फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kannauj News ›   Plants planted unseen dried up

अनदेखी से सूख गए रोपे गए पौधे

Sun, 11 Jul 2021 11:18 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 11 Jul 2021 11:18 PM IST
विज्ञापन
Plants planted unseen dried up
तालग्राम। ब्लाक इलाके में एक से सात जुलाई तक वन महोत्सव कार्यक्रम के तहत लगाए गए ज्यादातर पौधे सूख गए हैं। वजह इनकी देखरेख न होना रहा। इन पौधों को न तो वक्त पर पानी दिया गया और न ही मवेशियों से बचाने के इंतजाम किए गए। कागजों पर यह भले ही जिम्मेदारों को हरे भरे दिख रहे हों, अमर उजाला की पड़ताल में यह सूखे, मुरझाए और दम तोड़ चुकने वाली हालत में मिले।
विज्ञापन

ब्लाक इलाके को हरा-भरा रखने की कवायद औंधे मुंह है। पौधरोपण के दौरान इन्हें बचाने, देखरेख करने का संकल्प दिलाया गया था। कैमरों के फ्लैश चमके थे। सोशल मीडिया पर वाहवाही लूटी गई। बाद में इनकी ओर पलट कर कि सी ने नहीं देखा। नतीजा यह सूख गए।
विज्ञापन

वन महोत्सव के दौरान एक लाख 46 हजार 937 पौधे रोपे जाने का दावा किया गया था। बजट भरा पूरा था। यह खपा दिया गया। निपटा कुछ नहीं। वहीं बीडीओ उपेंद्रनाथ खरवार का कहना है कि ब्लाक में एक लाख 46 हजार 937 पौधे रोपे गए हैं। इनकी देखभाल की जिम्मेदारी पंचायतों की है। सूखे पौधों की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो जांच कराई जाएगी। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन

वन महोत्सव के तहत चार जुलाई को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तालग्राम में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. कुमारिल मैत्रेय ने कर्मचारियों के सहयोग से सैकड़ों पौधे रोपे थे। इन्हें सुरक्षित रखने का संकल्प भी लिया गया था। यह पौधे पांच दिन में सूख गए। प्रभारी चिकित्साधिकारी ने बताया कि वन विभाग से पौधे सही नहीं मिलते हैं। लगाने के बाद आधे ही चल पाते हैं।
नगर पंचायत की ओर से पर्यावरण दिवस पर स्कूलों, मदरसों, सार्वजनिक जगहों पर हजारों की तादाद में पौधे लगाए गए थे। इनकी सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया। इससे ज्यादातर सूख गए या मवेशी खा गए। इससे पर्यावरण संरक्षण और हरियाली रखने का मंसूबा धड़ाम हो गया। इन पौधों के अब हरे भरे होने की गुंजाइश भी न के बराबर लग रही है।
थाना परिसर में प्रभारी कृष्णलाल पटेल ने स्टाफ के साथ पौधे रोपे थे। तब इनकी देखरेख करना तय किया गया था। पौधों की देखरेख ढंग से नहीं हुई। पानी भी नहीं मिला। इससे ज्यादातर सूख गए। अब इनके डंठल ही दिखते हैं। कुछ पौधे लगातार मुरझा रहे हैं। इनकी देखरेख हो तो यह बच सकते हैं। किसी को इसकी फुर्सत ही नहीं है।
आगरा- लखनऊ एक्सप्रेसवे की ग्रीन बेल्ट में पिछले साल पौधरोपण अभियान चलाया गया था। तब 50 हजार पौधे रोपे गए। इस साल भी पांच हजार पौधे (एनसीसी) नागार्जुन कंट्रक्शन कंपनी लिमिटेड ने पैकेज तीन में रोपे थे। कंपनी के जिम्मेदार इन्हें पानी देना भूल गए। इससे यह पौधे सूख गए। अब इनके डंठल ही बचे हैं।

पंचायत की ओर से महानगर कंपोजिट विद्यालय परिसर में भी पौधे रोपे गए थे। यहां भी इन्हें पानी नहीं मिला। इनकी देखरेख भी नहीं हो सकी। इससे यह पौधे सूख गए। इस ओर पंचायत के प्रधान, सचिव व स्कूल के प्रधान अध्यापक ने भी ध्यान नहीं दिया। इससे यह पौधे नहीं बचे। बजट होम होने के बाद भी हरियाली सपना बनकर रह गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed