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वेजिटेबल प्लांट में सिंचाई के पानी का संकट
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उमर्दा (कन्नौज)। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल प्लांट में लगे नलकूप का पानी खारा होने से पौध खराब हो रही है। इसका कारण सिंचाई में प्रयोग किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता पौध लायक नहीं है। आरओ प्लांट न होने से कर्मचारी नहर से पानी लाकर पौध विकसित कर रहे हैं। बजट के अभाव में एक आरओ प्लांट भी नहीं लग पा रहा है।
उमर्दा में वर्ष 2018 में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल की स्थापना की गई थी। इसका उद्देश्य किसानों को नई तकनीक की जानकारी देकर फसल की पैदावार बढ़ाना है। इसके लिए केंद्र में आठ करोड़ रुपये लगाकर सुविधाएं विकसित की गईं। पौध की सिंचाई के लिए नलकूप भी लगाया गया है। किंतु नलकूप का पानी खारा होने से सिंचाई करने पर पौध खराब हो जाती है। इससे कर्मचारी तीन किलोमीटर दूर ट्रैक्टर-ट्रॉली में टंकियां रखकर निचली गंगनहर से पानी लाते हैं।
प्लांट के प्रभारी दलगंजन सिंह यादव ने बताया कि नलकूप के पानी की गुणवत्ता खराब है। मृदा का पीएच मान (खारापन) 9.6 के लगभग है जबकि पौध उत्पादन के लिए पीएच मान 7.0 तक होना चाहिए। नलकूप के पानी से सिंचाई करने पर खारापन जमा होने से पौध की जड़ें विकसित नहीं होती हैं। पौध उत्पादन के लिए निचली गंग नहर से पानी मंगाकर सिंचाई की जा रही है। प्लांट पर दो हजार लीटर क्षमता के आरओ प्लांट की आवश्यकता है। बजट न होने से कार्य नहीं हो पा रहा है।
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उमर्दा में वर्ष 2018 में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल की स्थापना की गई थी। इसका उद्देश्य किसानों को नई तकनीक की जानकारी देकर फसल की पैदावार बढ़ाना है। इसके लिए केंद्र में आठ करोड़ रुपये लगाकर सुविधाएं विकसित की गईं। पौध की सिंचाई के लिए नलकूप भी लगाया गया है। किंतु नलकूप का पानी खारा होने से सिंचाई करने पर पौध खराब हो जाती है। इससे कर्मचारी तीन किलोमीटर दूर ट्रैक्टर-ट्रॉली में टंकियां रखकर निचली गंगनहर से पानी लाते हैं।
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प्लांट के प्रभारी दलगंजन सिंह यादव ने बताया कि नलकूप के पानी की गुणवत्ता खराब है। मृदा का पीएच मान (खारापन) 9.6 के लगभग है जबकि पौध उत्पादन के लिए पीएच मान 7.0 तक होना चाहिए। नलकूप के पानी से सिंचाई करने पर खारापन जमा होने से पौध की जड़ें विकसित नहीं होती हैं। पौध उत्पादन के लिए निचली गंग नहर से पानी मंगाकर सिंचाई की जा रही है। प्लांट पर दो हजार लीटर क्षमता के आरओ प्लांट की आवश्यकता है। बजट न होने से कार्य नहीं हो पा रहा है।
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