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मंडलायुक्त की भी नहीं माने बिजली अधिकारी
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तिर्वा (कन्नौज)। मंडलायुक्त के निर्देश के करीब एक महीने बाद भी काऊ मिल्क प्लांट की बिजली समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। दिन में आठ से 10 बार ट्रिपिंग होती है। वोल्टेज भी हाई, लो बना रहता है। बिजली न होने के कारण मशीनें ठप हो जाती हैं, इससे दूध खराब हो जाता है।
करीब एक महीने पहले काऊ मिल्क प्लांट आए मंडलायुक्त सुधीर एम बोवडे को अधिकारियों ने बार-बार बिजली जाने की समस्या बताई थी। उसी समय मंडलायुक्त ने डीएम को बिजली विभाग के अधिकारियों से बात कर समस्या का तुरंत निस्तारण कराने के निर्देश दिए थे। किंतु एक महीने बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। प्लांट प्रभारी संजय सिन्हा ने बताया कि करीब तीन महीने से बिजली की आपूर्ति ठीक नहीं है।
बार-बार बिजली जाने से प्लांट में लगी अल्ट्रा सेंसिटिव मशीनों के साथ एसी में खराबी आने लगी है। बिजली आपूर्ति सुचारु न होने से ट्रेटा थिमोनिया मशीन संचालित नहीं हो पा रही हैं। इस मशीन से पैक दूध छह से नौ माह तक सुरक्षित रहता है। प्रदीप वर्मा ने बताया कि प्लांट में ट्रेटा थिमोनिया पैकिंग मशीन से पैके होने वाला दूध स्कूलों के साथ फौजियों के लिए पहुंचाया जा सकता है। प्लांट पर दूध पैकिंग के साथ घी, पनीर भी बनाया जाता है।
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अलग लाइन फिर भी समस्या
काऊ प्लांट के लिए अलग बिजली लाइन है। इसके बावजूद निर्बाध बिजली नहीं मिल पा रही है। प्लांट प्रभारी ने बताया कि दिन में 8 से 10 बार बिजली जाती है। हल्की बूंदाबांदी होने पर वोल्टेज हाई और लो हो जाता है। इससे मशीनें बंद हो जाती हैं। तिर्वा कंट्रोल रूम से बिना सूचना के शट डाउन लिया जाता है। फोन करने पर बिजली के अधिकारी फोन नहीं उठाते हैं। निर्बाध आपूर्ति के लिए बिजली अधिकारियों को पत्र भी लिखा गया है।
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करीब एक महीने पहले काऊ मिल्क प्लांट आए मंडलायुक्त सुधीर एम बोवडे को अधिकारियों ने बार-बार बिजली जाने की समस्या बताई थी। उसी समय मंडलायुक्त ने डीएम को बिजली विभाग के अधिकारियों से बात कर समस्या का तुरंत निस्तारण कराने के निर्देश दिए थे। किंतु एक महीने बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। प्लांट प्रभारी संजय सिन्हा ने बताया कि करीब तीन महीने से बिजली की आपूर्ति ठीक नहीं है।
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बार-बार बिजली जाने से प्लांट में लगी अल्ट्रा सेंसिटिव मशीनों के साथ एसी में खराबी आने लगी है। बिजली आपूर्ति सुचारु न होने से ट्रेटा थिमोनिया मशीन संचालित नहीं हो पा रही हैं। इस मशीन से पैक दूध छह से नौ माह तक सुरक्षित रहता है। प्रदीप वर्मा ने बताया कि प्लांट में ट्रेटा थिमोनिया पैकिंग मशीन से पैके होने वाला दूध स्कूलों के साथ फौजियों के लिए पहुंचाया जा सकता है। प्लांट पर दूध पैकिंग के साथ घी, पनीर भी बनाया जाता है।
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अलग लाइन फिर भी समस्या
काऊ प्लांट के लिए अलग बिजली लाइन है। इसके बावजूद निर्बाध बिजली नहीं मिल पा रही है। प्लांट प्रभारी ने बताया कि दिन में 8 से 10 बार बिजली जाती है। हल्की बूंदाबांदी होने पर वोल्टेज हाई और लो हो जाता है। इससे मशीनें बंद हो जाती हैं। तिर्वा कंट्रोल रूम से बिना सूचना के शट डाउन लिया जाता है। फोन करने पर बिजली के अधिकारी फोन नहीं उठाते हैं। निर्बाध आपूर्ति के लिए बिजली अधिकारियों को पत्र भी लिखा गया है।