{"_id":"5f21b5d28ebc3e9fa53cc6fa","slug":"other-kannauj-news-knp5739949104","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहली ही बारिश में बहा 16.78 लाख का चेकडैम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहली ही बारिश में बहा 16.78 लाख का चेकडैम
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बारिस से टूटे चेकडैम के पास खड़े किसान।
- फोटो : KANNAUJ
जलालपुर(कन्नौज)। डार्कजोन जलालाबाद ब्लॉक के नेकपुर कायस्थ में भूजल स्तर को बढ़ाने और जल संचयन के लिए पौने सत्रह लाख में बनाया गया चेकडैम पहली ही बारिश में बह गया। डैम का पानी आसपास के खेतों में भरने से किसान परेशान हैं। किसानों ने निर्माण में गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
जलालाबाद ब्लाक क्षेत्र डार्कजोन घोषित है। इस क्षेत्र में बारिश का पानी बचाने और भूगर्भजल बचाने पर प्रशासन खास जोर दे रहा है। किसानों का नलकूप तक लगाने की अनुमति नहीं है। सिंचाई और भूगर्भजल बढ़ाने के उद्देश्य से इसी साल जनवरी में नेकपुर कायस्थ गांव में दो किलोमीटर लंबा चैकडेम बनाया गया था। इसमें 64 हजार घनमीटर पानी जमा करने का लक्ष्य था। लघु सिंचाई विभाग ने इसका निर्माण 16 लाख 78 हजार में कराया था। काली नदी को जोड़कर इस डेम को बचाने का उद्देश्य बारिश का पानी जमा कर नेकपुर, गोधनी, गोवर्धनी, भवानीपुर, भानपुर, कंजौली, सहदहां और भगतगाढ़ा समेत 15 गांवों के किसानों की 50 हेक्टेयर खेती की सिंचाई करना था।
किसानों का आरोप है कि घटिया निर्माण होने से पहली ही बारिश में डैम की दीवार टूट गई है। इससे निर्माण में भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है। किसान ज्ञानेश चतुर्वेदी ,अमित चतुर्वेदी और किसान प्रदीप पाल ने कहा कि बुधवार को क्षेत्र में पहली बार अच्छी बारिश हुई। इसमें चेकडैम बह गया। इसके निर्माण में गड़बड़ी की गई है, ठीक से काम नहीं हुआ है। खेतों में डेम का पानी भरने से फसलें भी खराब हो जाएंगी। रोहित ने कहा कि छह माह में डेम ध्वस्त होने से निर्माण में गड़बड़ी की पोल खुल गई है।
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वर्जन
क्षतिग्रस्त चेकडैम के निरीक्षण के लिए टीम को भेजा गया है। अगर दीवार टूटी है, तो उसे ठीक करा दिया जाएगा।
डीपी वर्मा, सहायक अभियंता लघु सिंचाई विभाग
वर्जन
मामले की जांच कराई जाएगी। अगर निर्माण कार्य में लापरवाही हुई, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। अपूर्वा यादव, एसडीएम सदर
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जलालाबाद ब्लाक क्षेत्र डार्कजोन घोषित है। इस क्षेत्र में बारिश का पानी बचाने और भूगर्भजल बचाने पर प्रशासन खास जोर दे रहा है। किसानों का नलकूप तक लगाने की अनुमति नहीं है। सिंचाई और भूगर्भजल बढ़ाने के उद्देश्य से इसी साल जनवरी में नेकपुर कायस्थ गांव में दो किलोमीटर लंबा चैकडेम बनाया गया था। इसमें 64 हजार घनमीटर पानी जमा करने का लक्ष्य था। लघु सिंचाई विभाग ने इसका निर्माण 16 लाख 78 हजार में कराया था। काली नदी को जोड़कर इस डेम को बचाने का उद्देश्य बारिश का पानी जमा कर नेकपुर, गोधनी, गोवर्धनी, भवानीपुर, भानपुर, कंजौली, सहदहां और भगतगाढ़ा समेत 15 गांवों के किसानों की 50 हेक्टेयर खेती की सिंचाई करना था।
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किसानों का आरोप है कि घटिया निर्माण होने से पहली ही बारिश में डैम की दीवार टूट गई है। इससे निर्माण में भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है। किसान ज्ञानेश चतुर्वेदी ,अमित चतुर्वेदी और किसान प्रदीप पाल ने कहा कि बुधवार को क्षेत्र में पहली बार अच्छी बारिश हुई। इसमें चेकडैम बह गया। इसके निर्माण में गड़बड़ी की गई है, ठीक से काम नहीं हुआ है। खेतों में डेम का पानी भरने से फसलें भी खराब हो जाएंगी। रोहित ने कहा कि छह माह में डेम ध्वस्त होने से निर्माण में गड़बड़ी की पोल खुल गई है।
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क्षतिग्रस्त चेकडैम के निरीक्षण के लिए टीम को भेजा गया है। अगर दीवार टूटी है, तो उसे ठीक करा दिया जाएगा।
डीपी वर्मा, सहायक अभियंता लघु सिंचाई विभाग
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मामले की जांच कराई जाएगी। अगर निर्माण कार्य में लापरवाही हुई, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। अपूर्वा यादव, एसडीएम सदर