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पालीथिन प्रतिबंध पहले दिन ही धड़ाम
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Fri, 22 Jan 2016 12:10 AM IST
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प्रदेश सरकार की ओर से पालीथिन पर लगाई गई पाबंदी का
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असर पहले दिन नजर नहीं आया। जिला मुख्यालय पर ही धड़ल्ले से पालीथिन का
प्रयोग होता नजर आया। ठेली से लेकर पक्की दुकानों तक के दुकानदारों ने
सामान की बिक्री दुकानों में की, वहीं ग्राहक भी खुलेआम पालीथिन में सामान
ले जाते नजर आए।
वहीं तमाम दुकानदारों ने तो प्रतिबंध की जानकारी न होने की बात बताई। शासन द्वारा गुरुवार से पालीथिन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की गई थी, पर स्थानीय स्तर पर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं हो सका। चेतावनी जारी करने की प्रक्रिया भी कहीं पर होती नजर नहीं आई।
वहीं ज्यादातर छोटे दुकानदारों ने खुलेआम ठेलियों पर पालीथिन को रखकर आलू, सब्जी, अंडे, किराने का सामान, मूंगफली की बिक्री की। रोडवेज बस स्टैंड से लेकर तिर्वा क्रासिंग, मकरंदनगर, शहर के लाखन चौराहा, बड़ा बाजार, सब्जी मंडी, अजयपाल रोड में भी पालीथिन धड़ल्ले से इस्तेमाल होते दिखी।
दुकानदार अनिल वैश्य का कहना है कि जिन दुकानदारों के पास थोक या फुटकर में पालीथिन रखी हुई है, वही इस्तेमाल कर रहे हैं। अब मार्केट में पालीथिन बाहर से नहीं आ रही है। कहा कि स्टाक जब तक रहेगा, तब तक पालीथिन का इस्तेमाल होता रहेगा।
किराना व्यवसायी पप्पू बाथम का कहना है कि उन्होंने कागज के लिफाफे में किराने का सामान देना शुरू कर दिया है। कुछ बडे़ लिफाफों का भी आर्डर दे दिया है। दुकानदारों के पास जो पालीथिन के थैले बचे हैं, उन्हें अभी इस्तेमाल कर रहे हैं। कहा कि जब फैक्ट्रियों से ही माल नहीं आएगा तो इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाएगा।
अमोलर के दुकानदार दिनेश चंद्र ने बताया कि पालीथिन एकाएक बंद होने से दुकानदारों को नुकसान होगा। कागज के लिफाफे में अधिक वजन का सामान नहीं तौला जा सकेगा। किराना दुकानदार लोकेश कुमार ने कहा कि ग्राहक खुद ही पालीथिन मांगते हैं। सरकार को इस मुद्दे पर सोचना चाहिए।
पप्पू सक्सेना ने कहा कि सरकार का कदम सराहनीय है। धीरे-धीरे झोला लेकर आने की आदत पड़ जाएगी। गुलाम रसूल का कहना है कि पालीथिन के प्रयोग बंद होने से दिक्कतें ज्यादा हैं। सरकार को इसके निस्तारण को वैकल्पिक रास्ते तलाशने चाहिए।
उधर, पालिका ईओ बीडी भट्ट ने बताया कि शहर के मोहल्ला सरायमीरा, जीटी रोड, अशोक नगर में पालीथिन की रोकथाम के लिए दुकानों का शुक्रवार को निरीक्षण किया गया। दुकानदारों, ठेला, ठेली वालों को जानकारी भी दी कि प्रदेश शासन ने पालीथिन की थैलियों का प्रयोग, उत्पादन पर प्रतिबंध लगा दिया है।
गुरुवार से पालीथिन की बिक्री आदि पर कानूनी रोग लग गई है और जो भी दुकानदार, ठेला, ठेली व्यापारी पालीथिन की थैलियों का प्रयोग करते मिलेगा उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होगी। कहा कि नए कानून के मुताबिक पालीथिन के प्रयोग करते समय पकड़े जाने पर या दुकान से पालीथिन की थैलियां बरामद होने पर अधिकतम पांच साल का कठोर कारावास व एक लाख रुपये नगद जुर्माना भी हो सकता है।
