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Kannauj News: ट्रामा सेंटर में विवादित आउटसोर्सिंग भर्ती की जांच तेज
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कन्नौज। जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में विवादित आउटसोर्सिंग भर्ती की जांच बुधवार से फिर से तेज हो गई है। यह भर्ती शासन से अनुमोदन लिए बिना किए जाने के आरोपों से घिरी है। डीएम के निर्देश पर गठित जांच टीम जिला अस्पताल पहुंची और अभिलेखों की पड़ताल की।
सीएमओ डॉ. विकास चंद्रा और एसीएमओ डॉ. केपी त्रिपाठी ने सीएमएस डॉ. गोपाल नारायण द्विवेदी के साथ दस्तावेज की जांच की। ट्रामा सेंटर में नर्सिंग अटेंडेंट के नौ पदों पर आउटसोर्सिंग भर्ती की गई थी। आरोप है कि इस भर्ती के लिए शासन से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त नहीं था। तत्कालीन प्रभारी सीएमएस डॉ. अशोक प्रियदर्शी के कार्यकाल में ये नियुक्तियां हुई थीं। भर्ती प्रक्रिया में सूचना के सीमित प्रसार और पारदर्शिता पर सवाल उठे थे। शिकायतें मिलने के बाद इस मामले की जांच शुरू की गई थी। सेवा प्रदाता कंपनी को तीन नोटिस भेजे जा चुके हैं लेकिन उसका प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। अब कंपनी को अंतिम नोटिस जारी किया जाएगा, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई होगी।
जांच की दिशा और सामने आ रहे तथ्यों से भर्ती निरस्त होना लगभग तय माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, अनुमोदन और प्रक्रिया संबंधी खामियों की पुष्टि हुई है। इन खामियों के आधार पर भर्ती को पूरी तरह निरस्त करने की संस्तुति की जा सकती है। डॉ. केपी त्रिपाठी ने बताया कि अनुमोदन न लिए जाने की बात सामने आ रही है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया की जांच तेज होने से संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की बेचैनी बढ़ गई है। जिला अस्पताल में इस मामले को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। जांच का दायरा केवल भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। उस समय भर्ती से जुड़े अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है। सभी की नजरें जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं कि किसकी भूमिका सामने आएगी और किस पर कार्रवाई होगी।
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सीएमओ डॉ. विकास चंद्रा और एसीएमओ डॉ. केपी त्रिपाठी ने सीएमएस डॉ. गोपाल नारायण द्विवेदी के साथ दस्तावेज की जांच की। ट्रामा सेंटर में नर्सिंग अटेंडेंट के नौ पदों पर आउटसोर्सिंग भर्ती की गई थी। आरोप है कि इस भर्ती के लिए शासन से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त नहीं था। तत्कालीन प्रभारी सीएमएस डॉ. अशोक प्रियदर्शी के कार्यकाल में ये नियुक्तियां हुई थीं। भर्ती प्रक्रिया में सूचना के सीमित प्रसार और पारदर्शिता पर सवाल उठे थे। शिकायतें मिलने के बाद इस मामले की जांच शुरू की गई थी। सेवा प्रदाता कंपनी को तीन नोटिस भेजे जा चुके हैं लेकिन उसका प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। अब कंपनी को अंतिम नोटिस जारी किया जाएगा, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई होगी।
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जांच की दिशा और सामने आ रहे तथ्यों से भर्ती निरस्त होना लगभग तय माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, अनुमोदन और प्रक्रिया संबंधी खामियों की पुष्टि हुई है। इन खामियों के आधार पर भर्ती को पूरी तरह निरस्त करने की संस्तुति की जा सकती है। डॉ. केपी त्रिपाठी ने बताया कि अनुमोदन न लिए जाने की बात सामने आ रही है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया की जांच तेज होने से संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की बेचैनी बढ़ गई है। जिला अस्पताल में इस मामले को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। जांच का दायरा केवल भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। उस समय भर्ती से जुड़े अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है। सभी की नजरें जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं कि किसकी भूमिका सामने आएगी और किस पर कार्रवाई होगी।
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