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Kannauj News: बूंदाबांदी और बादलों ने बढ़ाई आलू किसानों की चिंता
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कन्नौज। जिले में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने आलू किसानों की नींद उड़ा दी है। सुबह से ही आसमान में छाए काले बादलों और रुक-रुक कर हो रही हल्की बूंदाबांदी ने तैयार खड़ी और खोदी गई आलू की फसल के लिए संकट खड़ा कर दिया है। मार्च के उत्तरार्ध में इस बेमौसम बदलाव को आलू की गुणवत्ता और भंडारण के लिए बेहद घातक माना जा रहा है। अधिकतम तापमान 28.2 डिग्री व न्यूनतम तापमान 14.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
वर्तमान में कन्नौज के अधिकांश क्षेत्रों में आलू की खुदाई का काम जोरों पर है। जिले के करीब 55 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में आलू की खेती होती है। सोमवार सुबह को हुई हल्की फुहारों से तापमान में 0.2 से 0.4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। खेतों में नमी बढ़ने के कारण आलू की खुदाई का काम ठप पड़ गया है। जो आलू खेतों में निकलकर बाहर पड़ा है, उसके गीला होने से सड़ने और काला पड़ने की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि एक तरफ खराब बीज और बढ़ती लागत ने पहले ही परेशान कर रखा था। वहीं, अब मौसम की मार ने कमर तोड़ दी है। आलू उत्पादक किसानों का कहना है कि इस समय खेतों में आलू की खोदाई का कार्य तेजी से चल रहा है और लगभग 70 प्रतिशत खोदाई पूरी हो चुकी है। अब फसल अंतिम चरण में है। ऐसे में यदि तेज बारिश हो जाती है तो जमीन में पड़े आलू सड़ने का खतरा बढ़ जाएगा। वहीं, जो आलू पहले ही खेतों से निकालकर बाहर रखा गया है, वह भी खराब हो सकता है।
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वर्तमान में कन्नौज के अधिकांश क्षेत्रों में आलू की खुदाई का काम जोरों पर है। जिले के करीब 55 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में आलू की खेती होती है। सोमवार सुबह को हुई हल्की फुहारों से तापमान में 0.2 से 0.4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। खेतों में नमी बढ़ने के कारण आलू की खुदाई का काम ठप पड़ गया है। जो आलू खेतों में निकलकर बाहर पड़ा है, उसके गीला होने से सड़ने और काला पड़ने की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि एक तरफ खराब बीज और बढ़ती लागत ने पहले ही परेशान कर रखा था। वहीं, अब मौसम की मार ने कमर तोड़ दी है। आलू उत्पादक किसानों का कहना है कि इस समय खेतों में आलू की खोदाई का कार्य तेजी से चल रहा है और लगभग 70 प्रतिशत खोदाई पूरी हो चुकी है। अब फसल अंतिम चरण में है। ऐसे में यदि तेज बारिश हो जाती है तो जमीन में पड़े आलू सड़ने का खतरा बढ़ जाएगा। वहीं, जो आलू पहले ही खेतों से निकालकर बाहर रखा गया है, वह भी खराब हो सकता है।
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