ईओ ने बताया कि सामग्री आदि खरीदने को पूर्व की भांति थैले का प्रयोग करें। पालीथिन की रोकथाम के लिए पालिका का सहयोग करें। सफाई निरीक्षक व सफाई नायकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे जनता को पालीथिन पर लगे प्रबंध की जानकारी दें।
वहीं तमाम दुकानदारों ने तो प्रतिबंध की जानकारी न होने की बात बताई। शासन द्वारा गुरुवार से पालीथिन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की गई थी, पर स्थानीय स्तर पर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं हो सका। चेतावनी जारी करने की प्रक्रिया भी कहीं पर होती नजर नहीं आई।
वहीं ज्यादातर छोटे दुकानदारों ने खुलेआम ठेलियों पर पालीथिन को रखकर आलू, सब्जी, अंडे, किराने का सामान, मूंगफली की बिक्री की। रोडवेज बस स्टैंड से लेकर तिर्वा क्रासिंग, मकरंदनगर, शहर के लाखन चौराहा, बड़ा बाजार, सब्जी मंडी, अजयपाल रोड में भी पालीथिन धड़ल्ले से इस्तेमाल होते दिखी।
दुकानदार अनिल वैश्य का कहना है कि जिन दुकानदारों के पास थोक या फुटकर में पालीथिन रखी हुई है, वही इस्तेमाल कर रहे हैं। अब मार्केट में पालीथिन बाहर से नहीं आ रही है। कहा कि स्टाक जब तक रहेगा, तब तक पालीथिन का इस्तेमाल होता रहेगा।
किराना व्यवसायी पप्पू बाथम का कहना है कि उन्होंने कागज के लिफाफे में किराने का सामान देना शुरू कर दिया है। कुछ बडे़ लिफाफों का भी आर्डर दे दिया है। दुकानदारों के पास जो पालीथिन के थैले बचे हैं, उन्हें अभी इस्तेमाल कर रहे हैं। कहा कि जब फैक्ट्रियों से ही माल नहीं आएगा तो इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाएगा।
अमोलर के दुकानदार दिनेश चंद्र ने बताया कि पालीथिन एकाएक बंद होने से दुकानदारों को नुकसान होगा। कागज के लिफाफे में अधिक वजन का सामान नहीं तौला जा सकेगा। किराना दुकानदार लोकेश कुमार ने कहा कि ग्राहक खुद ही पालीथिन मांगते हैं। सरकार को इस मुद्दे पर सोचना चाहिए।
पप्पू सक्सेना ने कहा कि सरकार का कदम सराहनीय है। धीरे-धीरे झोला लेकर आने की आदत पड़ जाएगी। गुलाम रसूल का कहना है कि पालीथिन के प्रयोग बंद होने से दिक्कतें ज्यादा हैं। सरकार को इसके निस्तारण को वैकल्पिक रास्ते तलाशने चाहिए।
उधर, पालिका ईओ बीडी भट्ट ने बताया कि शहर के मोहल्ला सरायमीरा, जीटी रोड, अशोक नगर में पालीथिन की रोकथाम के लिए दुकानों का शुक्रवार को निरीक्षण किया गया। दुकानदारों, ठेला, ठेली वालों को जानकारी भी दी कि प्रदेश शासन ने पालीथिन की थैलियों का प्रयोग, उत्पादन पर प्रतिबंध लगा दिया है।
गुरुवार से पालीथिन की बिक्री आदि पर कानूनी रोग लग गई है और जो भी दुकानदार, ठेला, ठेली व्यापारी पालीथिन की थैलियों का प्रयोग करते मिलेगा उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होगी। कहा कि नए कानून के मुताबिक पालीथिन के प्रयोग करते समय पकड़े जाने पर या दुकान से पालीथिन की थैलियां बरामद होने पर अधिकतम पांच साल का कठोर कारावास व एक लाख रुपये नगद जुर्माना भी हो सकता है।
ईओ ने बताया कि सामग्री आदि खरीदने को पूर्व की भांति थैले का प्रयोग करें। पालीथिन की रोकथाम के लिए पालिका का सहयोग करें। सफाई निरीक्षक व सफाई नायकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे जनता को पालीथिन पर लगे प्रबंध की जानकारी दें।