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Kannauj News: खुशबू ही नहीं, इत्र का इतिहास भी बनेगा नई पहचान
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कन्नौज। इत्र नगरी के नाम से विश्व विख्यात शहर अब केवल अपनी सुगंध के लिए ही नहीं, बल्कि इत्र के गौरवशाली इतिहास के केंद्र के रूप में भी वैश्विक पटल पर स्थापित होने जा रहा है। शनिवार को शहर के एक होटल में आयोजित एक गोष्ठी में अशोका विश्वविद्यालय के हिस्ट्री ऑफ साइंस विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रोजित बिहारी मुखर्जी ने इत्र के वैज्ञानिक और ऐतिहासिक सफर के कई अनछुए पहलुओं को साझा किया। इस गोष्ठी में इत्र कारोबारियों, प्रगतिशील किसानों, म्यूज़ियम विशेषज्ञों और नए उद्यमियों ने शिरकत की।
डॉ. मुखर्जी ने अपने गहन अध्ययन के आधार पर बताया कि कन्नौज का इत्र केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि सदियों पुरानी वैज्ञानिक विरासत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे यहां की मिट्टी (मिट्टी इत्र) और पारंपरिक डेग-भभका विधि ने विज्ञान के सिद्धांतों को सदियों से संजोए रखा है। परिचर्चा के दौरान नए उद्यमियों और किसानों ने इत्र के इतिहास को पर्यटन और ब्रांडिंग से जोड़ने पर विचार साझा किए। स्थानीय इत्र निर्माताओं का मानना है कि इतिहास के साथ जुड़ने से कन्नौज के उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में जीआई टैग के साथ-साथ एक नई बौद्धिक पहचान भी मिलेगी। अब दुनिया यह जान पाएगी कि गुलाब और खस की हर बूंद के पीछे कितना गहरा शोध और प्राचीन इंजीनियरिंग छिपी है।
समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि शहर की पहचान अब एक व्यापारिक मंडी से आगे बढ़कर इत्र के इतिहास के केंद्र के रूप में विकसित की जाएगी। इससे न केवल शोधार्थियों को मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में शहर में परफ्यूम टूरिज्म को भी बड़े स्तर पर बढ़ावा मिलेगा। इत्र के इस ऐतिहासिक सफर को संजोने के लिए म्यूज़ियम की भूमिका पर भी विशेष चर्चा की गई। इस दौरान डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, एसपी विनोद कुमार, द अतर्स ड परफ्यूमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन त्रिवेदी, उद्योगपति विपिन दीक्षित आदि उपस्थित रहे।
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डॉ. मुखर्जी ने अपने गहन अध्ययन के आधार पर बताया कि कन्नौज का इत्र केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि सदियों पुरानी वैज्ञानिक विरासत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे यहां की मिट्टी (मिट्टी इत्र) और पारंपरिक डेग-भभका विधि ने विज्ञान के सिद्धांतों को सदियों से संजोए रखा है। परिचर्चा के दौरान नए उद्यमियों और किसानों ने इत्र के इतिहास को पर्यटन और ब्रांडिंग से जोड़ने पर विचार साझा किए। स्थानीय इत्र निर्माताओं का मानना है कि इतिहास के साथ जुड़ने से कन्नौज के उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में जीआई टैग के साथ-साथ एक नई बौद्धिक पहचान भी मिलेगी। अब दुनिया यह जान पाएगी कि गुलाब और खस की हर बूंद के पीछे कितना गहरा शोध और प्राचीन इंजीनियरिंग छिपी है।
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समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि शहर की पहचान अब एक व्यापारिक मंडी से आगे बढ़कर इत्र के इतिहास के केंद्र के रूप में विकसित की जाएगी। इससे न केवल शोधार्थियों को मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में शहर में परफ्यूम टूरिज्म को भी बड़े स्तर पर बढ़ावा मिलेगा। इत्र के इस ऐतिहासिक सफर को संजोने के लिए म्यूज़ियम की भूमिका पर भी विशेष चर्चा की गई। इस दौरान डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, एसपी विनोद कुमार, द अतर्स ड परफ्यूमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन त्रिवेदी, उद्योगपति विपिन दीक्षित आदि उपस्थित रहे।
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