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नए आलू की आवक बढ़ी, पुराने के दाम अभी भी चढ़े

Thu, 03 Dec 2020 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 03 Dec 2020 11:39 PM IST
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nae aaloo kee aavak badhee, puraane ke daam abhee bhee chadhe
आलू की खुदाई करते किसान। - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। महंगाई का दौर हो या फिर मंदी का वक्त, बाजार में नया आलू आते ही पुरानी उपज के दाम गिर जाते हैं। इस बार ऐसा नहीं है। बाजार में नया आलू आने के बाद भी पुराने के दामों में इजाफा है। नए आलू की आवक बढ़ रही है। इसके बाद भी पुराने के दाम चढ़े हैं। पुराना आलू नए से ज्यादा दामों पर बिक रहा है।
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जिले में नवंबर माह के पहले सप्ताह से पंजाब का आलू आने लगता है। इससे पुराने आलू के भाव गिरने लगते। नवंबर के अंतिम सप्ताह से जिले में ईशन नदी के किनारे बलुई मिट्टी वाले इलाकों में आलू खुदाई शुरू हो जाती है। इस बार भी ईशन नदी के विशुनगढ़ इलाके से लेकर तिर्वा, ठठिया की सुर्सी बेल्ट में खुदाई तेज हो गई है। मौजूदा समय नया आलू 15 सौ रुपये से 18 सौ रुपये प्रति 50 किलो पैकेट बिक रहा है। वहीं पुराने आलू का 50 किलो का पैकेट लगभग 19 सौ रुपये से दो हजार तक में बिक रहा है। फुटकर में नया आलू 40 रुपये प्रति किलो और पुराना आलू 50 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। व्यापारियों का कहना है कि आमतौर पर नया आलू आने पर पुराने आलू के दाम गिर जाते थे। इस बार तेवर कम नहीं हो रहे हैं।
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कच्चे आलू के फीके स्वाद ने बढ़ाए पुराने के दाम
महंगाई के दौर में किसान 50 से 60 दिन में नए आलू की खुदाई कर रहे हैं। नया आलू अभी कच्चा है। इससे स्वाद फीका और पनीला है। इस वजह से लोग ऊर्जा चैंबर से निकले मिठास रहित पुराने आलू को खरीदना पसंद कर रहे हैं। जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी ने बताया कि कच्चे आलू की नई फसल की खुदाई 70 से 75 दिन में होने पर आलू की गुणवत्ता अच्छी होती है। यह आलू खाने में फीका और पनीला नहीं लगता है। 10 दिसंबर से पुराने आलू के दाम घटने की संभावना है।
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स्थानीय बाजार में ही खप रहा नया आलू
आलू के दाम महंगे होने से थोक व्यापारियों के डंप किया पुराना आलू गाजियाबाद, कानपुर, लखनऊ से लेकर बनारस तक भेजा जा रहा है। स्थानीय सब्जी बाजारों में पुराने आलू की उपलब्धता कम होने से दाम बढ़े हैं। आलू के थोक व्यापारी प्रदीप सिंह ने बताया कि पुराना आलू काफी समय तक सुरक्षित रहता है। इस लिहाजा इसे बाहर शहरों में भेजा जा रहा है। नया आलू कच्चा है। इससे इसे बाहर भेजने से खराब होने की आशंका रहती है। स्थानीय बाजार में खपने से नए आलू के दाम नहीं चढ़ रहे।
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