{"_id":"6acbd656eff78aabf6080710","slug":"rain-snatched-away-the-homes-of-76-families-kannauj-news-c-214-1-knj1008-157605-2026-10-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kannauj News: बारिश ने 76 परिवारों का छीना आशियाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kannauj News: बारिश ने 76 परिवारों का छीना आशियाना
विज्ञापन
कन्नौज। सितंबर में 440 मिलीमीटर हुई बारिश गरीब परिवारों के लिए आफत बन गई। जिले की तीनों तहसीलों में 76 से अधिक परिवारों के कच्चे मकान और झोपड़ियां ढह गईं। आशियाना उजड़ने के बाद कुछ परिवार पॉलिथीन और तिरपाल के सहारे जीवन यापन करने को मजबूर हैं तो कुछ पास पड़ोसियों के घरों में रात गुजार रहे हैं। शासन स्तर पर प्रभावित परिवारों की जांच कर आपदा राहत राशि और आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही है। अभी तक अधिकांश गांवों में घरगिरी की जांच ही पूरी नहीं हो सकी है। लेखपाल और ग्राम पंचायत सचिवों की लापरवाही से सर्वे कार्य अधूरा पड़ा है। लेखपालाें की हड़ताल का असर भी बेघरों को आवास दिलाने में बाधा बन रही है।
दृश्य एक:
फोटो :30: खुले आसमान के नीचे रह रहा परिवार। संवाद
आवास तो दूर नहीं मिली आर्थिक सहायता
ठठिया। ककरघटा गांव निवासी बृजेश कुमार की पत्नी गुड्डी देवी ने बताया कि बारिश के दौरान कच्ची कोठरी अचानक भरभराकर गिर गई थी। परिवार पड़ोसी के घर में रहने को मजबूर है। लंबे समय से परिवार आवास योजना और आर्थिक सहायता की उम्मीद लगाए है। अब तक उसे कोई मदद नहीं मिल सकी है।
दृश्य दो:
फोटो :31: बरसात में गिरा मकान। संवाद
गांव के बाहर आबादी में रहने को मजबूर
गुरसहायगंज। ग्राम तेराजाकेट निवासी सुशील कठेरिया ने बताया कि बरसात में मकान गिरने के बाद रहने की समस्या खड़ी हो गई है। गांव के बाहर आबादी में रह रहे भाई बलवीर के पास गुजर कर रहे हैं। गांव के राम नारायन कठेरिया भी गांव के बाहर आबादी में रहने वाले बेटे के पास रहने चले गए। वहीं, राजेश कठेरिया का कमरा गिरने के बाद दरवाजे के बाहर लेटता है। बरसात होने पर भाई अरविंद के कमरे में लेटने चला जाता है। सामान भी भाई के यहां रख दिया है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -
दृश्य तीन:
फोटो :32: खाली पड़ा बरसात में गिरा मकान। संवाद
भरण पोषण और सिर छुपाने का संकट
मानीमऊ। क्षेत्र के मियांगंज निवासी राकेश राठौर का कच्चा मकान गिर गया। मलबे में गृहस्थी का सामान व अनाज दबकर नष्ट हो गया। पीड़ित परिवार के सामने भरण पोषण और सिर छुपाने का संकट पैदा हो गया। अभी तक पीड़ित परिवार को सरकारी आर्थिक मदद नहीं मिल सकी।
-- -- -- -- -- -- --
दृश्य चार:
फोटो :33: मोहल्ला बजरिया में ढहा पंकज दुबे का कच्चा मकान। संवाद
अभी तक आवास या मुआवजा नहीं मिला
छिबरामऊ। नगर के मोहल्ला बजरिया निवासी पंकज दुबे का पुश्तैनी कच्चे मकान की छत बारिश में ढह गई। कमरे में रखा गृहस्थी सामान मलबे में दबकर नष्ट हो गया, अभी तक आवास दिलाए जाने या नुकसान के मुआवजे के बारे में कोई आश्वासन नहीं दिया गया।
-- -- -- -- --
दृश्य पांच :
फोटो :34: भौंराजपुर में ढहे मकान को देखती सरला चतुर्वेदी। संवाद
कोई सहायता नहीं मिल सकी
छिबरामऊ। ग्राम भौंराजपुर में सरला चतुर्वेदी का घर बारिश से ढह गया। परिवार के लोग बाल-बाल बच गए, पीड़ित महिला को आवास व मुआवजे का आश्वासन दिया गया, अभी तक कोई सहायता नहीं मिल सकी।
दो साल में गई दो बच्चों की जान, नहीं मिला मुआवजा
