने को मिलती हैं। यह मूर्ति 1981 में बाबा हाजी मोहल्ला में मकान की नींव खुदाई के दौरान शमीम को मिली थी। उसने छिपा लिया था। चर्चा होने पर पूर्व में तैनात सीओ विनोद शर्मा ने पुलिस बल के साथ घर से बरामद की थी।
अर्धनारीश्वर की मूर्ति
अर्धनारीश्वर की मूर्ति प्राचीन शिल्पकारी का अनोखा नमूना है। इस तरह की मूर्तियां उज्जैन और अजंता-एलोरा की गुफाओं में देखने को मिलती हैं। इस मूर्ति के एक तरफ अर्धनारीश्वर के रूप में भगवान शिव और माता पार्वती हैं। दूसरी तरफ माता लक्ष्मी का चित्र उकेरा गया है। शिल्पकारों ने कला कृतियां उकेरी हैं। मूर्ति बलुआ पत्थर की है। अब यह पत्थर देश में नहीं पाया जाता है। यह मूर्ति 1978 में नगर पालिका में तैनात सफाई कर्मचारी रामचंद्र वाल्मीकि को दिवाली पर घर की पुताई के लिए किले पर मिट्टी खोदते समय मिली थी। प्रशासन ने इस मूर्ति को पुरातत्व विभाग को सौंप दिया था।

सजावट पट्टिका
सजावट पट्टिका शिलालेख और बारीक आकृति की शानदार ऐतिहासिक कला की प्रस्तुति है। यह राजाओं के महलों की दीवारों और दरवाजों पर साज सज्जा प्रदर्शित करने के लिए लगाई जाती है। काफी शोध के बाद भी सजावट पट्टिका के पत्थर या धातु के बारे में स्पष्ट नहीं हो सका। अन्य पत्थरों की अपेक्षा आकार बड़ा होने के बाद भी इसका वजन बेहद कम है। न्यूयार्क में इस पट्टिका को खरीदने के लिए भारत सरकार से पेशकश की गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed