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डार्क जोन में नहर की उम्मीद सूखी
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तालग्राम (कन्नौज)। डार्क जोन घोषित तालग्राम और जलालाबाद ब्लॉक के किसानों की फसलों की सिंचाई के लिए नहर निर्माण का काम पांच साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। साढ़े 47 किलोमीटर लंबी इस नहर से दोनों ब्लॉक के हजारों किसानों की फसलों को राहत मिलती। नहर की खुदाई शुरू होने से किसान खुश थे लेकिन तीन साल से काम बंद होने से अब फसलों के साथ उनकी उम्मीदें भी सूखने लगी हैं।
तालग्राम और जलालाबाद ब्लॉक की 30750 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए शासन ने दो मार्च 2015 में नहर निर्माण को मंजूरी दी थी। छिबरामऊ के खोजीपुर तक आई नहर को जलालाबाद ब्लाक के मतौली तक 47.600 किलो मीटर बढ़ाना है। 150 क्यूसेक पानी की क्षमता वाली नहर के लिए 161.35 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। नहर विभाग को 109 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए थे।
विभाग ने काम शुरू करा दिया लेकिन 30 फीसदी काम होने के बाद पैसा खत्म हो गया। इससे वर्ष 2017 से निर्माण कार्य बंद पड़ा है। नहर में सात माइनर और 140 पुलिया बनी हैं, जिसमें केवल 40 पुलिया ही बन पाई हैं। एक्सईएन सिंचाई विभाग पारसनाथ ने बताया कि बजट खत्म होने के कारण काम बंद करना पड़ा। शासन को 52 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। बजट मिलने पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
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रोहली गांव किसान अभय प्रताप सिंह ने बताया कि डार्क जोन होने से बोरिंग कराने की भी अनुमति नहीं है। फसलों की सिंचाई का संकट है। नहर खोदाई की खबर से उम्मीद बंधी थी लेकिन अब नहीं लगता कि नहर बन पाएगी।
पिराडी खेड़ा के किसान प्रदीप राजपूत ने बताया कि नहर के लिए भूमि अधिग्रहण की जा चुकी है। क्षेत्र में सिंचाई के संसाधनों का अभाव है। नहर से बहुत उम्मीद थी लेकिन करीब तीन साल से काम बंद है, अब नहीं लगता कि नहर बन पाएगी।
अचनकापुर गांव के किसान संजय ने बताया कि क्षेत्र में वाटर लेबल बहुत ही नीचे चला गया है। इससे पहले से लगे नलकूप बंद हो गए हैं। नहर और माइनर बन जाएं तो क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ जाए।
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तालग्राम और जलालाबाद ब्लॉक की 30750 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए शासन ने दो मार्च 2015 में नहर निर्माण को मंजूरी दी थी। छिबरामऊ के खोजीपुर तक आई नहर को जलालाबाद ब्लाक के मतौली तक 47.600 किलो मीटर बढ़ाना है। 150 क्यूसेक पानी की क्षमता वाली नहर के लिए 161.35 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। नहर विभाग को 109 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए थे।
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विभाग ने काम शुरू करा दिया लेकिन 30 फीसदी काम होने के बाद पैसा खत्म हो गया। इससे वर्ष 2017 से निर्माण कार्य बंद पड़ा है। नहर में सात माइनर और 140 पुलिया बनी हैं, जिसमें केवल 40 पुलिया ही बन पाई हैं। एक्सईएन सिंचाई विभाग पारसनाथ ने बताया कि बजट खत्म होने के कारण काम बंद करना पड़ा। शासन को 52 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। बजट मिलने पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
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रोहली गांव किसान अभय प्रताप सिंह ने बताया कि डार्क जोन होने से बोरिंग कराने की भी अनुमति नहीं है। फसलों की सिंचाई का संकट है। नहर खोदाई की खबर से उम्मीद बंधी थी लेकिन अब नहीं लगता कि नहर बन पाएगी।
पिराडी खेड़ा के किसान प्रदीप राजपूत ने बताया कि नहर के लिए भूमि अधिग्रहण की जा चुकी है। क्षेत्र में सिंचाई के संसाधनों का अभाव है। नहर से बहुत उम्मीद थी लेकिन करीब तीन साल से काम बंद है, अब नहीं लगता कि नहर बन पाएगी।
अचनकापुर गांव के किसान संजय ने बताया कि क्षेत्र में वाटर लेबल बहुत ही नीचे चला गया है। इससे पहले से लगे नलकूप बंद हो गए हैं। नहर और माइनर बन जाएं तो क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ जाए।