ठठिया क्षेत्र के ग्राम तारापुर में दो सितंबर की दोपहर बारिश के चलते दिलीप कुमार की पक्की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। मलबे में पड़ोसी सोहल (14) की दबकर मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि पिछले साल कच्ची दीवार गिरने से सोहल की बड़ी बहन अलशिफा (15) की मौत हो गई थी। रिपोर्ट भेजे जाने के बावजूद अब तक आर्थिक सहायता नहीं मिली। परिवार ने आर्थिक मदद व आवास की मांग की है।
वर्जन
तीनों तहसीलों में बारिश से गिरे कच्चे मकानों की जांच कराई जा रही है। डूडा व पीडी डीआरडीए को पात्रों को आवास योजना का लाभ देने के लिए निर्देशित किया गया है।
-देवेंद्र सिंह, एडीएम
विज्ञापन
दृश्य एक:
फोटो :30: खुले आसमान के नीचे रह रहा परिवार। संवाद
आवास तो दूर नहीं मिली आर्थिक सहायता
ठठिया। ककरघटा गांव निवासी बृजेश कुमार की पत्नी गुड्डी देवी ने बताया कि बारिश के दौरान कच्ची कोठरी अचानक भरभराकर गिर गई थी। परिवार पड़ोसी के घर में रहने को मजबूर है। लंबे समय से परिवार आवास योजना और आर्थिक सहायता की उम्मीद लगाए है। अब तक उसे कोई मदद नहीं मिल सकी है।
विज्ञापन
दृश्य दो:
फोटो :31: बरसात में गिरा मकान। संवाद
गांव के बाहर आबादी में रहने को मजबूर
गुरसहायगंज। ग्राम तेराजाकेट निवासी सुशील कठेरिया ने बताया कि बरसात में मकान गिरने के बाद रहने की समस्या खड़ी हो गई है। गांव के बाहर आबादी में रह रहे भाई बलवीर के पास गुजर कर रहे हैं। गांव के राम नारायन कठेरिया भी गांव के बाहर आबादी में रहने वाले बेटे के पास रहने चले गए। वहीं, राजेश कठेरिया का कमरा गिरने के बाद दरवाजे के बाहर लेटता है। बरसात होने पर भाई अरविंद के कमरे में लेटने चला जाता है। सामान भी भाई के यहां रख दिया है।
विज्ञापन
दृश्य तीन:
फोटो :32: खाली पड़ा बरसात में गिरा मकान। संवाद
भरण पोषण और सिर छुपाने का संकट
मानीमऊ। क्षेत्र के मियांगंज निवासी राकेश राठौर का कच्चा मकान गिर गया। मलबे में गृहस्थी का सामान व अनाज दबकर नष्ट हो गया। पीड़ित परिवार के सामने भरण पोषण और सिर छुपाने का संकट पैदा हो गया। अभी तक पीड़ित परिवार को सरकारी आर्थिक मदद नहीं मिल सकी।
दृश्य चार:
फोटो :33: मोहल्ला बजरिया में ढहा पंकज दुबे का कच्चा मकान। संवाद
अभी तक आवास या मुआवजा नहीं मिला
छिबरामऊ। नगर के मोहल्ला बजरिया निवासी पंकज दुबे का पुश्तैनी कच्चे मकान की छत बारिश में ढह गई। कमरे में रखा गृहस्थी सामान मलबे में दबकर नष्ट हो गया, अभी तक आवास दिलाए जाने या नुकसान के मुआवजे के बारे में कोई आश्वासन नहीं दिया गया।
दृश्य पांच :
फोटो :34: भौंराजपुर में ढहे मकान को देखती सरला चतुर्वेदी। संवाद
कोई सहायता नहीं मिल सकी
छिबरामऊ। ग्राम भौंराजपुर में सरला चतुर्वेदी का घर बारिश से ढह गया। परिवार के लोग बाल-बाल बच गए, पीड़ित महिला को आवास व मुआवजे का आश्वासन दिया गया, अभी तक कोई सहायता नहीं मिल सकी।
दो साल में गई दो बच्चों की जान, नहीं मिला मुआवजा
ठठिया क्षेत्र के ग्राम तारापुर में दो सितंबर की दोपहर बारिश के चलते दिलीप कुमार की पक्की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। मलबे में पड़ोसी सोहल (14) की दबकर मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि पिछले साल कच्ची दीवार गिरने से सोहल की बड़ी बहन अलशिफा (15) की मौत हो गई थी। रिपोर्ट भेजे जाने के बावजूद अब तक आर्थिक सहायता नहीं मिली। परिवार ने आर्थिक मदद व आवास की मांग की है।
वर्जन
तीनों तहसीलों में बारिश से गिरे कच्चे मकानों की जांच कराई जा रही है। डूडा व पीडी डीआरडीए को पात्रों को आवास योजना का लाभ देने के लिए निर्देशित किया गया है।
-देवेंद्र सिंह, एडीएम