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नवरात्र में कमी की बजाय उछला प्याज, दाम हुए तिगुने
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कन्नौज। प्याज की कीमतों में उछाल आ गया है। दाम तीन गुने हो गए हैं। नवरात्र में कमी की बजाय दामों में बढ़ोतरी से सभी चौंके हुए हैं। जानकारों के मुताबिक स्थानीय किसानों के प्याज प्रदेश के बाहर बेचने से ऐसी नौबत बनी है। यह तेजी दिसंबर तक रह सकती है।
केंद्र सरकार ने प्याज के विदेश निर्यात पर लगी रोक हटा दी है। इसका असर उत्तर भारत की मंडियों पर पड़ रहा है। इलाकाई किसान बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब और दिल्ली के व्यापारियों को उपज बेच रहे हैं। इससे स्थानीय मंडी में उपलब्धता घटी है।
इसी से नवरात्र में भी दाम बढ़े गए हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश के किसान प्याज निर्यात को बढ़ा रहे हैं। फर्रुखाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज समेत आधा दर्जन जिलों से प्याज जिले में बिकने आता है। जिले के 72 से 100 गांवों में प्याज की पैदावार बड़े पैमाने पर होती है। इन गांवों से इलाकाई मंडियों में प्याज आ रहा है। मांग के मुताबिक आपूर्ति न होने से भी दाम चढ़े हैं।
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रिजगिर, दाईपुर, काजीपुर, जसौली, मढ़ारपुर, सलेमपुर, जलालपुर, अमरा, चौराचांदपुर, चौधरियापुर, तिखवा, मित्रसेनपुर, गदनपुर नरहा, अलियापुर, जुकैया, जसोदा, अटारा, ऊंचा, अनौगी समेत 72 से 100 गांवाें में बड़ी पैदावार होती है।
प्याज और टमाटर के आढ़ती मो. इरफान का कहना है कि सदर मंडी में एक माह पहले तक हर रोज एक हजार बोरी प्याज आ रहा था। मांग से ज्यादा उपज आने से दाम नहीं बढ़े। अब आवक छह सौ बोरी पर सिमट गई है।
महाराष्ट्र, गुजरात और मध्यप्रदेश का प्याज विदेशों में निर्यात होने से वहां से आवक बंद हो गई। इलाकाई किसानों की पैदावार बाहर के व्यापारी खरीदने लगे हैं। यहां के किसानों के पास प्याज कम बचा है। महाराष्ट्र, गुजरात और मध्यप्रदेश का प्याज दिसंबर से आना शुरू होगा। तब तक दामों में उछाल बना रहेगा।
मो. मेराज ने बताया कि नासिक से प्रतिदिन डेढ़ हजार बोरी तक प्याज मंडी में आता था। अब मांग से बहुत कम आ रहा है। ऐसे में दाम बढ़ना स्वाभाविक है।
मो. आसिफ ने बताया कि पंद्रह दिन पहले प्याज 70 से 90 रुपये में पांच किलो बिक रहा था। आवक घटने से यह दो सौ रुपये में पांच किलो हो गया। दामों में दिसंबर तक बढ़ोतरी बनी रहेगी।
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केंद्र सरकार ने प्याज के विदेश निर्यात पर लगी रोक हटा दी है। इसका असर उत्तर भारत की मंडियों पर पड़ रहा है। इलाकाई किसान बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब और दिल्ली के व्यापारियों को उपज बेच रहे हैं। इससे स्थानीय मंडी में उपलब्धता घटी है।
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इसी से नवरात्र में भी दाम बढ़े गए हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश के किसान प्याज निर्यात को बढ़ा रहे हैं। फर्रुखाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज समेत आधा दर्जन जिलों से प्याज जिले में बिकने आता है। जिले के 72 से 100 गांवों में प्याज की पैदावार बड़े पैमाने पर होती है। इन गांवों से इलाकाई मंडियों में प्याज आ रहा है। मांग के मुताबिक आपूर्ति न होने से भी दाम चढ़े हैं।
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रिजगिर, दाईपुर, काजीपुर, जसौली, मढ़ारपुर, सलेमपुर, जलालपुर, अमरा, चौराचांदपुर, चौधरियापुर, तिखवा, मित्रसेनपुर, गदनपुर नरहा, अलियापुर, जुकैया, जसोदा, अटारा, ऊंचा, अनौगी समेत 72 से 100 गांवाें में बड़ी पैदावार होती है।
प्याज और टमाटर के आढ़ती मो. इरफान का कहना है कि सदर मंडी में एक माह पहले तक हर रोज एक हजार बोरी प्याज आ रहा था। मांग से ज्यादा उपज आने से दाम नहीं बढ़े। अब आवक छह सौ बोरी पर सिमट गई है।
महाराष्ट्र, गुजरात और मध्यप्रदेश का प्याज विदेशों में निर्यात होने से वहां से आवक बंद हो गई। इलाकाई किसानों की पैदावार बाहर के व्यापारी खरीदने लगे हैं। यहां के किसानों के पास प्याज कम बचा है। महाराष्ट्र, गुजरात और मध्यप्रदेश का प्याज दिसंबर से आना शुरू होगा। तब तक दामों में उछाल बना रहेगा।
मो. मेराज ने बताया कि नासिक से प्रतिदिन डेढ़ हजार बोरी तक प्याज मंडी में आता था। अब मांग से बहुत कम आ रहा है। ऐसे में दाम बढ़ना स्वाभाविक है।
मो. आसिफ ने बताया कि पंद्रह दिन पहले प्याज 70 से 90 रुपये में पांच किलो बिक रहा था। आवक घटने से यह दो सौ रुपये में पांच किलो हो गया। दामों में दिसंबर तक बढ़ोतरी बनी रहेगी।